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प्रदर्शनकारियों को बीच रास्ते रोका, लाठीचार्ज
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 10 Nov 2015 01:12 AM IST
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गौहनिया/बारा (इलाहाबाद)। पंचायत चुनाव के दौरान बारा तहसील के गींज पहाड़ी गांव में भूख से बाप-बेटी की मौत का मामला सामने आने पर सियासत गरमा गई है। सोमवार को कुछ भाजपाई पीड़ित परिवार एवं गांव वालों को लेकर धरना-प्रदर्शन करने बारा से कलक्ट्रेट के लिए रवाना हुए तो तहसील प्रशासन और पुलिस के अफसरों ने उन्हें बीच रास्ते रोक लिया। पीड़ित परिवार को अफसर वापस गांव ले गए और जो लोग बचे, उन पर लाठियां बरसाई गईं। चौराहे पर भगदड़ मच गई और तमाम ग्रामीण वहां से भाग निकले। आधा दर्जन लोगों को पुलिस बारा थाने ले आई। भाजपाइयों के हस्तक्षेप के बाद शाम पांच बजे उन्हें छोड़ा गया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भाजपा नेता सुबोध सिंह के नेतृत्व में गींज गांव में रहने वाले तमाम मुसहर परिवारों और पीड़ित परिवार को भूख से ही दो मौतों के खिलाफ जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करना था। साथ ही डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भी भेजा जाना था। कुछ भाजपाई सोमवार को दिन में पीड़ित परिवार एवं आसपास के गांवों में रहने वाले मुसहर परिवारों को इकट्ठा करने गींज गांव पहुंचे।
प्रधान को इसकी भनक लग चुकी थी, सो कुछ ही देर में सूचना ब्लॉक और तहसील के अफसरों तक पहुंच गई। पहले तो ग्रामीणों को गांव में ही रोकने की कोशिश की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। ग्रामीण तीन अप्पे गाड़ियों में बैठकर शहर की ओर रवाना हुए लेकिन गौहनिया चौराहे पर बारा तहसीलदार राम कुमार शुक्ला और घूरपुर एवं बारा थाने की पुलिस ने उन्हें रोक लिया।
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पीड़ित परिवार को गाड़ियों से उतारा गया तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। ग्रामीण वहां से भागे। आधा दर्जन लोग पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस उन्हें लेकर बारा थाने चली गई और पीड़ित परिवार सहित एक दर्जन महिलाओं को जसरा सीएचसी ले जाया गया। बाद में वहां से सभी महिलाओं को गांव भेज दिया गया। उधर, कलक्ट्रेट में ग्रामीणों का इंतजार कर रहे भाजपा नेता सुबोध सिंह को खबर मिली तो वह सीधे एसएसपी ऑफिस पहुंच गए।
वहां एसपी यमुनापार आशुतोष मिश्र मौजूद थे। उनसे बातचीत के बाद शाम पांच बजे आधा दर्जन ग्रामीणों को थाने से छोड़ दिया गया लेकिन पुलिस ने एक अप्पे वाहन सीज कर दिया। भाजपा नेता का आरोप है कि प्रशासन के अफसर भूख से मौत का मामला दबाना चाहते हैं। इसी वजह से ग्रामीणों को कलक्ट्रेट पहुंचने से रोका गया।
‘पीड़ित परिवार का पारिवारिक लाभ योजना के तहत बैंक में खाता खुलवाना था। उन्हें लेने तहसील कर्मी गांव पहुंचे तो बताया गया कि कुछ लोग परिवार को पहले ही साथ ले जा चुके है। खोजबीन हुई तो मालूम पड़ा कि परिवार को करछना की ओर ले जाया जा रहा हैं। गौहनिया चौराहे के पास परिवार को रोककर वापस जसरा ले जाया गया और मृतक समरजीत की पत्नी उर्मिला देवी का बैंक में खाता खुलवाया गया। साथ ही राशन कार्ड दिया गया।’
भाजपाइयों ने राज्यपाल को दिया ज्ञापन
