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आत्मदाह की धमकी देने पर इलाहाबाद विवि कर्मचारी नेता कारण बताओ नोटिस
Sat, 28 Nov 2020 12:43 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 28 Nov 2020 12:43 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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कर्मचारियों के मुद्दे पर इविवि में धरना-प्रदर्शन करने और आत्मदाह की धमकी देने के मामले में इविवि प्रशासन ने कर्मचारी नेता ओम प्रकाश गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। साथ ही उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई के लिए एसएसपी को पत्र भी लिखा है।
इविवि मिनिस्टीरियल एंड टेक्निकल स्टाफ यूनियन के पूर्व महामंत्री ओम प्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में कर्मचारियों ने चार नवंबर को कुलपति कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया था। हालांकि, इससे एक दिन पहले ही कर्मचारियों के मामले में यूनियन के पदाधिकारियों और कुलपति के बीच वार्ता हो चुकी थी। कर्मचारियों की मांग थी कि वर्ष 2015 से अब तक आकस्मिक मृत्यु होने के उपरांत उनके पाल्यों, आश्रितों को अनुकंपा पर नियुक्ति दी जाए।
रिक्त पदों पर कर्मचारियों को प्रोन्नत किया जाए। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अंतिम कार्यदिवस पर जीपीएफ एवं अन्य देयकों का भुगतान किया जाए। कर्मचारी इस बात से भी नाराज है कि उनसे वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में दिए गए बोनस की वसूली कर दी गई, जबकि ऑडिट आपत्ति के बावजूद उच्च पदों पर बैठे लोगों से वसूली नहीं हुई।
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इन्हीं मुद्दों को लेकर चार नवंबर को हुए धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ओम प्रकाश गुप्ता को रजिस्ट्रार की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए चार दिसंबर तक जवाब मांगा है। रजिस्ट्रार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि ओम प्रकाश गुप्ता ने धरना-प्रदर्शन के दौरान कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन नहीं किया। कुलपति एवं अन्य कार्यालयों के कामकाज में बाधा उत्पन्न की।
17 नवंबर को पुन: उन्हीं मांगों का उल्लेख करते हुए कुलपति को पत्र भेजकर आत्मदाह करने की धमकी दी। साथ ही इस नियम को भी तोड़ा कि शिकायत किससे और किस अवधि में करनी है। निस्तारण अवधि समाप्त होने से पहले ही प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति को पत्र भेजकर शिकायत कर दी। इस मामले में ओम प्रकाश गुप्ता का कहना है कि प्रशासन ने जितनी मेहनत नोटिस देने में की। अगर उतना परिश्रम कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने में होता तो कर्मचारी आत्मदाह की चेतावनी देने के लिए मजबूर न होता।
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इविवि मिनिस्टीरियल एंड टेक्निकल स्टाफ यूनियन के पूर्व महामंत्री ओम प्रकाश गुप्ता के नेतृत्व में कर्मचारियों ने चार नवंबर को कुलपति कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया था। हालांकि, इससे एक दिन पहले ही कर्मचारियों के मामले में यूनियन के पदाधिकारियों और कुलपति के बीच वार्ता हो चुकी थी। कर्मचारियों की मांग थी कि वर्ष 2015 से अब तक आकस्मिक मृत्यु होने के उपरांत उनके पाल्यों, आश्रितों को अनुकंपा पर नियुक्ति दी जाए।
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रिक्त पदों पर कर्मचारियों को प्रोन्नत किया जाए। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अंतिम कार्यदिवस पर जीपीएफ एवं अन्य देयकों का भुगतान किया जाए। कर्मचारी इस बात से भी नाराज है कि उनसे वर्ष 2016-17 एवं 2017-18 में दिए गए बोनस की वसूली कर दी गई, जबकि ऑडिट आपत्ति के बावजूद उच्च पदों पर बैठे लोगों से वसूली नहीं हुई।
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इन्हीं मुद्दों को लेकर चार नवंबर को हुए धरना-प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ओम प्रकाश गुप्ता को रजिस्ट्रार की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए चार दिसंबर तक जवाब मांगा है। रजिस्ट्रार की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि ओम प्रकाश गुप्ता ने धरना-प्रदर्शन के दौरान कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन नहीं किया। कुलपति एवं अन्य कार्यालयों के कामकाज में बाधा उत्पन्न की।
17 नवंबर को पुन: उन्हीं मांगों का उल्लेख करते हुए कुलपति को पत्र भेजकर आत्मदाह करने की धमकी दी। साथ ही इस नियम को भी तोड़ा कि शिकायत किससे और किस अवधि में करनी है। निस्तारण अवधि समाप्त होने से पहले ही प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति को पत्र भेजकर शिकायत कर दी। इस मामले में ओम प्रकाश गुप्ता का कहना है कि प्रशासन ने जितनी मेहनत नोटिस देने में की। अगर उतना परिश्रम कर्मचारियों की मांगों को पूरा करने में होता तो कर्मचारी आत्मदाह की चेतावनी देने के लिए मजबूर न होता।