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वसूली से नाराज ट्रक चालकों ने गैस प्लांट में खड़ी कीं ट्रकें
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 24 Jul 2016 02:23 AM IST
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हिमाचल प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडर साढ़े पांच रुपये रुपये सस्ता हो गया है।
शहर में झूंसी स्थित बाटलिंग प्लांट से आने वाले गैस सिलेंडर लदे ट्रक की नो इंट्री होने की वजह से रसोई गैस का बैकलॉग बढ़ने लगा है। इतना ही नहीं इसका असर त्रिवेणीपुरम कालोनी के पास इंडेन की गैस प्लांट में रीफिलिंग पर भी पड़ने लगा है। इसी बीच गैस प्लांट की ट्रकों की आवाजाही को लेकर विभिन्न जगहों पर पुलिस की अवैध वसूली को लेकर चालकों का गुस्सा शनिवार को फूट पड़ा। नाराज ट्रक चालकों ने गैस प्लांट के भीतर और बाहर वाहनों को खड़ा कर कामकाज ठप रखा। इस दौरान ट्रक चालकों ने प्रशासन और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
सावन मास शुरू होते ही शहर में गैस लदे ट्रकों के आने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यहां तक की बल्फ टैंकरों को भी झूंसी में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। ट्रकों को अलोपीबाग चुंगी से पहले ही रोक दिया जा रहा है। ट्रकों को वाया फाफामऊ, सहसों होकर आने दिया जा रहा है। आरोप है कि यहां पुलिस ट्रक चालकों से अवैध वसूली कर रही है। शुक्रवार को जो ट्रक खाली सिलेंडर लेकर गैस प्लांट पहुंचे उन्हें शनिवार को लोड तो कर दिया गया लेकिन निकासी नहीं हो सकी। गैस लदे ट्रक दिनभर प्लांट परिसर में खड़े रहे। साथ ही ट्रक चालकों ने प्लांट के बाहर अपनी ट्रकों को खड़ा कर भारी विरोध दर्ज कराया।
ट्रक चालकों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्लांट के अफसरों ने बताया कि दो शिफ्ट में सिलेंडरों में रीफिलिंग की जाती है। सिलेंडरों की रीफिलिंग कर प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, जौनपुर, भदोही, एमपी, चित्रकूट तथा इलाहाबाद जनपद में सप्लाई की जाती है। ट्रक चालकों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें प्रशासन लिखित रूप से आवाजाही का आश्वासन नहीं देता है, वे ट्रकों को लेकर नहीं जाएंगे। झूंसी प्लांट मैनेजर जेएसएस यादव ने बताया कि प्लांट में जो खाली गैस सिलेंडरों के साथ ट्रकें आई हैं। उनमें रीफिलिंग का कार्य जारी है। हालांकि वाहनों की निकासी नहीं हो रही है। प्लांट अफसरों का मानना है कि अगर कुछ दिन और यही हालात बने रहे तो प्रभावित जिलों में उपभोक्ताओं को रसोई गैस की भारी किल्लत झेलनी पड़ सकती है।
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श्रावण मास के दौरान पिछले पांच साल सालों से ट्रैफिक को दारागंज से लेकर वाराणसी तक वन वे कर दिया जाता है। इसके चलते हर साल सावन के महीने में गैस प्लांट के ट्रकों की आवाजाही रोक दी जाती है। पिछले साल भी गैस सिलेंडर के ट्रकों को रोके जाने से आक्रोश फैल गया था। चार से पांच दिनों तक समस्या बनी रही। गैस सिलेंडर भरे ट्रकों की निकासी नहीं हुई तो प्रभावित जिलों में हाहाकार मच गया। तब जाकर प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाला। ट्रैफिक पुलिस को ट्रकों के निकासी की जिम्मेदारी दी गई थी।
