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Allahabad University : गीता और रामायण से प्रबंधन सीखेंगे छात्र, पांच वर्षीय बीबीए-एमबीए इंटीग्रेटेड कोर्स शुरू

Thu, 09 Nov 2023 05:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 09 Nov 2023 05:10 PM IST
सार

विभागाध्यक्ष प्रो.आरएस सिंह बताते हैं कि प्राचीन काल में हुए बड़े युद्ध, उस समय की इंजीनियरिंग बिना प्रबंधन के सफल नहीं हो सकती। श्रीराम और श्रीकृष्ण के मूलमंत्र प्रबंधन के प्रति उनकी उच्च कोटि की सोच को दर्शाते हैं।

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Allahabad University: Students will learn management from Geeta and Ramayana
इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रशासन विभाग में छात्रों को उपनिषद, गीता और रामायण के माध्यम से प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी। विश्वविद्यालय में सत्र 2023-24 से शुरू किए गए पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड कोर्स बीबीए व एमबीए में 26 छात्रों ने प्रवेश लिए हैं, जिन्हें पांचवें एवं छठे सेमेस्टर में यह पढ़ाया जाएगा कि गीता और रामायण की घटनाएं प्रबंधन दृष्टि से आज भी प्रासंगिक हैं और आगे भी रहेंगी।

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इविवि में सत्र 2023-24 से शुरू हुए इंटीग्रेटेड कोर्स बीबीए व एमबीए में 46 सीटें हैं, जिनके मुकाबले 26 छात्रों ने प्रवेश लिए हैं। 17 अक्तूबर से इस पाठ्यक्रम की कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं। विवि ने अपना अलग से पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसमें उपनिषद, गीता, रामायण जैसे प्राचीन ग्रंथों के प्रमुख सार भी शामिल किए गए हैं। मसलन, महाभारत का युद्ध, लक्षागृह, रामसेतु आदि।
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विभागाध्यक्ष प्रो.आरएस सिंह बताते हैं कि प्राचीन काल में हुए बड़े युद्ध, उस समय की इंजीनियरिंग बिना प्रबंधन के सफल नहीं हो सकती। श्रीराम और श्रीकृष्ण के मूलमंत्र प्रबंधन के प्रति उनकी उच्च कोटि की सोच को दर्शाते हैं। मैनेजमेंट के प्रति उनकी जो सोच थी, वह आज भी प्रासंगिक है। अगर अपने आप को सर्वश्रेष्ठ साबित करना है और कॉरपोरेट सेक्टर में आगे बढ़ना है तो इस प्रासंगिकता को समझना होगा।

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सिर्फ प्राचीन ग्रंथ ही नहीं, पाठ्यक्रम में धीरूभाई अंबानी, अजीम प्रेमजी और टाटा जैसे सफल लोगों के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। विभागाध्यक्ष ने बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत इस पाठ्यक्रम का संचालन मल्टीपल एंट्री और मल्टीपल एग्जिट के तहत किया जाएगा। बीबीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद अगर कोई छात्र बीच में इसे छोड़ना चाहता है तो उसे मैनजमेंट का प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

इसी तरह दूसरे वर्ष में कोर्स छोड़ने पर डिप्लोमा दिया जाएगा और तीन वर्ष का कोर्स पूरा करने के बाद बीबीए की डिग्री की दी जाएगी। इसके बाद सीधे पांच वर्ष पर एग्जिट प्वाइंट होगा और छात्र एमबीए को कोर्स पूरा करेंगे। विभागाध्यक्ष ने बताया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) का परिणाम देर से जारी होने के कारण सत्र विलंब से शुरू हुआ है। फरवरी-2024 में पहले सेमेस्टर की परीक्षा कराने के प्रयास हैं।

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