APO-2025 : स्टे पर अभी फैसला नहीं, आयोग से तीन सप्ताह में जवाब तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहायक अभियोजन अधिकारी (यूपी एपीओ) 2025 प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सहायक अभियोजन अधिकारी (यूपी एपीओ) 2025 प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचियों की ओर से मांगी गई अंतरिम राहत (स्टे) पर दोनों पक्षों के शपथपत्र दाखिल होने के बाद विचार किया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह ने प्रयागराज निवासी पंकज वर्मा व दो अन्य की याचिका पर दिया। यूपीपीएससी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने विस्तृत प्रति-शपथपत्र दाखिल करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने आयोग को जवाब दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय देते हुए याचियों को उसके बाद एक सप्ताह में प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल करने की छूट दी।
याचिका में एपीओ-2025 प्रारंभिक परीक्षा परिणाम की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। याचियों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में आरक्षण और आयु सीमा से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। मेरिट में आने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सामान्य श्रेणी में समायोजित नहीं किया गया।
जिससे आरक्षण का लाभ प्रभावित हुआ और कई अभ्यर्थी चयन से वंचित रह गए। याचियों ने प्रारंभिक परीक्षा परिणाम को निरस्त कर नए सिरे से परिणाम घोषित करने की मांग की है। वहीं, कोर्ट ने आयोग से जवाब तलब कर लिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 जुलाई 2026 को होगी।