{"_id":"5fad91998ebc3e9bdb0e4494","slug":"arrival-of-mahalaxmi-with-dhan-kubera-opening-of-panchdeep-mahaparva","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"धन कुबेर संग महालक्ष्मी का आगमन, पंचदीप महापर्व का आगाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
धन कुबेर संग महालक्ष्मी का आगमन, पंचदीप महापर्व का आगाज
Fri, 13 Nov 2020 01:18 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 13 Nov 2020 01:18 AM IST
सार
धनतेरस पूजा व खरीदारी मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त :दोपहर 11:48 से 12:24 बजे तक
लाभ योग में 13:10से 3:02 बजे तक
अमृत योग -15:06 से 16:32 बजे तक।
प्रदोष काल में महालक्ष्मी पूजा: शाम 5:28 से रात 8:07
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
धन-धान्य का खजाना भरने के लिए कुबेर संग महालक्ष्मी का आगमन बृहस्पतिवार की रात को हो गया। इसी के साथ दिवाली पर पांच दिन चलने वाले साथ पंच दीप महापर्व का आगाज हो गया। रंग-बिरंगे फूलों, हल्दी-चंदन की अल्पनाओं और तरह-तरह की रंगोलियों से मां लक्ष्मी के पदचिह्न उकेरे गए।
विज्ञापन
इसके बाद व्यापारिक प्रतिष्ठानों में महालक्ष्मी की सविधि पूजा के साथ रोशनी से नहाए बाजार में धनवर्षा शुरू हो गई। बृहस्पतिवार को प्रदोषकाल में त्रयोदशी न मिलने से शुक्रवार को धनरेतस पर महालक्ष्मी की पूजा के धनवंतरि भगवान की झांकियां सजाई जाएंगी। इसके साथ ही खरीदारी भी की जाएगी। अमावस्या तिथि में ज्योतिपर्व शनिवार को मनेगा।
विज्ञापन
Trending Videos
diwali
- फोटो : social media
बृहस्पतिवार की रात 9:30 बजे कार्तिक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी लग गई। महालक्ष्मी के आगमन पर घरों से लेकर प्रतिष्ठानों तक कुबेर, लक्ष्मी की प्रतिमाओं की प्रतिष्ठापना कर देर रात कर मंत्रोच्चार के साथ पूजा की गई। महिलाओं ने तरह-तरह की रंगोलियां सजाईं। चावल आटे से महालक्ष्मी के पदचिह्नों की छाप बनाई गई। रंग-बिरंगी झालरों और फूलों के वंदनवारों से घरों और प्रतिष्ठानों को सजाया गया।
विज्ञापन
दीपावली
- फोटो : Social media
प्रदोषकाल में त्रयोदशी न होने से धनतेरस की मान्यता शुक्रवार को भी रहेगी। धनतेरस पर शुक्रवार की दोपहर अभिजीत मुहूर्त में भी कुबेर और महालक्ष्मी की पूजा की जाएगी। इसके साथ पंचदीप महापर्व शुरू हो गया है। शुक्रवार को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए यम केदीप भी जलाए जाएंगे। इसके बाद इस बार 14 नवंबर को नरक चतुर्दशी और दिवाली एक साथ पड़ेगी। अन्नकूट और गोवर्धन पूजा रविवार को होगी। फिर,16 नवंबर को यम द्वितीया, भैया दूज और चित्रगुप्त पूजा की जाएगी।