Mahakumbh : पर्यटकों व श्रद्धालुओं के भ्रमण के लिए खोला गया इलाहाबाद विवि, 1910 में बना था सीनेट हाॅल
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कला संकाय में स्थित सीनेट हाल 1910 में बनाना शुरू हुआ था और 1915 में यह पूरा हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष रहे प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी बताते हैं कि उस वक्त इसे बनाने में 1167 275 रुपए खर्च हुए थे।
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महाकुंभ-2025 में प्रयागराज आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों के लिए ज्ञान की गंगा के दर्शनार्थ भारत के चौथे प्राचीन विश्वविद्यालय (इलाहाबाद विश्वविद्यालय) के सीनेट परिसर और विजयनगरम् परिसर को भ्रमण के लिए 14 व।15 जनवरी को दो दिनों के लिए खोला गया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय की जनसंपर्क अधिकारी प्रोफेसर जया कपूर ने बताया कि पर्यटक एवं श्रद्धालु दोपहर 2.00 बजे से सायं 5.00 बजे तक दोनों परिसरों का भ्रमण कर सकते हैं।
जानें क्या है खास में इमारत में
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कला संकाय में स्थित सीनेट हाल 1910 में बनाना शुरू हुआ था और 1915 में यह पूरा हुआ। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के अध्यक्ष रहे प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी बताते हैं कि उस वक्त इसे बनाने में 1167 275 रुपए खर्च हुए थे। सर स्विंटन जैकब ने इसकी डिजाइन तैयार की थी। जिन्होंने राजस्थान में तमाम बड़ी इमारतों का निर्माण कराया था।
उस वक्त चांसलर रहे सर जॉन हीवेट ने इसकी आधारशिला रखी थी। सर स्विंटन ने राजपूत और मुगल शैली में इसकी डिजाइन तैयार की थी। इसमें एक घड़ी भी लगी है जिसकी प्रेरणा लंदन की बिग बेन घड़ी से ली गई थी और इस घड़ी को इलाहाबाद में तैयार कराया गया था।
अनोखे हैं विजयनगरम हाल के गुंबद और मीनार
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय स्थित विजयनगरम हॉल का निर्माण 8 अप्रैल 1886 में पूरा हुआ था। उस वक्त इसे बनाने वाले आर्किटेक्चर विलियम इमरसन ने कहा था कि उत्तर भारत में ताजमहल के बाद अगर कोई दूसरी सबसे सुंदर और अनोखी इमारत है तो वह विजय नगराम हाल है। इसके गुंबद, मीनार और यह पूरा हाल बहुत ही खूबसूरत ढंग से तैयार किया गया है।