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High Court :अस्तित्वहीन मदरसे के फर्जीवाड़े के आरोपी की गिरफ्तारी पर रोक, सरकारी मानदेय लेने का मामला
Fri, 10 Oct 2025 05:12 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 10 Oct 2025 05:12 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अस्तित्वहीन मदरसों के फर्जीवाड़े के आरोपी आजमगढ़ के मदरसा अकीबुल उलूम रसांवा के प्रबंधक अब्दुल हलीम की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है।
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अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अस्तित्वहीन मदरसों के फर्जीवाड़े के आरोपी आजमगढ़ के मदरसा अकीबुल उलूम रसांवा के प्रबंधक अब्दुल हलीम की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से तीन हफ्ते में जवाब तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा व न्यायमूर्ति आचल सचदेव की खंडपीठ ने अब्दुल हलीम की ओर से एफआईआर को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है।
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मामला आजमगढ़ के दीदार गंज थाना क्षेत्र का है। एसआईटी जांच में यह खुलासा हुआ था कि 313 मदरसे मानक के विपरीत संचालित हो रहे थे जिनमें 219 पूरी तरह अस्तित्वहीन पाए गए। इनमें से 39 ने आधुनिकीकरण योजना के तहत 62.84 लाख रुपये का मानदेय फर्जी तरीके से प्राप्त किया था जबकि 180 अन्य के संबंध में मानदेय भुगतान का विवरण ही नहीं मिला। इन्हीं 180 मदरसों में मदरसा अकीबुल उलूम रसांवा भी शामिल हैं। जांच में पाया गया कि मदरसा पोर्टल पर भवन व छात्र संख्या शून्य दर्शायी गई पर मौके पर मदरसा संचालित नहीं मिला।
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मान्यता संबंधी पत्रावली जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय में उपलब्ध नहीं थी और पोर्टल पर अपलोड सूचनाएं कूटरचित व मिथ्या थीं। इसी आधार पर प्रबंधक अब्दुल हलीम के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और सरकारी धन के गबन के आरोपों में एफआईआर दर्ज की गई। गिरफ्तारी से बचाने व एफआईआर रद्द कराने की मांग के साथ प्रबंधक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
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याची के अधिवक्ता मशहूद अब्बास ने यह दलील दी कि समान प्रकृति के एक अन्य मामले में गयासुद्दीन को इसी अदालत ने 17 मई 2025 को अंतरिम राहत दी थी। साथ ही मामला 19 दिसंबर 2022 का है जबकि एफआईआर लगभग दो वर्ष बाद 17 फरवरी 2025 को दर्ज की गई है।