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भारत को महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए हमेशा याद किए जाएंगे अटल: केशरी नाथ
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 26 Aug 2018 01:46 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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संगम तट पर अस्थि विसर्जन से पहले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए शनिवार को जन सैलाब उमड़ पड़ा। पुष्पांजलि के बाद यहां हुई श्रद्धांजलि सभा में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी उनके संस्मरणों को याद कर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश से मित्रता स्थापित करने के लिए अटल जी ने लाहौर बस सेवा शुरू कर मिसाल पेश की, लेकिन जब दुश्मन ने भारत की ओर आंख तरेरी, तब कारगिल विजय के रूप में दुनिया ने उनका रौद्र रूप भी देखा। उनको देश की राजनीति में नए आयाम स्थापित करने वाले नेता के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में पहला भाषण अटल जी ने दिया था। इसके पीछे उनका उद्देश्य था देशवासियों को राष्ट्रबोध कराना। पोखरण में परमाणु विस्फोट के जरिए पूर्व पीएम ने पूरी दुनिया को बताया कि भारत एक महाशक्ति है। वह सौदेबाजी की राजनीति में विश्वास नहीं करते थे। यही वजह थी कि पहली बार जब वह पीएम बने थे, तब अविश्वास प्रस्ताव के दौरान संसद में उन्होंने इस्तीफा देने का एलान कर दिया था। अपनी वाकपटुता के चलते अटल जी अपने विरोधियों का भी दिल जीत लेते थे।डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्होंने भाजपा का जो वटवृक्ष खड़ा किया, वह आज पूरे देश में पुष्पित होकर लहलहा रहा है। उनके लगाए इस वटवृक्ष को हम लोग आजीवन संजोए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। वह देवदूत थे। इसीलिए जब संगमनगरी में उनका अस्थिकलश आया तो इंद्र भगवान भी खुद को नहीं रोक सके। उन्होंने अटल जी की कविता की पंक्तियां भी दोहराईं- भारत जमीन का टुकड़ा नहीं है/यह चंदन की भूमि है /अभिनंदन की भूमि है/हम जिएंगे तो इसके लिए /हम मरेंगे तो इसके लिए...। डिप्टी सीएम ने अटल जी के उन शब्दों को दोहराया, जब उन्होंने कहा था कि - जब हम मरेंगे तो मेरी अस्थियां गंगा में प्रवाहित होंगी तो वह भी बोलेंगी- भारत माता की जय...। इनके बाद आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक अनिल जी, मंत्री महेंद्र सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, रीता बहुगुणा जोशी ने भी संस्मरणोें को साझा किया।
इस मौके पर संत छोटेलाल, आदर्श महाराज, माया द्विवेदी, अंजलि गोस्वामी, आभा जयसवाल, रंजना वर्मा, गीता विश्वकर्मा, अर्चना शुक्ला, रामानंद शुक्ला, रविंद्र त्रिपाठी, अरुण अग्रवाल, दिलीप श्रीवास्तव, गुरु प्रकाश मौर्य, दीपक पटेल, नवरत्न कात्याल, अंकित मिश्रा, दिलीप कुशवाहा, विजय पटेल, विश्वास श्रीवास्तव, विशाल अग्रवाल, राजेश पांडेय, राघवेंद्र मिश्रा, रामरक्षा द्विवेदी, डॉ श्याम द्विवेदी, रामजी शुक्ला, लाल जी शुक्ला, अरविंद सिंह, नीरज तिवारी, प्रशांत केसरवानी समेत हजारों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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संगम तट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि कलश को सेना के सशस्त्र जवानों ने सलामी दी। इस दौरान सेना के बैंड पर मातमी धुन बज रही थी। वहां हजारों की तादाद में मौजूद लोगों ने नम आंखों से अटल को नमन किया। अस्थि कलश पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महिला एवं बाल विकास, पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने पुष्प चक्र अर्पित किया।
गंगा, यमुना , सरस्वती की त्रिवेणी में संगम की बीच धारा में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां विसर्जित की गईं। दोपहर 2:25 बजे अलग-अलग चार मोटर बोट से अस्थि कलश लेकर मंत्री, सांसद, विधायक और अफसर संगम की बीच धारा में पहुंचे। वहां जेटी के बने प्लेटफार्म पर अस्थि कलश रखकर पुरोहित प्रदीप पांडेय, आचार्य दीपू मिश्रा, धीरेंद्र मिश्रा, शुभम तिवारी, आदित्य शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। इसके बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अस्थि कलश संगम में विसर्जित किया। इस मौके पर पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी, भाजपा महानगर अध्यक्ष अवधेश गुप्ता, शहर उत्तरी के विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, विक्रमाजीत मौर्य, विधायक नीलम करवरिया, प्रदेश संगठन मंत्री अमर पाल मौर्य, एमएलसी अशोक धवन, राजमणि कोल, अजय भारतीय, डॉ. यज्ञदत्त शर्मा, लाल बहादुर, जमुना प्रसाद सरोज, डॉ आरके वर्मा, डॉ नरेंद्र सिंह गौर, योगेश मौर्य, अमरनाथ तिवारी, शिवदत्त पटेल, रणजीत सिंह, डॉ कमला सिंह, शशि वार्ष्णेय, राजेंद्र मिश्रा, सुनील जैन, कमलेश कुमार, निर्मला पासवान, अशोक बाजपेयी, रमेश पासी उपस्थित थे।
