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Ram Mandir : तब अशोक सिंघल ने कहा था- राम मंदिर नहीं बना तो नहीं बचेगी हिंदू समाज की पहचान

Sun, 14 Jan 2024 05:21 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 14 Jan 2024 05:21 PM IST
सार

अशोक सिंहल का स्पष्ट जवाब था- अगर अयोध्या में जन्मभूमि पर राम का मंदिर नहीं बनेगा, तो इस देश में हिंदू समाज और उसकी पहचान भी नहीं बचेगी। भारत की पहचान प्रभु राम से और हिंदू की भी पहचान प्रभु राम से है और अयोध्या इन्हीं राम की जन्मस्थली है। सवाल एक मंदिर का नहीं है, बल्कि राम की जन्मभूमि का है।

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Ashok Singhal had said –Ram temple is not built then the identity of Hindu society will n
अशोक सिंघल - फोटो : साेशल मीडिया

विस्तार

राम मंदिर आंदोलन को धार देने वाले कई बड़े चेहरे अपने जीते जी राम मंदिर निर्माण के सपने को साकार होता नहीं देख सके। इसमें महंत रामचंद्र परमहंस, विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल आदि दिग्गजों के नाम प्रमुख रूप से शामिल है। मंदिर के भूमि पूजन से पहले ही यह दुनिया को अलविदा कह गए हैं। अब जब अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है तो इन महापुरुषों को याद करना भी लाजिमी है।

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अयोध्या आंदोलन का नेतृत्व अशोक सिंघल ने प्रयागराज से ही किया। यहां हाशिमपुर स्थित महावीर भवन ही उनका आवास एवं कार्यालय रहा। आंदोलन की तमाम रणनीति महावीर भवन में ही बनती। अशोक सिंघल संग वर्षों रहे एवं पूर्व पार्षद पवन श्रीवास्तव आंदोलन के दिनों की तमाम बातें साझा की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन चलाने के लिए जनसमर्थन जुटाने में विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल की अहम भूमिका रही। सिंघल को राम मंदिर आंदोलन का ''''''''चीफ आर्किटेक्ट'''''''' माना जाता है।

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कहा कि आंदोलन के दौरान उनसे एक मीडिया हाउस द्वारा राम जन्मभूमि मुद्दे पर पूछे गए एक सवाल कि अयोध्या में अगर एक मंदिर नहीं बनेगा, तो क्या हो जाएगा ? उस पर स्वर्गीय अशोक सिंहल का स्पष्ट जवाब था- अगर अयोध्या में जन्मभूमि पर राम का मंदिर नहीं बनेगा, तो इस देश में हिंदू समाज और उसकी पहचान भी नहीं बचेगी। भारत की पहचान प्रभु राम से और हिंदू की भी पहचान प्रभु राम से है और अयोध्या इन्हीं राम की जन्मस्थली है। सवाल एक मंदिर का नहीं है, बल्कि राम की जन्मभूमि का है।

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पवन बताते हैं कि तब प्रयागराज के हिंदू संगठनों के अत्यधिक कार्यकर्ता दूर दराज से आए हुए राम भक्तों की व्यवस्था में लगाए गए थे। स्वर्गीय सिंघल का स्पष्ट निर्देश था कि किसी भी कारसेवक को कोई दिक्क्त नहीं होनी चाहिए। आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत न होने के बावजूद अशोक सिंहल तब महावीर भवन से भी लगातार कारसेवकों के लिए भोजन आदि का प्रबंध करवा रहे थे।

उनके निर्देश के बाद प्रयागराज के तमाम कार्यकर्ता भोजन संकलन वितरण और कार सेवकों के शयन व प्राथमिक चिकित्सा और ट्रेन से आगमन एवं प्रस्थान के दायित्व का निर्वाह कर रहे थे। पवन श्रीवास्तव ने आगे बताया कि वह स्वयं अपनी टीम के साथ राम भक्तों की सेवा में तत्पर रहे और 3-4 दिन अपने आवास ना जाकर लगातार बिना रुके बिना थके दायित्व का निर्वाह करते हुए पूरे मनोयोग से समर्पित रहे।

उन्होंने बताया कि जिस दिन विवादित ढांचा ढहा, उसके अगले दिन शहर में कर्फ्यू जैसा माहौल था और समाचार पत्र की मांग बड़ी तेजी से बढ़ गई। हम सभी को इस बात की चिंता थी कि अशोक सिंघल कहा है। अगले दिन समाचार पत्र के माध्यम से उनकी गिरफ्तारी की सूचना हम सब को मिल सकी थी।

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