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व्हाट्सएप के दौर में पुस्तक संस्कृति के लिए बढ़ी चुनौती
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Allahabad University
- फोटो : CITY DESK
व्हाट्सएप के दौर में पुस्तक संस्कृति के लिए बढ़ी चुनौती
इविवि में कार्यशाला के उद्घाटन के पर बोले प्रो. सदानंद साही
प्रयागराज, 24 सितंबर। व्हाट्सएप संस्कृति के दौर में पुस्तक संस्कृति के लिए चुनौती बढ़ी है। भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी अंतरप्रांतीय संपर्क की भाषा बन गई है और अनुवाद हिंदी को सशक्त बनाता है। यह बात प्रख्यात लेख प्रो. सदानंद साही ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में ‘बाल साहित्य के अनुवाद’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन पर कही।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, इविवि राजभाषा अनुभाग एवं सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज की ओर से आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि हिंदी के स्थापित लेखक बाल साहित्य भी लिखें, क्योंकि बच्चों के बीच साहित्य और भाषा को ले जाना जरूरी है। मुख्य अतिथि रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने इस आयोजन को अनूठा बताया। कार्यशाला के संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि मनोरंजन पुस्तकें बच्चों को तनावमुक्त बनाती हैं। डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि नए मीडिया के इस दौर में नई पीढ़ी को अपनी भाषा से जोड़ने की जरूरत है। अतिथियों का स्वागत हरिओम कुमार ने किया। इस मौक ेपर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के विजय कुमार, प्रवीन कुमार समेत डॉ. मीना कुमारी, डॉ. जनार्दन, डॉ. रमाशंकर सिंह, डॉ. दीनानाथ मौर्य, डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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इविवि में कार्यशाला के उद्घाटन के पर बोले प्रो. सदानंद साही
प्रयागराज, 24 सितंबर। व्हाट्सएप संस्कृति के दौर में पुस्तक संस्कृति के लिए चुनौती बढ़ी है। भारत जैसे बहुभाषी देश में हिंदी अंतरप्रांतीय संपर्क की भाषा बन गई है और अनुवाद हिंदी को सशक्त बनाता है। यह बात प्रख्यात लेख प्रो. सदानंद साही ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में ‘बाल साहित्य के अनुवाद’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन पर कही।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, इविवि राजभाषा अनुभाग एवं सेंटर ऑफ मीडिया स्टडीज की ओर से आयोजित कार्यशाला में उन्होंने कहा कि हिंदी के स्थापित लेखक बाल साहित्य भी लिखें, क्योंकि बच्चों के बीच साहित्य और भाषा को ले जाना जरूरी है। मुख्य अतिथि रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने इस आयोजन को अनूठा बताया। कार्यशाला के संयोजक प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि मनोरंजन पुस्तकें बच्चों को तनावमुक्त बनाती हैं। डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि नए मीडिया के इस दौर में नई पीढ़ी को अपनी भाषा से जोड़ने की जरूरत है। अतिथियों का स्वागत हरिओम कुमार ने किया। इस मौक ेपर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के विजय कुमार, प्रवीन कुमार समेत डॉ. मीना कुमारी, डॉ. जनार्दन, डॉ. रमाशंकर सिंह, डॉ. दीनानाथ मौर्य, डॉ. शैलेंद्र प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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