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में पहला भाषण अटल जी ने दिया था। इसके पीछे उनका उद्देश्य था देशवासियों को राष्ट्रबोध कराना। पोखरण में परमाणु विस्फोट के जरिए पूर्व पीएम ने पूरी दुनिया को बताया कि भारत एक महाशक्ति है। वह सौदेबाजी की राजनीति में विश्वास नहीं करते थे। यही वजह थी कि पहली बार जब वह पीएम बने थे, तब अविश्वास प्रस्ताव के दौरान संसद में उन्होंने इस्तीफा देने का एलान कर दिया था। अपनी वाकपटुता के चलते अटल जी अपने विरोधियों का भी दिल जीत लेते थे।डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्होंने भाजपा का जो वटवृक्ष खड़ा किया, वह आज पूरे देश में पुष्पित होकर लहलहा रहा है। उनके लगाए इस वटवृक्ष को हम लोग आजीवन संजोए रखने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। वह देवदूत थे। इसीलिए जब संगमनगरी में उनका अस्थिकलश आया तो इंद्र भगवान भी खुद को नहीं रोक सके। उन्होंने अटल जी की कविता की पंक्तियां भी दोहराईं- भारत जमीन का टुकड़ा नहीं है/यह चंदन की भूमि है /अभिनंदन की भूमि है/हम जिएंगे तो इसके लिए /हम मरेंगे तो इसके लिए...। डिप्टी सीएम ने अटल जी के उन शब्दों को दोहराया, जब उन्होंने कहा था कि - जब हम मरेंगे तो मेरी अस्थियां गंगा में प्रवाहित होंगी तो वह भी बोलेंगी- भारत माता की जय...। इनके बाद आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक अनिल जी, मंत्री महेंद्र सिंह, नंद गोपाल गुप्ता नंदी, रीता बहुगुणा जोशी ने भी संस्मरणोें को साझा किया।
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इस मौके पर संत छोटेलाल, आदर्श महाराज, माया द्विवेदी, अंजलि गोस्वामी, आभा जयसवाल, रंजना वर्मा, गीता विश्वकर्मा, अर्चना शुक्ला, रामानंद शुक्ला, रविंद्र त्रिपाठी, अरुण अग्रवाल, दिलीप श्रीवास्तव, गुरु प्रकाश मौर्य, दीपक पटेल, नवरत्न कात्याल, अंकित मिश्रा, दिलीप कुशवाहा, विजय पटेल, विश्वास श्रीवास्तव, विशाल अग्रवाल, राजेश पांडेय, राघवेंद्र मिश्रा, रामरक्षा द्विवेदी, डॉ श्याम द्विवेदी, रामजी शुक्ला, लाल जी शुक्ला, अरविंद सिंह, नीरज तिवारी, प्रशांत केसरवानी समेत हजारों कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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संगम तट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि कलश को सेना के सशस्त्र जवानों ने सलामी दी। इस दौरान सेना के बैंड पर मातमी धुन बज रही थी। वहां हजारों की तादाद में मौजूद लोगों ने नम आंखों से अटल को नमन किया। अस्थि कलश पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य, कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, महिला एवं बाल विकास, पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने पुष्प चक्र अर्पित किया।
गंगा, यमुना , सरस्वती की त्रिवेणी में संगम की बीच धारा में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की अस्थियां विसर्जित की गईं। दोपहर 2:25 बजे अलग-अलग चार मोटर बोट से अस्थि कलश लेकर मंत्री, सांसद, विधायक और अफसर संगम की बीच धारा में पहुंचे। वहां जेटी के बने प्लेटफार्म पर अस्थि कलश रखकर पुरोहित प्रदीप पांडेय, आचार्य दीपू मिश्रा, धीरेंद्र मिश्रा, शुभम तिवारी, आदित्य शर्मा ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। इसके बाद पश्चिम बंगाल के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी के साथ डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने अस्थि कलश संगम में विसर्जित किया। इस मौके पर पर्यटन मंत्री डॉ. रीता बहुगुणा जोशी, उड्डयन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी, भाजपा महानगर अध्यक्ष अवधेश गुप्ता, शहर उत्तरी के विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी, विक्रमाजीत मौर्य, विधायक नीलम करवरिया, प्रदेश संगठन मंत्री अमर पाल मौर्य, एमएलसी अशोक धवन, राजमणि कोल, अजय भारतीय, डॉ. यज्ञदत्त शर्मा, लाल बहादुर, जमुना प्रसाद सरोज, डॉ आरके वर्मा, डॉ नरेंद्र सिंह गौर, योगेश मौर्य, अमरनाथ तिवारी, शिवदत्त पटेल, रणजीत सिंह, डॉ कमला सिंह, शशि वार्ष्णेय, राजेंद्र मिश्रा, सुनील जैन, कमलेश कुमार, निर्मला पासवान, अशोक बाजपेयी, रमेश पासी उपस्थित थे।