अलविदा-2024 : प्रभु की तलाश में जगह-जगह खोदाई... लड़ाई अदालत तक आई
एक अगस्त 2024 को मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर दाखिल 18 सिविल वादों की सुनवाई का रास्ता साफ हो चुका है। मामले में पहला फैसला न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की अदालत ने लिखा था।
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अयोध्या तो बस झांकी है, काशी-मथुरा बाकी है... राजनीतिक गलियारों की यह गूंज इस साल अदालतों तक पहुंची। इलाहाबाद हाईकोर्ट में दर्जनों याचिकाएं दाखिल हुईं। प्रभु की तलाश में जगह-जगह खोदाई की गई। कुछ याचिकाओं पर फैसला हुआ, कुछ पर बाकी है। इन्हें बल ज्ञानवापी के पुरातत्व सर्वेक्षण की अनुमति से मिला। इसके बाद तो झड़ी लग गई। मथुरा, आगरा, जौनपुर, फतेहपुर और संभल तक के धार्मिक स्थलों पर दावे-प्रतिदावे किए गए।
केस-एक : मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद
एक अगस्त 2024 को मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर दाखिल 18 सिविल वादों की सुनवाई का रास्ता साफ हो चुका है। मामले में पहला फैसला न्यायमूर्ति मयंक कुमार जैन की अदालत ने लिखा था। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद, अब वाद बिंदु तय करने से लेकर आगे की सुनवाई न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की अदालत करेगी।
केस-दो : आगरा की जामा मस्जिद के एएसआई सर्वे की मांग
मथुरा के अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने आगरा स्थित जामा मस्जिद के एएसआई सर्वे और एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की मांग को लेकर याचिका दाखिल की। दावा है कि औरंगजेब ने 1670 में केशव देव मंदिर को तोड़कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विग्रह को जामा मस्जिद की सीढ़ियों में दफना दिया था।
केस-तीन : जौनपुर की अटाला मस्जिद का विवाद
स्वराज वाहिनी एसोसिएशन की ओर से जौनपुर की अदालत में अटाला मस्जिद को अटाला देवी का मंदिर बताने के खिलाफ मुस्लिम पक्ष हाईकोर्ट पहुंचा है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने जवाब मांगा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मंदिर का निर्माण 13वीं शताब्दी में राजा विजय चंद्र ने कराया था। फिरोज तुगलक ने यहां मस्जिद बना दी। जबकि, मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि 1398 ईस्वी में मस्जिद के निर्माण के बाद से ही यहां नमाज अदा की जा रही है। लिहाजा, सिविल वाद पोषणीय नहीं है।
केस-चार : ज्ञानवापी काशी के वजूखाने के सर्वेक्षण की मांग
शृंगार गौरी मामले की मुख्य वादी राखी सिंह ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर ज्ञानवापी के वजूखाने का भी वैज्ञानिक सर्वेक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से कराने की मांग की है। मुस्लिम पक्षकारों का कहना है कि मई 2022 से कथित शिवलिंग मिलने के बाद वजूखाना सील है। इसका सर्वेक्षण नहीं होना चाहिए, क्योंकि प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है।
केस-पांच : विवादों में संभल की शाही जामा मस्जिद
संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान भड़की हिंसा की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर दो जनहित याचिकाएं हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जिला अदालत से कहा है कि वह हाईकोर्ट में सुनवाई होने तक कोई फैसला न सुनाए। मस्जिद कमेटी से हाईकोर्ट जाने को कहा है। हिंदू पक्षकारों के मुताबिक, बाबर ने श्री हरिहर मंदिर को ध्वस्त कर 1526 में मस्जिद का निर्माण कराया था।
केस-छह : फतेहपुर में चला बुलडोजर, आगरा में रोक
फतेहपुर में करीब 180 साल पुरानी नूरी जामा मस्जिद के अवैध निर्माण को जिला प्रशासन ध्वस्त करा चुका है। यह मामला भी हाईकोर्ट पहुंचा है। वहीं, हाईकोर्ट ने आगरा के ऐतिहासिक शाही हमाम के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाते हुए सरकार से विस्तृत जानकारी तलब की है। पुलिस आयुक्त व एएसआई को हिदायत दी है कि 27 जनवरी तक स्मारक को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए।