diwali : पंच महायोग में कुबेर संग महालक्ष्मी का आगमन, अमृत काल में धन-धान्य के लिए आराधना
कुबेर संग महालक्ष्मी का आगमन अमृतकाल में हुआ। इसी के साथ भव्यता से सजाए गए महालक्ष्मी के दरबारों में उल्लास का माहौल छा गया। घरों, प्रतिष्ठानों में चावल के आंटे और रंग बिरंगे फूलों से रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक उकेरे गए।
विस्तार
पांच महायोगों के मिलन के बीच शुक्रवार को कुबेर संग महालक्ष्मी का आगमन हुआ। घरों से लेकर प्रतिष्ठानों तक रंगोलियों, अल्पनाओं और कलशों पर महालक्ष्मी के प्रतीक पदचिह्नों को सजाकर आराधना की गई। इस दौरान भक्तों ने धन धान्य से खजाना भरने की कामना की। इसी के साथ पंचदीप पर्व का शुभारंभ हो गया। ज्योति पर्व दिवाली रविवार को मनाई जाएगी।
कुबेर संग महालक्ष्मी का आगमन अमृतकाल में हुआ। इसी के साथ भव्यता से सजाए गए महालक्ष्मी के दरबारों में उल्लास का माहौल छा गया। घरों, प्रतिष्ठानों में चावल के आंटे और रंग बिरंगे फूलों से रिद्धि-सिद्धि के प्रतीक उकेरे गए। तरह-तरह की रंगोलियां मन मोहती रहीं। वंदनवारों, रंग-बिरंगे फूलों,ध्वजा-पताकाओं, दीपमालाओं और द्वारों-द्वारों पर सजाई गई रंगोलियों से शुक्रवार को धनतेरस पर महालक्ष्मी के आगमन की खुशियां छा गईं।
गेंदा, गुलाब, रजनीगंधा, बेला, चमेली से प्रतिष्ठानों को सजाया गया। इसके बाद शुभ मुहूर्त में शाम 5:17 बजे महालक्ष्मी और कुबेर का पूजन शुरू हो गया। हस्त नक्षत्र में स्थिर योग, इंद्र योग, आयुष्मान योग, प्रीति योग और कलात्मक योग में लोगों ने मां लक्ष्मी का आह्वान किया। मान्यता है कि इस कार्तिक त्रयोदशी पर कुबेर संग महालक्ष्मी धन, समृद्धि और वैभव लेकर धरा पर पधारती हैं। ऐसे में इस बार पांच महायोगों के मिलन को बीच श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की।
आरोग्य के देवता भगवान धनवंतरि की उतारी आरती
कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर शुक्रवार को आरोग्य के देवता भगवान धनवंतरि की पूजा कर निरोगी काया की कामना की गई। इस दौरान औषधीय पौधों और जड़ी-बूटियों को सजाया गया।
त्रयोदशी लगने के बाद शाम को भगवान धनवंतरि की आराधना कर लोगों ने आरोग्य के लिए प्रार्थना की गई। इस दिन आयुर्वेदाचार्यों ने जड़ी-बूटियों की भी पूजा की। तरह-तरह की जड़ी-बूटी सजाकर भगवान धनवंतरि का नमन किया गया। मान्यता है कि इसी त्रयोदशी के दिन ही समुद्र मंथन के समय भगवान धनवंतरि अमृत कलश लेकर कभी धरा पर प्रकट हुए थे।