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इलाहाबाद को फिर से प्रयागराज कहिए
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 17 Oct 2018 12:28 AM IST
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने अपने धार्मिक और सांस्कृतिक एजेंडे पर आगे बढ़ते हुए मंगलवार को इलाहाबाद जिले का नाम बदलकर प्रयागराज किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कैबिनेट ने इलाहाबाद नाम से चल रहे केंद्र के विभिन्न इंस्टीट्यूट, संस्थाओं के नाम भी प्रयागराज किए जाने के लिए संबंधित संस्थानों को पत्र लिखने का फैसला किया है। इससे इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय सहित तमाम संस्थानों के नाम प्रयागराज हो जाएंगे। दूसरी ओर, नाम बदले जाने का तमाम संगठनों ने समर्थन किया है तो कई विरोध भी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने पिछले शनिवार को ही इलाहाबाद में राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता वाली कुंभ मार्गदर्शक मंडल की बैठक में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने का एलान किया था। इसके बाद कैबिनेट बैठक पर सबकी नजर थे। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि बताया कि लंबे अर्से से संतों-महात्माओं, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं की ओर से इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने की मांग हो रही थी। उन्हाेंने भी राज्यपाल को पत्र लिखा था।
सिंह ने बताया कि कैबिनेट के फैसले पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इलाहाबाद की पौराणिक पहचान के दृष्टिगत कुंभ मेला-2019 के पहले यह फैसला किया गया है। देश में वैसे तो अलग-अलग स्थानों पर 14 प्रयाग हैं लेकिन, इस प्रयाग की महत्ता सर्वाधिक होने की वजह से इसे प्रयागराज नाम दिया गया है। नाम परिवर्तन से राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सिंह के मुताबिक, इलाहाबाद नाम से स्थापित केंद्रीय इंस्टीट्यूट व संस्थानों में इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय आदि का नाम बदलने के लिए संबंधित संस्थानों को पत्र लिखा जाएगा। नाम बदलने पर विपक्ष द्वारा सवाल उठाए जाने पर सिंह ने कहा कि इसका कोई औचित्य नहीं है। कहा कि, 500 साल पहले भी इलाहाबाद का नाम प्रयाग ही था। वहीं, सरकार की घोषणा के साथ कई संगठन नाम बदलने का विरोध भी कर रहे हैं।
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बता दें कि मुख्यमंत्री की इस घोषणा से पहले ही जिला प्रशासन नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर चुका था। शासन ने इस संबंध में राजस्व विभाग से 10 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। इसमें प्रयागराज नाम से जुड़े ऐतिहासिक एवं धार्मिक दस्तावेज, मान्यताएं संबंधी बिंदुओं पर जानकारी शामिल थी। इसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई, जिसमें प्रशासन ने भी इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने की संस्तुति की थी।
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मुख्यमंत्री योगी ने पिछले शनिवार को ही इलाहाबाद में राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता वाली कुंभ मार्गदर्शक मंडल की बैठक में इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने का एलान किया था। इसके बाद कैबिनेट बैठक पर सबकी नजर थे। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता व स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि बताया कि लंबे अर्से से संतों-महात्माओं, सामाजिक संगठनों और श्रद्धालुओं की ओर से इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने की मांग हो रही थी। उन्हाेंने भी राज्यपाल को पत्र लिखा था।
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सिंह ने बताया कि कैबिनेट के फैसले पर प्रसन्नता जताते हुए कहा कि इलाहाबाद की पौराणिक पहचान के दृष्टिगत कुंभ मेला-2019 के पहले यह फैसला किया गया है। देश में वैसे तो अलग-अलग स्थानों पर 14 प्रयाग हैं लेकिन, इस प्रयाग की महत्ता सर्वाधिक होने की वजह से इसे प्रयागराज नाम दिया गया है। नाम परिवर्तन से राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सिंह के मुताबिक, इलाहाबाद नाम से स्थापित केंद्रीय इंस्टीट्यूट व संस्थानों में इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय आदि का नाम बदलने के लिए संबंधित संस्थानों को पत्र लिखा जाएगा। नाम बदलने पर विपक्ष द्वारा सवाल उठाए जाने पर सिंह ने कहा कि इसका कोई औचित्य नहीं है। कहा कि, 500 साल पहले भी इलाहाबाद का नाम प्रयाग ही था। वहीं, सरकार की घोषणा के साथ कई संगठन नाम बदलने का विरोध भी कर रहे हैं।
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बता दें कि मुख्यमंत्री की इस घोषणा से पहले ही जिला प्रशासन नाम बदलने की प्रक्रिया शुरू कर चुका था। शासन ने इस संबंध में राजस्व विभाग से 10 बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी थी। इसमें प्रयागराज नाम से जुड़े ऐतिहासिक एवं धार्मिक दस्तावेज, मान्यताएं संबंधी बिंदुओं पर जानकारी शामिल थी। इसके बाद शासन को रिपोर्ट भेजी गई, जिसमें प्रशासन ने भी इलाहाबाद का नाम प्रयागराज किए जाने की संस्तुति की थी।