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परीक्षा कराने की जगह छात्रों को प्रमोट करे इविवि
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Allahabad university examination 2020
-मंत्रालय और विश्वविद्यालय प्रशासन से की गई मांग
-जन सारथी संगठन ने की न्यायालय जाने की तैयारी
प्रयागराज। तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए इविवि प्रशासन सितंबर में परीक्षा कराए जाने का निर्णय वापस ले और इसकी जगह अंतिम वर्ष एवं अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को पिछली परीक्षाओं में मिले अंकों के औसत के आधार पर प्रमोट करे। यह मांग जन सारथी संगठन की है। संगठन के संस्थापक रोहित सिंह का कहना है कि इविवि प्रशासन छात्रों की बात नहीं सुनता है तो संगठन न्यायालय की शरण में जाएगा। वहीं, दिशा छात्र संगठन ने भी परीक्षा कराए जाने का निर्णय वापस लेने की मांग की है।
जन सारथी संगठन के बैनर तले सैकड़ों छात्रों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और इविवि के कुलपति को पत्र लिखकर अपील की है कि अगर पिछली परीक्षाओं में मिले औसत में मिले अंकों के आधार प्रमोशन और मार्किंग से छात्र असंतुष्ट होते हैं तो परिस्थितियां सामान्य होने के बाद उन्हें एक मौका दिया जाए। महामारी पूरी तरह से खत्म होने पर विश्वविद्यालय को बंद रखा जाए। अगर परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है तो सभी छात्रों एवं कर्मचारियों कोरोना जांच के बाद ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया जाए। अन्य जगहों से आए छात्रों के परीक्षा तक रुकने और उनके खानपान की व्यवस्था की जाए।
महामारी के बीच छात्रों की मानसिक हालत पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है। संकट के इस दौर में छात्रों के लिए परीक्षा में योगदान देना कठिन होगा। उधर, दिशा छात्र संगठन ने भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा स्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा कराए जाने के निर्णय की आलोचना की है। संगठन के अमित ने कहा कि कोरोना महामारी का संकट हर दिन और गंभीर होता जा रहा है। कोरोना के सामुदायिक प्रसार होने की बात स्वीकार की जा चुकी है। सितंबर के महीने में कोरोना महामारी पीक पर होगी। ऐसे में इविवि प्रशासन को सितंबर में परीक्षा कराने का निर्णय वापस लेना चाहिए।
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-जन सारथी संगठन ने की न्यायालय जाने की तैयारी
प्रयागराज। तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए इविवि प्रशासन सितंबर में परीक्षा कराए जाने का निर्णय वापस ले और इसकी जगह अंतिम वर्ष एवं अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को पिछली परीक्षाओं में मिले अंकों के औसत के आधार पर प्रमोट करे। यह मांग जन सारथी संगठन की है। संगठन के संस्थापक रोहित सिंह का कहना है कि इविवि प्रशासन छात्रों की बात नहीं सुनता है तो संगठन न्यायालय की शरण में जाएगा। वहीं, दिशा छात्र संगठन ने भी परीक्षा कराए जाने का निर्णय वापस लेने की मांग की है।
जन सारथी संगठन के बैनर तले सैकड़ों छात्रों ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और इविवि के कुलपति को पत्र लिखकर अपील की है कि अगर पिछली परीक्षाओं में मिले औसत में मिले अंकों के आधार प्रमोशन और मार्किंग से छात्र असंतुष्ट होते हैं तो परिस्थितियां सामान्य होने के बाद उन्हें एक मौका दिया जाए। महामारी पूरी तरह से खत्म होने पर विश्वविद्यालय को बंद रखा जाए। अगर परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है तो सभी छात्रों एवं कर्मचारियों कोरोना जांच के बाद ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश दिया जाए। अन्य जगहों से आए छात्रों के परीक्षा तक रुकने और उनके खानपान की व्यवस्था की जाए।
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महामारी के बीच छात्रों की मानसिक हालत पर भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है। संकट के इस दौर में छात्रों के लिए परीक्षा में योगदान देना कठिन होगा। उधर, दिशा छात्र संगठन ने भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा स्नातक अंतिम वर्ष के छात्रों की परीक्षा कराए जाने के निर्णय की आलोचना की है। संगठन के अमित ने कहा कि कोरोना महामारी का संकट हर दिन और गंभीर होता जा रहा है। कोरोना के सामुदायिक प्रसार होने की बात स्वीकार की जा चुकी है। सितंबर के महीने में कोरोना महामारी पीक पर होगी। ऐसे में इविवि प्रशासन को सितंबर में परीक्षा कराने का निर्णय वापस लेना चाहिए।
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