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मौसम की मार से अबकी एक चौथाई कम पैदावार
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 20 Feb 2016 12:03 AM IST
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अबकी फसलों की पैदावार पर मौसम की मार पड़ना तय है। गेहूं के साथ ही दलहन, तिलहन की फसलों पर भी इसका असर साफ दिखेगा। तापमान के लगातार उच्च बने रहने और ठंड न पड़ने से खेतों से नमी गायब हो गई है। समय से पहले पौधों में बालियां निकलने लगी हैं। इससे न पौधों का विकास हुआ और न ही बालियां भरी पूरी होंगी। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम की मार से अबकी पैदावार में तकरीबन 25 फीसदी तक कमी आ सकती है।
किसान पिछली तीन फसलों से मौसम की मार झेल रहे हैं। रबी के मौसम में आए दिन बारिश होने से खेतों में पौधे तो निकले लेकिन उनमें फूल नहीं निकल सके। गेहूं और सरसों के पौधे खेतों में ही गिर गए।
पौधों में जान नहीं रही। उनमें रोग लग गए, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ा। खरीफ की फसलों से भी मौसम रूठा रहा। बारिश के लिए तरसते रहे और फसलें खेतों में ही सूख गई। अब फिर रबी की फसलों पर इसकी मार पड़ी है। शहर से जुड़े इलाके झूंसी के किसान मान सिंह, बेला यादव, उमेश सिंह, रुद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि अबकी ठंड डेढ़ महीने देर से शुरू हुई, जिससे बोआई समय पर नहीं हो पाई। तापमान अधिक रहने से खेतों में नमी नहीं रह गई। बारिश भी मामूली हुई।
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और तो और बिजली भी बराबर नहीं मिली जिससे गेहूं, आलू, सरसों, मटर आदि की सिंचाई नहीं हो पाई।
जिला कृषि अधिकारी गणेश प्रसाद भी मानते हैं कि मौसम का असर गेहूं, चना, मटर, सरसों जैसी फसलों पर पड़ा है। इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर के पूर्व कृषि वैज्ञानिक डॉ.महाबलराम के मुताबिक फसलों को देखकर आशंका है कि पैदावार में 25 फीसदी से अधिक की गिरावट हो सकती है। जहां सिंचाई का साधन केवल नलकूप है, वहां तो उत्पादन पर 50 फीसदी तक की कमी भी संभव है। मौसम का हाल ऐसे ही रहा तो आने वाले दिनों में आटा, दाल, तेल जैसी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ना तय है।
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किसान पिछली तीन फसलों से मौसम की मार झेल रहे हैं। रबी के मौसम में आए दिन बारिश होने से खेतों में पौधे तो निकले लेकिन उनमें फूल नहीं निकल सके। गेहूं और सरसों के पौधे खेतों में ही गिर गए।
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पौधों में जान नहीं रही। उनमें रोग लग गए, जिसका सीधा असर पैदावार पर पड़ा। खरीफ की फसलों से भी मौसम रूठा रहा। बारिश के लिए तरसते रहे और फसलें खेतों में ही सूख गई। अब फिर रबी की फसलों पर इसकी मार पड़ी है। शहर से जुड़े इलाके झूंसी के किसान मान सिंह, बेला यादव, उमेश सिंह, रुद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि अबकी ठंड डेढ़ महीने देर से शुरू हुई, जिससे बोआई समय पर नहीं हो पाई। तापमान अधिक रहने से खेतों में नमी नहीं रह गई। बारिश भी मामूली हुई।
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और तो और बिजली भी बराबर नहीं मिली जिससे गेहूं, आलू, सरसों, मटर आदि की सिंचाई नहीं हो पाई।
जिला कृषि अधिकारी गणेश प्रसाद भी मानते हैं कि मौसम का असर गेहूं, चना, मटर, सरसों जैसी फसलों पर पड़ा है। इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर के पूर्व कृषि वैज्ञानिक डॉ.महाबलराम के मुताबिक फसलों को देखकर आशंका है कि पैदावार में 25 फीसदी से अधिक की गिरावट हो सकती है। जहां सिंचाई का साधन केवल नलकूप है, वहां तो उत्पादन पर 50 फीसदी तक की कमी भी संभव है। मौसम का हाल ऐसे ही रहा तो आने वाले दिनों में आटा, दाल, तेल जैसी जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ना तय है।