Allahabad Museum : कभी बंद हो गया था इलाहाबाद संग्रहालय, बाद में घोषित हुआ राष्ट्रीय महत्व की संस्था
इलाहाबाद संग्रहालय ने इतिहास में काफी उतार चढ़ाव देखे हैं। एक समय अपरिहार्य कारणों से इसे बंद तक कर दिया गया था, लेकिन बाद में इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया गया।
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इलाहाबाद संग्रहालय ने इतिहास में काफी उतार चढ़ाव देखे हैं। एक समय अपरिहार्य कारणों से इसे बंद तक कर दिया गया था, लेकिन बाद में इसे राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया गया। वर्ष 1863 में राजस्व परिषद ने उत्तर पश्चिम प्रांत की सरकार से पब्लिक लाइब्रेरी और एक संग्रहालय की स्थापना के लिए निवेदन किया था। इसके बाद प्रसिद्ध पुरालेख शास्त्री सर विलियम म्योर और महाराजा विजय नगरम को अधीक्षक, पुस्तकालय व संग्रहालय के रूप में नियुक्त किया गया। 1878 में आरनेट भवन का उद्घाटन कर इसमें एकत्रित संग्रह को रखा गया। हालांकि, वर्ष 1881 में अपरिहार्य कारणों से संग्रहालय बंद हो गया।
इसके बाद लगभग 50 साल बाद वर्ष 1931 में म्युनिसिपल भवन में संग्रहालय फिर से खुला। स्थानाभाव के कारण भवन को चंद्रशेखर आजाद पार्क के वर्तमान भवन में स्थानांतरित कर दिया गया। वर्तमान संग्रहालय भवन की आधारशिला 14 दिसबंर 1947 को पं. जवाहरलाल नेहरू ने रखी थी। वर्ष 1954 में संग्रहालय जनसामान्य के लिए खोल दिया गया। कलाकृतियों के महत्वपूर्ण संग्रह को देखते हुए सितंबर 1985 में संस्कृति विभाग, भारत सरकार ने संग्रहालय को राष्ट्रीय महत्व की संस्था घोषित किया। 2008 से राज्यपाल, उप्र इलाहाबाद संग्रहालय समिति के पदेन अध्यक्ष हैं।
संग्रहालय में है हिंदी साहित्य के रचनाकारों को समर्पित देश की एकमात्र वीथिका
इलाहाबाद संग्रहालय में बनी साहित्य वीथिका हिंदी साहित्य के रचनाकारों को समर्पित देश की एकमात्र वीथिका है। यह वीथिका हिंदी साहित्य के स्वर्णिम इतिहास का जीवंत दस्तावेज है। इस अनूठी वीथिका की स्थापना छायावादी कवि सुमित्रानंदन पंत ने अपने निजी संग्रह को संग्रहालय को समर्पित कर कराई थी। संग्रहालय की अन्य प्रमुख विथिकाओं में गांधी वीथिका, आजाद वीथिका, नेहरू गैलरी, आधुनिक चित्रकला वीथिका, लघुचित्र संग्रह वीथिका, टेराकोटा गैलरी, प्राकृतिक इतिहास विथिका, प्राचीन प्रस्तर वीथिका, साज सज्जा संग्रह वीथिका, अस्त्र-शस्त्र संग्रह वीथिका, अनुभव विथिका गैलरी आदि शामिल हैं। सह मीडिया प्रभारी डॉ. संजू मिश्रा के अनुसार इन वीथिकाओं का उद्देश्य ऐतिहासिक वस्तुओं, भारतीय संस्कृति साहित्य और स्वतंत्रता आंदोलन की विरासतों से लोगो को रूबरू करना है।
दुर्लभ पिस्तौल, तलवारें और कवच बढ़ा रहे संग्रहालय की शोभा
इलाहाबाद संग्रहालय के अस्त्र शस्त्र संग्रह में दुर्लभ पिस्तौल, राइफल, बंदूक, तलवारें और 18वीं-19वीं शताब्दी के कवच हैं। वस्त्र एवं साज-सज्जा संग्रह में सोने की जरी का काम और काष्ठ कला की कृतियां उल्लेखनीय हैं। संग्रहालय भ्रमण करने वाले बच्चों के लिए यहां एक प्राकृतिक इतिहास विभाग भी है। हाल ही में संग्रहालय की 17वीं वीथिका के रूप में दिव्यांग बच्चों के लिए अनुभव वीथिका का शुभारंभ किया गया है।
लगभग 6,000 मृण्मूर्तियों का संग्रह
इलाहाबाद संग्रहालय में मृण्मूर्तियों का एक विशाल संग्रह है। यहां प्राकमौर्य, शुंग, कुषाण और गुप्त काल की लगभग 6,000 मृण्मूर्तियां हैं। ये मृण्मूर्तियां कौशाम्बी, झूंसी, भीटा, राजघाट (वाराणसी), कन्नौज, संकिसा, मथुरा और अहिच्छत्र जैसे ऐतिहासिक स्थलों से प्राप्त हुई हैं। शुंग कालीन मृण्मूर्तियों में लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, भूदेवी, रथारुढ़ राजा, विविध प्रकार के रथ, शृंगार परक चित्रण, ऐतिहासिक चित्रण (वत्सराज उदयन द्वारा राजकुमारी वासवदत्ता के हरण का फलक), पौराणिक आख्यान (रावण द्वारा सीता हरण का फलक), दैनिक जीवन तथा मनोरंजन यात्राओं के दृश्य उल्लेखनीय हैं।