शहर में रसोई गैस लदे सिलेंडरों की नो इंट्री की वजह से बढ़ रहे बैकलॉग को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार को दो घंटे की छूट देने की बात कही। हालांकि तमाम गैस एजेंसी के संचालक इस समय को नाकाफी बता रहे हैं। संचालकों का कहना है अगर सिर्फ दो घंटे की ही छूट देनी है तो उसे दो शिफ्ट में दो-दो घंटे के लिए दी जाए। उधर तीन दिन से रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होने से जिले में इसका काफी बैकलॉग बढ़ गया है। रसोई गैस के लिए उपभोक्ता अपने एजेंसी का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनके हाथ निराशा ही आ रही है। एजेंसी संचालकों ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी इस बारे में अवगत कराया ह्रै।
इलाहाबाद में आईओसी, बीपीसी और एचपीसी की कुल 61 गैस एजेंसियां है। यहां 6.50 लाख के आसपास गैस कनेक्शन है। 20 जुलाई से शहर में नो इंट्री की वजह से झूंसी और नैनी स्थित बाटलिंग प्लांट से ट्रक नहीं निकल पा रहे हैं। रूट डायवर्जन की वजह से थोड़े बहुत ट्रक जो आ भी पा रहे हैं उससे तमाम एजेंसियां मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं कर पा रही है। इससे ग्राहकों को भी खासी दिक्कत हो रही है। शनिवार को हो हल्ला मचा तो सीओ ट्रैफिक अलका भटनागर ने साफ कह दिया कि पहले कांवड़ियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि गैस लदे वाहनों दो घंटे की छूट दी जा रही है। उधर गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि अभी कांवड़ियों की आवाजाही काफी कम है। पुलिस बेवजह वाहनों को रोक रही है। ऑल इंडिया एलपीजी फेडरेशन के सचिव केपी मिश्र का कहना है कि दो घंटे की छूट से शहर में रसोई गैस की मांग पूरी करना संभव नहीं है। यही स्थिति रही तो रसोई गैस का बैकलॉग काफी बढ़ जाएगा। पुलिस को चाहिए कि वह सुबह 11 बजे से एक बजे तक एवं अपराह्न 2.30 बजे से शाम पांच बजे तक छूट दे।
सावन के महीने में कांवड़ियों के कारण इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर हुए वन वे ट्रैफिक की आड़ में विभिन्न पीकेटों पर तैनात पुलिसकर्मी नो इंट्री की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। शास्त्री पुल से लेकर अंदावा तिराहे के बीच महज 20 रुपये में भारी वाहनों को प्रवेश दिया जा रहा है। हाल तो यह है कि नो इंट्री की आड़ में उन वाहनों से भी पैसे वसूले जा रहे हैं जिनको वन वे ट्रैफिक में प्रवेश की मनाही ही नहीं है। इससे लोगों में बेहद आक्रोश व्याप्त है।
सावन माह में प्रयाग से वाराणसी स्थित बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए हर साल भारी संख्या में कांवड़ियों सड़क मार्ग से पैदल जाते हैं। तकरीबन छह साल पहले जीटी रोड पर ट्रक की चपेट में आने से हुई कांवड़ियों की मौत और उसके बाद हुए भारी बवाल के कारण अब प्रशासन हर साल सावन में जीटी रोड के एक लेन को कांवड़ियों के लिए सुरक्षित कर देता है। शास्त्री पुल से लेकर वाराणसी तक ट्रैफिक को वन वे रखा जाता है। इस दफे भी सावन माह के शुरू होने के दूसरे दिन से ही जीटी रोड पर वन वे ट्रैफिक की व्यवस्था लागू कर दी गई। शास्त्री पुल से लेकर वाराणसी तक जीटी रोड की एक लेन कांवड़ियोें के लिए रिजर्व कर दी गई।
