Narendra Giri Death Case : आनंद गिरि की जेल अचानक बदली, चित्रकूट जेल में किया गया शिफ्ट
महंत नरेन्द्र गिरी के आत्महत्या के मामले में जेल में बंद उनके पुराने शिष्य आनंद गिरी का नैनी जेल से हटाकर चित्रकूट जेल भेज दिया गया है। गत दिनों उन्होंने अपनी जान का खतरा बताया था। जेल अधीक्षक पीएन पांडे का कहना है कि प्रशासनिक आधार पर जेल स्थानांतरण किया गया है।
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अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की खुदकुशी के मामले के आरोपी आनंद गिरि की जेल शुक्रवार को बदल दी गई। उन्हें चित्रकूट जेल में स्थानांतरित किया गया है। जेल प्रशासन इसे प्रशासनिक आधार पर हुई कार्रवाई बता रहा है। हालांकि कार्रवाई को तीन दिन पहले हुई घटना से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
आनंद गिरि नैनी जेल में पिछले नौ महीनों से निरुद्ध थे। शुक्रवार सुबह 7.30 बजे के करीब कड़ी सुरक्षा में उन्हें चित्रकूट जेल के लिए रवाना किया गया। उन्हें वज्र वाहन में सशस्त्र पुलिसकर्मियों के साथ रवाना किया गया। पूर्वान्ह करीब 10.30 बजे उन्हें चित्रकूट जेल में दाखिल कर दिया गया।
कार्रवाई बेहद गोपनीय रखी गई। यहां तक कि कई जेलकर्मियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई थी। जेल प्रशासन से जुड़े चुनिंदा अफसरों को ही इसकी जानकारी थी। तड़के जब सशस्त्र पुलिसकर्मी वज्र वाहन लेकर जेल गेट पर पहुंचे तो जेलकर्मी भी हैरत में पड़ गए। इसके बाद जब आनंद गिरि को उसमें बैठाया गया, तब उन्हें जानकारी हो सकी।
आनंद गिरि के जेल स्थानांतरण की कार्रवाई प्रशासनिक आधार पर की गई है। उन्हें सकुशल चित्रकूट जेल में दाखिल करा दिया गया है। - पीएन पांडेय, वरिष्ठ जेल अधीक्षक
जेल में गालीगलौज, धमकाने का लगाया था आरोप
16 अगस्त को आनंद गिरि ने जेल में खुद से गालीगलौज, मारपीट व धमकी देने का आरोप लगाया था। अपने अधिवक्ता के माध्यम से उन्होंने पत्र भेजकर प्रमुख सचिव गृह, जिला न्यायाधीश व अन्य अफसरों से शिकायत की थी।
पत्र में अधिवक्ता ने आरोप लगाया था कि मुलाकात के लिए जाने पर जेलर आरके सिंह ने उंगलियों के इशारे से आनंद गिरि को बुलाया और गालियां देते हुए जेल में ही हत्या कराने की धमकी दी। मारने के लिए भी झपटे और बीचबचाव पर उनसे अभद्रता की। जेल स्थानांतरण के मामले पर आनंद गिरि के अधिवक्ता विजय द्विवेदी का कहना है कि उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने पर यह कार्रवाई की गई है। वह इस मामले को न्यायालय के सामने रखेंगे।