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धान के साथ किसानों के चेहरे भी पड़े पीले

Mon, 10 Aug 2015 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 10 Aug 2015 11:47 PM IST
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मौसम के बदले मिजाज और कम बारिश ने किसानों को बर्बाद कर दिया। पहले बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल चौपट हो गई तो अब बारिश कम होने से धान की फसल किसान की बर्बादी का सबब बन रही है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि जिले के गंगापार और यमुनापार के हजारों किसानों ने धान की रोपाई से ही तौबा कर ली और जहां रोपाई हुई, वहां बारिश कम होने से फसल बर्बाद होने की कगार पर है। नहरों में पानी की कमी और सरकारी नलकूपों की खराबी ने किसानों की मुसीबत बढ़ा दी है। इन सबके बीच अपनी विवादित कार्यप्रणाली के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले कृषि विभाग के अफसरों ने शासन को रिपोर्ट भेज दी है कि जिले में धान रोपाई का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है।
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सिंचाई के अभाव में खेतों में लहलहाती धान की फसल पीली पड़ने लगी है। धान के खेतों में जहां लबालब पानी होना चाहिए था, वहां दरारें पड़ने लगी हैं। बारिश की उम्मीद में जिन किसानों ने धान की रोपाई कर दी, फसल बर्बाद होते देख उनका चेहरा भी सूखने लगा है। गेहूं की फसल बर्बाद होने के बाद मुआवजा वितरण का हश्र देख किसानों को अब सूखे की स्थिति में प्रशासन से बहुत उम्मीदें नहीं रह गई हैं।
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गंगापार के चिरौरा, घमई हुमासगंज, चंदौसी, बाबूगंज कोड़ापुर जैसे गांवों में रहने राम सुंदर, हरिकेश, संतोष, हरिकिशन, सुबोध सिंह सहित तमाम किसानों ने बारिश की उम्मीद में धान की रोपाई तो कर दी लेकिन अब फसल बर्बाद हो रही है। पिछली फसल इस कदर बर्बाद हुई कि गेहूं बेचना तो दूर, खाने के लिए भी नहीं बचा। ऐसे में निजी नलकूपों से सिंचाई का खर्च किसानों के वशी बात नहीं रह गई है। खेतों की सिंचाई तो दूर की बात, फसल को बचाना भी भारी पड़ रहा है।
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कमोवेश यही हालात यमुनापार में भी हैं। यमुनापार में मेजा के मरहा गांव के किसान राम शिरोमणि, नेबूलाल, अमीलिया कला गांव क सुखदेव, हरिश्चंद्र, जरार गांव के चिंतामणि, शिवसेवक, हुलका गांव के राजाराम पांडे और ऊंचडीह के संतोष का कहना है कि बारिश न होने से सूखे के हालात बन गए हैं। किसान धान की रोपाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे। निजी ट्यूबवेल के सहारे कब तक  फसलबचाई जा सकती है। सरकारी नलकूप खराब पड़े हैं। अगर काम कर भी रहे हैं तो बिजली न होने से उनका संचालन ठप पड़ रहा है। संबंधित अफसरों से कई बार शिकायत की गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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