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नहीं रहे इलाहाबाद विवि के रिटायर्ड शिक्षक और प्रख्यात इतिहासकार प्रो. विद्याधर मिश्र
Tue, 22 Sep 2020 11:31 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 22 Sep 2020 11:31 AM IST
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prayagraj news : प्रो. विद्याधर मिश्र (फाइल फोटो)।
- फोटो : prayagraj
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के पूर्व शिक्षक और इतिहास जगत के विश्व प्रसिद्ध हस्ताक्षर प्रो. विद्याधर मिश्र नहीं रहे। सोमवार को उन्होंने बेली स्थित अपने आवास में अंतिम सांस ली। वह 80 वर्ष के थे और कई दिनों से बीमार चल रहे थे। तीन जुलाई 1941 को जन्मे प्रो. मिश्र ने भारतीय पुरातत्व के मध्य पाषाण काल को वैश्विक पटल पर लाकर पुराविदों और इतिहास के जिज्ञासुओं में एक नई दृष्टि विकसित की।
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इविवि के प्राचीन इतिहास विभाग से वह वर्ष 2000 में सेवानिवृत्त हो गए थे, लेकिन इसके बाद भी सक्रिय रहे। काफी समय तक वह इलाहाबाद संग्रहालय से जुड़े रहे। इविवि के प्राचीन इतिहास के विभागाध्यक्ष होने के साथ उन्होंने जीएन झा हॉस्टल के अधीक्षक, प्रवेश परीक्षा के निदेशक, परीक्षा नियंत्रक, कार्यपरिषद के सदस्य जैसी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया।
उन्होंने कई पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन एवं सर्वेक्षण का निर्देशन दिया। उनके द्वारा उत्खनित दमदमा, महदहा एवं सराय नाह राय उल्लेखनीय हैं, जहां से मिले अवशेषों ने भारतीय मध्यपाषण को मजबूत आधार स्तंभ प्रदान किया। उनके निधन से इविवि के शिक्षकों में शोक है। ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी, महासचिव प्रो. शिव मोहन प्रसाद, प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. हर्ष कुमार, अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. मनमोहन कृष्ण ने प्रो. विद्याधर मिश्र के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
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उन्होंने कई पुरातात्विक स्थलों के उत्खनन एवं सर्वेक्षण का निर्देशन दिया। उनके द्वारा उत्खनित दमदमा, महदहा एवं सराय नाह राय उल्लेखनीय हैं, जहां से मिले अवशेषों ने भारतीय मध्यपाषण को मजबूत आधार स्तंभ प्रदान किया। उनके निधन से इविवि के शिक्षकों में शोक है। ऑटा अध्यक्ष प्रो. रामसेवक दुबे, वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. एआर सिद्दीकी, महासचिव प्रो. शिव मोहन प्रसाद, प्राचीन इतिहास विभाग के प्रो. हर्ष कुमार, अर्थशास्त्र विभाग के प्रो. मनमोहन कृष्ण ने प्रो. विद्याधर मिश्र के निधन पर दुख व्यक्त किया है।
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