इलाहाबाद (ब्यूरो)। बारा तसहील के गींज गांव में भूख से दो मौतों का मामला सामने आने के बाद भाजइयों ने पार्टी नेता सुबोध सिंह के नेतृत्व में राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया। उधर, पार्टी के वरिष्ठ नेता आचार्य कुशमुनि स्वरूप के नेतृत्व में भी एक प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर को ज्ञापन देकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन इस मामले को दबाना चाह है रहा है। मांग की कि इसे पूरे मामले कमी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। ज्ञापन देने वालों में अमरेश श्रीवास्तव, सावन जोगी, रोहित जायसवाल, ज्वाला कुमार, दीपक गुप्ता, अरुण मिश्र आदि मौजूद रहे।
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पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भाजपा नेता सुबोध सिंह के नेतृत्व में गींज गांव में रहने वाले तमाम मुसहर परिवारों और पीड़ित परिवार को भूख से ही दो मौतों के खिलाफ जिला मुख्यालय में धरना-प्रदर्शन करना था। साथ ही डीएम के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भी भेजा जाना था। कुछ भाजपाई सोमवार को दिन में पीड़ित परिवार एवं आसपास के गांवों में रहने वाले मुसहर परिवारों को इकट्ठा करने गींज गांव पहुंचे।
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प्रधान को इसकी भनक लग चुकी थी, सो कुछ ही देर में सूचना ब्लॉक और तहसील के अफसरों तक पहुंच गई। पहले तो ग्रामीणों को गांव में ही रोकने की कोशिश की गई लेकिन सफलता नहीं मिली। ग्रामीण तीन अप्पे गाड़ियों में बैठकर शहर की ओर रवाना हुए लेकिन गौहनिया चौराहे पर बारा तहसीलदार राम कुमार शुक्ला और घूरपुर एवं बारा थाने की पुलिस ने उन्हें रोक लिया।
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पीड़ित परिवार को गाड़ियों से उतारा गया तो ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। इस पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। ग्रामीण वहां से भागे। आधा दर्जन लोग पुलिस के हत्थे चढ़ गए। पुलिस उन्हें लेकर बारा थाने चली गई और पीड़ित परिवार सहित एक दर्जन महिलाओं को जसरा सीएचसी ले जाया गया। बाद में वहां से सभी महिलाओं को गांव भेज दिया गया। उधर, कलक्ट्रेट में ग्रामीणों का इंतजार कर रहे भाजपा नेता सुबोध सिंह को खबर मिली तो वह सीधे एसएसपी ऑफिस पहुंच गए।
वहां एसपी यमुनापार आशुतोष मिश्र मौजूद थे। उनसे बातचीत के बाद शाम पांच बजे आधा दर्जन ग्रामीणों को थाने से छोड़ दिया गया लेकिन पुलिस ने एक अप्पे वाहन सीज कर दिया। भाजपा नेता का आरोप है कि प्रशासन के अफसर भूख से मौत का मामला दबाना चाहते हैं। इसी वजह से ग्रामीणों को कलक्ट्रेट पहुंचने से रोका गया।
‘पीड़ित परिवार का पारिवारिक लाभ योजना के तहत बैंक में खाता खुलवाना था। उन्हें लेने तहसील कर्मी गांव पहुंचे तो बताया गया कि कुछ लोग परिवार को पहले ही साथ ले जा चुके है। खोजबीन हुई तो मालूम पड़ा कि परिवार को करछना की ओर ले जाया जा रहा हैं। गौहनिया चौराहे के पास परिवार को रोककर वापस जसरा ले जाया गया और मृतक समरजीत की पत्नी उर्मिला देवी का बैंक में खाता खुलवाया गया। साथ ही राशन कार्ड दिया गया।’
भाजपाइयों ने राज्यपाल को दिया ज्ञापन
इलाहाबाद (ब्यूरो)। बारा तसहील के गींज गांव में भूख से दो मौतों का मामला सामने आने के बाद भाजइयों ने पार्टी नेता सुबोध सिंह के नेतृत्व में राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित किया। उधर, पार्टी के वरिष्ठ नेता आचार्य कुशमुनि स्वरूप के नेतृत्व में भी एक प्रतिनिधिमंडल ने कमिश्नर को ज्ञापन देकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन इस मामले को दबाना चाह है रहा है। मांग की कि इसे पूरे मामले कमी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। ज्ञापन देने वालों में अमरेश श्रीवास्तव, सावन जोगी, रोहित जायसवाल, ज्वाला कुमार, दीपक गुप्ता, अरुण मिश्र आदि मौजूद रहे।