Prayagraj : अशरफ का रिश्तेदार 20 लाख रंगदारी मांगने में गिरफ्तार, पूरामुफ्ती थाने में दर्ज कराया गया था केस
अख्तर माफिया अशरफ के साढ़ू का भाई है। बिहका उर्फ पूरामुफ्ती के माबूद अहमद ने बताया था कि वह सल्लाहपुर स्थित वक्फ संपत्ति के केयरटेेकर हैं। आठ मई को सुबह नौ बजे वह पुरामुफ्ती से धूमनगंज जा रहे थे तभी रास्ते में सल्लाहपुर बाग के पास हिस्ट्रीशीटर सिबली निवासी हटवा, जैन निवासी उमरपुर नीवा, हासिर निवासी नखास कोना और अख्तर निवासी हटवा अपने चार अन्य अज्ञात साथियों के साथ आए और उसे पीटने लगे।
विस्तार
पूरामुफ्ती में 20 लाख रंगदारी मांगने के मामले में रविवार को माफिया अशरफ का रिश्तेदार अख्तर गिरफ्तार कर लिया गया। सल्लाहपुर स्थित वक्फ संपत्ति के केयरटेकर ने अख्तर व चार नामजद समेत आठ लोगों पर चार महीने पहले मुकदमा दर्ज कराया था।
अख्तर माफिया अशरफ के साढ़ू का भाई है। बिहका उर्फ पूरामुफ्ती के माबूद अहमद ने बताया था कि वह सल्लाहपुर स्थित वक्फ संपत्ति के केयरटेेकर हैं। आठ मई को सुबह नौ बजे वह पुरामुफ्ती से धूमनगंज जा रहे थे तभी रास्ते में सल्लाहपुर बाग के पास हिस्ट्रीशीटर सिबली निवासी हटवा, जैन निवासी उमरपुर नीवा, हासिर निवासी नखास कोना और अख्तर निवासी हटवा अपने चार अन्य अज्ञात साथियों के साथ आए और उसे पीटने लगे।
विरोध पर जैन व हासिर तमंचा सटाकर बोले कि वक्फ की जमीन पर काम करना है तो 20 लाख रुपये दो। वरना जान से मार दिए जाओगे। अख्तर ने जेब में रखे 20 हजार रुपये भी छीन लिए। प्रभारी थाना पूरामुफ्ती मनोज कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। एक नामजद आरोपी हासिर पहले ही जेल भेजा जा चुका है। जैन की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने रोक लगा दी है। जबकि सिबली की तलाश की जा रही है।
अख्तर के घर में ही हैं अतीक के दो बेटे
अख्तर के ही घर में अतीक के बेटे एहजम व अबान मौजूदा समय में रह रहे हैं। पिछले साल नौ अक्तूबर को राजरूपपुर बाल गृह से मुक्त किए जाने के बाद दोनों को यहीं ले जाया गया था। दोनों को उनकी बुआ (अतीक अहमद की दूसरे नंबर की बहन) परवीन कुरैशी के सुपुर्द किया गया था। जिन्होंने बाल कल्याण समिति के समक्ष हलफनामा प्रस्तुत कर बताया था कि दोनों को हटवा स्थित रिश्तेदार अंसार अहमद के घर रखा जाएगा। गिरफ्तार अख्तर अंसार का ही बेटा है। 24 फरवरी 2023 को उमेश पाल हत्याकांड के बाद दो मार्च को दोनों बेटों को बाल गृह में आवासित कराया गया था। 221 दिन बाद उन्हें यहां से निकाला गया था।