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तिरुपति पहुंची पुलिस की टीम, गिरोह की तलाश में छापेमारी
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allahabad police reaches tirupati
सिविल लाइंस में कैशवैन से डेढ़ करोड़ की चोरी करने वाले गिरोह तक पुलिस पांचवें दिन भी नहीं पहुंच सकी। घटना का सीसीटीवी फुटेज लेकर खुलासे में लगीं पुलिस टीमें अलग-अलग शहरों की खाक छान रही हैं लेकिन, अब तक उन्हें कोई सफलता नहीं मिल सकी है। फिलहाल आंध्र प्रदेश के गिरोह पर ही शक जताया जा रहा है। जंक्शन के सिविल लाइंस साइड में तीन सितंबर को हुई घटना के बाद जिले भर में सनसनी फैल गई थी।
सीसीटीवी फुटेज के सहारे बदमाशों की तलाश में जुटी टीमों को अब तक बदमाशों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। खुलासे में लगीं 12 टीमों को अलग-अलग शहरों में भेजा गया है। टीमें आंध्र प्रदेश के तिरुपति से लेकर अन्य कई जगहों की खाक छान चुकी हैं लेकिन अब तक घटना में शामिल बदमाशों को पकड़ा नहीं जा सका है। जिला पुलिस ने इस संबंध में आंध्र पुलिस के अलावा वाराणसी पुलिस से भी संपर्क साधा है। दरअसल, वाराणसी में पिछले साल हुई दो घटनाएं ठीक जंक्शन वाली घटना की तरह से अंजाम दी गईं। जिसमें बाद में गिरोह के कुछ लोग गिरफ्तार भी हुए थे। ऐसे में वाराणसी पहुंचकर भी टीम ने चोर गिरोह के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई। सूत्रों कहना है कि खुलासे में लगी टीमें खोजबीन में जुटी हैं। चोर गिरोह के लोग पहले भी इस तरह की वारदातें अंजाम दे चुके हैं, ऐसे में उन्होंने छिपने के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ा होगा।
मददगार मिले तो बन सकती है बात
पुलिस अफसरों का कहना है कि एक बात तो साफ है कि इतनी बड़ी वारदात में गिरोह के सदस्यों का कोई स्थानीय मददगार जरूर रहा होगा। इसलिए क्योंकि बिना इसके शहर से पूरी तरह वाकिफ हो पाना संभव नहीं है। चूंकि बदमाश नगदी भरा बक्सा उड़ाने के बाद बेहद ही कम समय में फाफामऊ तक पहुंचे, ऐसे में इस बात की संभावना और बढ़ जाती है। हो सकता है कि फाफामऊ में उनका कोई मददगार रहा हो जिसने रकम को ठिकाने लगाने और गिरोह के सदस्यों को भागने में भी मदद की हो। ऐसे में उस मददगार को भी ढूढ़ने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
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सीसीटीवी फुटेज के सहारे बदमाशों की तलाश में जुटी टीमों को अब तक बदमाशों का कोई सुराग नहीं मिल सका है। खुलासे में लगीं 12 टीमों को अलग-अलग शहरों में भेजा गया है। टीमें आंध्र प्रदेश के तिरुपति से लेकर अन्य कई जगहों की खाक छान चुकी हैं लेकिन अब तक घटना में शामिल बदमाशों को पकड़ा नहीं जा सका है। जिला पुलिस ने इस संबंध में आंध्र पुलिस के अलावा वाराणसी पुलिस से भी संपर्क साधा है। दरअसल, वाराणसी में पिछले साल हुई दो घटनाएं ठीक जंक्शन वाली घटना की तरह से अंजाम दी गईं। जिसमें बाद में गिरोह के कुछ लोग गिरफ्तार भी हुए थे। ऐसे में वाराणसी पहुंचकर भी टीम ने चोर गिरोह के सदस्यों के बारे में जानकारी जुटाई। सूत्रों कहना है कि खुलासे में लगी टीमें खोजबीन में जुटी हैं। चोर गिरोह के लोग पहले भी इस तरह की वारदातें अंजाम दे चुके हैं, ऐसे में उन्होंने छिपने के लिए कोई सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ा होगा।
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मददगार मिले तो बन सकती है बात
पुलिस अफसरों का कहना है कि एक बात तो साफ है कि इतनी बड़ी वारदात में गिरोह के सदस्यों का कोई स्थानीय मददगार जरूर रहा होगा। इसलिए क्योंकि बिना इसके शहर से पूरी तरह वाकिफ हो पाना संभव नहीं है। चूंकि बदमाश नगदी भरा बक्सा उड़ाने के बाद बेहद ही कम समय में फाफामऊ तक पहुंचे, ऐसे में इस बात की संभावना और बढ़ जाती है। हो सकता है कि फाफामऊ में उनका कोई मददगार रहा हो जिसने रकम को ठिकाने लगाने और गिरोह के सदस्यों को भागने में भी मदद की हो। ऐसे में उस मददगार को भी ढूढ़ने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।
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