कांवड़ियों की सुरक्षा और ट्रैफिक के सुचारु संचालन के लिए जगह-जगह पुलिस के जवान, ट्रैफिक पुलिस और होमगार्डों की तैनाती की गई है। पर तैनात सिपाही व होमगार्ड नो इंट्री की आड़ में खुलेआम चार पहिया वाहनों से वसूली कर रहे हैं। महज बीस से 50 रुपये में ट्रक लदे बालू व ट्रैक्टर को प्रवेश करा दिया जा रहा है। पुलिसकर्मियों की करतूत से किसी भी दिन गंभीर हादसा हो सकता है। यही नहीं नो इंट्री के नाम पर उन तिपहिया वाहनों से भी वसूली की जा रही है जिनके प्रवेश पर कोई मनाही ही नहीं है। रविवार को त्रिवेणीपुरम तिराहे पर तैनात किए गए पिकेट के जवान खुलेआम तिपहिया वाहनों को रोककर वसूली करते रहे। इससे लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
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सावन मास शुरू होते ही शहर में गैस लदे ट्रकों के आने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यहां तक की बल्फ टैंकरों को भी झूंसी में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। ट्रकों को अलोपीबाग चुंगी से पहले ही रोक दिया जा रहा है। ट्रकों को वाया फाफामऊ, सहसों होकर आने दिया जा रहा है। आरोप है कि यहां पुलिस ट्रक चालकों से अवैध वसूली कर रही है। शुक्रवार को जो ट्रक खाली सिलेंडर लेकर गैस प्लांट पहुंचे उन्हें शनिवार को लोड तो कर दिया गया लेकिन निकासी नहीं हो सकी। गैस लदे ट्रक दिनभर प्लांट परिसर में खड़े रहे। साथ ही ट्रक चालकों ने प्लांट के बाहर अपनी ट्रकों को खड़ा कर भारी विरोध दर्ज कराया।
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ट्रक चालकों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्लांट के अफसरों ने बताया कि दो शिफ्ट में सिलेंडरों में रीफिलिंग की जाती है। सिलेंडरों की रीफिलिंग कर प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, जौनपुर, भदोही, एमपी, चित्रकूट तथा इलाहाबाद जनपद में सप्लाई की जाती है। ट्रक चालकों का साफ कहना है कि जब तक उन्हें प्रशासन लिखित रूप से आवाजाही का आश्वासन नहीं देता है, वे ट्रकों को लेकर नहीं जाएंगे। झूंसी प्लांट मैनेजर जेएसएस यादव ने बताया कि प्लांट में जो खाली गैस सिलेंडरों के साथ ट्रकें आई हैं। उनमें रीफिलिंग का कार्य जारी है। हालांकि वाहनों की निकासी नहीं हो रही है। प्लांट अफसरों का मानना है कि अगर कुछ दिन और यही हालात बने रहे तो प्रभावित जिलों में उपभोक्ताओं को रसोई गैस की भारी किल्लत झेलनी पड़ सकती है।
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श्रावण मास के दौरान पिछले पांच साल सालों से ट्रैफिक को दारागंज से लेकर वाराणसी तक वन वे कर दिया जाता है। इसके चलते हर साल सावन के महीने में गैस प्लांट के ट्रकों की आवाजाही रोक दी जाती है। पिछले साल भी गैस सिलेंडर के ट्रकों को रोके जाने से आक्रोश फैल गया था। चार से पांच दिनों तक समस्या बनी रही। गैस सिलेंडर भरे ट्रकों की निकासी नहीं हुई तो प्रभावित जिलों में हाहाकार मच गया। तब जाकर प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाला। ट्रैफिक पुलिस को ट्रकों के निकासी की जिम्मेदारी दी गई थी।
शहर में रसोई गैस लदे सिलेंडरों की नो इंट्री की वजह से बढ़ रहे बैकलॉग को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने शनिवार को दो घंटे की छूट देने की बात कही। हालांकि तमाम गैस एजेंसी के संचालक इस समय को नाकाफी बता रहे हैं। संचालकों का कहना है अगर सिर्फ दो घंटे की ही छूट देनी है तो उसे दो शिफ्ट में दो-दो घंटे के लिए दी जाए। उधर तीन दिन से रसोई गैस की सप्लाई प्रभावित होने से जिले में इसका काफी बैकलॉग बढ़ गया है। रसोई गैस के लिए उपभोक्ता अपने एजेंसी का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनके हाथ निराशा ही आ रही है। एजेंसी संचालकों ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी इस बारे में अवगत कराया ह्रै।
