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साहित्यिक हसरतों का शहर है इलाहाबाद
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Allahabad literature
- फोटो : CITY DESK
प्रलेस की ओर से आयोजित ‘किताबनामा’ में बोले प्रो.गोपेश्वर सिंह
प्रयागराज। प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से बृहस्पतिवार को सिफरी सभागार में आयोजित ’किताबनामा’ के तहत प्रो. गोपेश्वर सिंह की पुस्तक ‘आलोचना के परिसर’ पर चर्चा हुई। इस मौके पर प्रो. गोपेश्वर ने कहा, इलाहाबाद साहित्यिक हसरतों का शहर रहा है। एक अच्छी आलोचना वह है, जो अन्त:करण से उपजी हो और जो रचना के बीच छिपे अर्थों और संभावनाओं को उजागर करती है। समृद्ध साहित्य का विस्तार गांवों, गलियों, शहरों औऱ जनांदोलनों में सक्त्रिस्य सहभागिता से होता है।
दिनेश कुमार ने कहा, जब रचना के कई परिसर हो सकते हैं तो आलोचना के भी कई परिसर हो सकते हैं। कुमार वीरेंद्र ने कहा, यह पुस्तक आलोचना के नए परिसर का उद्घाटन करती है। इस पर गांधीवाद की छाप है, जो होनी भी चाहिए।
बतौर अध्यक्ष प्रो हेरंब चतुर्वेदी ने कहा, यह पुस्तक आलोचकीय विवेक की सशक्त बानगी है। इसमें समावेशी और जन-मन की बात बड़े सलीके और तेवर के साथ की गई है। स्वागत प्रो. संतोष भदौरिया और संचालन धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम में असरार गांधी, नीलम शंकर, फजले हसनैन, आरती चिराग,राम जी राय, हरिश्चन्द पांडेय, अनुपम आनंद, प्रवीण शेखर, सुनील मौर्या, चितरंजन कुमार, विनम्रसेन, संतोष सिंह आदि मौजूद थे।
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प्रयागराज। प्रगतिशील लेखक संघ की ओर से बृहस्पतिवार को सिफरी सभागार में आयोजित ’किताबनामा’ के तहत प्रो. गोपेश्वर सिंह की पुस्तक ‘आलोचना के परिसर’ पर चर्चा हुई। इस मौके पर प्रो. गोपेश्वर ने कहा, इलाहाबाद साहित्यिक हसरतों का शहर रहा है। एक अच्छी आलोचना वह है, जो अन्त:करण से उपजी हो और जो रचना के बीच छिपे अर्थों और संभावनाओं को उजागर करती है। समृद्ध साहित्य का विस्तार गांवों, गलियों, शहरों औऱ जनांदोलनों में सक्त्रिस्य सहभागिता से होता है।
दिनेश कुमार ने कहा, जब रचना के कई परिसर हो सकते हैं तो आलोचना के भी कई परिसर हो सकते हैं। कुमार वीरेंद्र ने कहा, यह पुस्तक आलोचना के नए परिसर का उद्घाटन करती है। इस पर गांधीवाद की छाप है, जो होनी भी चाहिए।
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बतौर अध्यक्ष प्रो हेरंब चतुर्वेदी ने कहा, यह पुस्तक आलोचकीय विवेक की सशक्त बानगी है। इसमें समावेशी और जन-मन की बात बड़े सलीके और तेवर के साथ की गई है। स्वागत प्रो. संतोष भदौरिया और संचालन धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने किया। कार्यक्रम में असरार गांधी, नीलम शंकर, फजले हसनैन, आरती चिराग,राम जी राय, हरिश्चन्द पांडेय, अनुपम आनंद, प्रवीण शेखर, सुनील मौर्या, चितरंजन कुमार, विनम्रसेन, संतोष सिंह आदि मौजूद थे।
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