{"_id":"5b0d738f5c3f9806e0ff220bff631fce","slug":"allahabad-news-hindi-news-653","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों से दबाव कहीं न पड़ जाए भारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों से दबाव कहीं न पड़ जाए भारी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 15 Jan 2016 12:15 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एग्जाम टाइम शुरू हो गया है, ऐसे में आप भी चाह रहे होंगे कि आपका बच्चा मन लगाकर पढ़ाई करे और सबसे अच्छे नंबर लाए। बच्चे जी जान से पढ़ाई करें, इसके लिए यह जरूरी नहीं है कि आप उनका टीवी देखना, दोस्तों से मिलना और खेलना कूदना बंद कर दें। आपकी जरूरत से ज्यादा सख्ती बच्चों पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है। जिससे उनकी कार्य क्षमता प्रभावित होगी। मतलब आपका बच्चा जितना बेहतर कर सकता है आपके दबाव में आकर वह उतना भी नहीं कर पाएगा।
काउंसलर सौम्या दीक्षित का कहना है कि अभिभावकों में अपने बच्चों को बेस्ट देखने की उम्मीद होती है। बच्चे के प्रदर्शन को वो अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़ लेते हैं। इसकी वजह से वह बच्चों पर तमाम तरह की बंदिशें एग्जाम टाइम में लगा देते हैं। हर वक्त यही चाहते हैं कि बच्चे किताबें लेकर बैठे रहें, जबकि यह बिल्कुल गलत है। अभिभावक बच्चों को एग्जाम का हौव्वा न बनाएं, बल्कि बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और उनके अंदर विश्वास जगाएं।
मनोवैज्ञानिक मालविका राव का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों को मन:स्थिति को समझना चाहिए। उन पर अतिरिक्त दबाव बनाकर उन्हें बेवजह परेशान करना गलत है। इससे पढ़ाई से उनका मन उचट जाएगा। पढ़ाई के साथ मनोरंजन भी जरूरी है। बच्चों को थोड़ा समय मूड फ्रेश करने के लिए दें। बच्चों की परेशानियों को समझे। बच्चों को अभिभावकों का प्यार और सहयोग चाहिए डांट और फटकार नहीं।
विज्ञापन
इन बातों पर दें ध्यान
- पढ़ाई के साथ बच्चों को मूड फ्रेश करने समय दें।
- बच्चों से प्यार से बात करें और अपना सहयोग दें।
- बच्चों के खाने पीने का ध्यान रखें।
- हर बच्चे की बौद्धिक क्षमता भिन्न होती, इसे समझें।
विज्ञापन
काउंसलर सौम्या दीक्षित का कहना है कि अभिभावकों में अपने बच्चों को बेस्ट देखने की उम्मीद होती है। बच्चे के प्रदर्शन को वो अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जोड़ लेते हैं। इसकी वजह से वह बच्चों पर तमाम तरह की बंदिशें एग्जाम टाइम में लगा देते हैं। हर वक्त यही चाहते हैं कि बच्चे किताबें लेकर बैठे रहें, जबकि यह बिल्कुल गलत है। अभिभावक बच्चों को एग्जाम का हौव्वा न बनाएं, बल्कि बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं और उनके अंदर विश्वास जगाएं।
विज्ञापन
मनोवैज्ञानिक मालविका राव का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों को मन:स्थिति को समझना चाहिए। उन पर अतिरिक्त दबाव बनाकर उन्हें बेवजह परेशान करना गलत है। इससे पढ़ाई से उनका मन उचट जाएगा। पढ़ाई के साथ मनोरंजन भी जरूरी है। बच्चों को थोड़ा समय मूड फ्रेश करने के लिए दें। बच्चों की परेशानियों को समझे। बच्चों को अभिभावकों का प्यार और सहयोग चाहिए डांट और फटकार नहीं।
विज्ञापन
इन बातों पर दें ध्यान
- पढ़ाई के साथ बच्चों को मूड फ्रेश करने समय दें।
- बच्चों से प्यार से बात करें और अपना सहयोग दें।
- बच्चों के खाने पीने का ध्यान रखें।
- हर बच्चे की बौद्धिक क्षमता भिन्न होती, इसे समझें।