इलाहाबाद में आईओसी, बीपीसी और एचपीसी की कुल 61 गैस एजेंसियां है। यहां 6.50 लाख के आसपास गैस कनेक्शन है। 20 जुलाई से शहर में नो इंट्री की वजह से झूंसी और नैनी स्थित बाटलिंग प्लांट से ट्रक नहीं निकल पा रहे हैं। रूट डायवर्जन की वजह से थोड़े बहुत ट्रक जो आ भी पा रहे हैं उससे तमाम एजेंसियां मांग के अनुरूप सप्लाई नहीं कर पा रही है। इससे ग्राहकों को भी खासी दिक्कत हो रही है। शनिवार को हो हल्ला मचा तो सीओ ट्रैफिक अलका भटनागर ने साफ कह दिया कि पहले कांवड़ियों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा कि गैस लदे वाहनों दो घंटे की छूट दी जा रही है। उधर गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि अभी कांवड़ियों की आवाजाही काफी कम है। पुलिस बेवजह वाहनों को रोक रही है। ऑल इंडिया एलपीजी फेडरेशन के सचिव केपी मिश्र का कहना है कि दो घंटे की छूट से शहर में रसोई गैस की मांग पूरी करना संभव नहीं है। यही स्थिति रही तो रसोई गैस का बैकलॉग काफी बढ़ जाएगा। पुलिस को चाहिए कि वह सुबह 11 बजे से एक बजे तक एवं अपराह्न 2.30 बजे से शाम पांच बजे तक छूट दे।
सावन के महीने में कांवड़ियों के कारण इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर हुए वन वे ट्रैफिक की आड़ में विभिन्न पीकेटों पर तैनात पुलिसकर्मी नो इंट्री की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। शास्त्री पुल से लेकर अंदावा तिराहे के बीच महज 20 रुपये में भारी वाहनों को प्रवेश दिया जा रहा है। हाल तो यह है कि नो इंट्री की आड़ में उन वाहनों से भी पैसे वसूले जा रहे हैं जिनको वन वे ट्रैफिक में प्रवेश की मनाही ही नहीं है। इससे लोगों में बेहद आक्रोश व्याप्त है।
सावन माह में प्रयाग से वाराणसी स्थित बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए हर साल भारी संख्या में कांवड़ियों सड़क मार्ग से पैदल जाते हैं। तकरीबन छह साल पहले जीटी रोड पर ट्रक की चपेट में आने से हुई कांवड़ियों की मौत और उसके बाद हुए भारी बवाल के कारण अब प्रशासन हर साल सावन में जीटी रोड के एक लेन को कांवड़ियों के लिए सुरक्षित कर देता है। शास्त्री पुल से लेकर वाराणसी तक ट्रैफिक को वन वे रखा जाता है। इस दफे भी सावन माह के शुरू होने के दूसरे दिन से ही जीटी रोड पर वन वे ट्रैफिक की व्यवस्था लागू कर दी गई। शास्त्री पुल से लेकर वाराणसी तक जीटी रोड की एक लेन कांवड़ियोें के लिए रिजर्व कर दी गई।
कांवड़ियों की सुरक्षा और ट्रैफिक के सुचारु संचालन के लिए जगह-जगह पुलिस के जवान, ट्रैफिक पुलिस और होमगार्डों की तैनाती की गई है। पर तैनात सिपाही व होमगार्ड नो इंट्री की आड़ में खुलेआम चार पहिया वाहनों से वसूली कर रहे हैं। महज बीस से 50 रुपये में ट्रक लदे बालू व ट्रैक्टर को प्रवेश करा दिया जा रहा है। पुलिसकर्मियों की करतूत से किसी भी दिन गंभीर हादसा हो सकता है। यही नहीं नो इंट्री के नाम पर उन तिपहिया वाहनों से भी वसूली की जा रही है जिनके प्रवेश पर कोई मनाही ही नहीं है। रविवार को त्रिवेणीपुरम तिराहे पर तैनात किए गए पिकेट के जवान खुलेआम तिपहिया वाहनों को रोककर वसूली करते रहे। इससे लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।