बटुए में समाए बजट तो हो जाए कुछ बचत
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अल्लापुर शिवनगर कॉलोनी के अंबरीश श्रीवास्तव एक निजी कंपनी में कर्मचारी हैं। महीने में 25 हजार रुपये वेतन मिलता है। परिवार में चार सदस्य हैं। साल भर पहले की बात है जब छह हजार रुपये में आटा, दाल, चावल, घी, तेल, पाउडर, शैम्पू, साबुन सहित पूरा राशन आ जाता था। अब इसके लिए हर महीने कम से कम आठ हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अप्रैल से स्कूल में नया सत्र भी शुरू हो जाएगा और बच्चे की फीस भी बढ़ जाएगी। फीस पर हर महीने कम से कम तीन हजार रुपये की जरूरत पड़ेगी। बच्चे का दूध, रसोई गैस का खर्च, ऑफिस आने-जाने के लिए पेट्रोल का खर्च यानी कम से कम पांच हजार रुपये महीने का अतिरिक्त खर्च। अगर परिवार को महीने में एक बार फिल्म दिखाने सिनेमाघर ले गए और किसी औसत रेस्टोरेंट में भोजन कर लिया तो दो से ढाई हजार रुपये और खर्च हो जाएंगे। बिजली का बिल और अन्य छिटपुट जरूरतों को भी पूरा करना है। ऐसे में बचत तो दूर, इन खर्चों को पूरा करने में महीने का वेतन भी कम पड़ जाता है। अगर साल में इंक्रीमेंट मिला भी तो पांच से दस फीसदी जबकि महंगाई में इजाफा हुआ 10 से 20 फीसदी। यह तो एक उदाहरण है। महंगाई से जूझ रहे नौकरीशुदा लोगों और छोटे व्यापारियों को घर का खर्च चलाने के लिए हर महीने जद्दोजहद करनी पड़ रही रही है।
‘आगामी बजट में रोजमर्रा के उपयोग में आने वाली वस्तुओं के मूल्य कम किए जाने चाहिए। दाल, आटा, घी, तेल, सब्जियों के भाव पर नियंत्रण बहुत जरूरी है। सर्विस टैक्स में भी कुछ राहत मिलनी चाहिए ताकि परिवार संग किसी रेस्टोरेंट में जाने से पहले जेब न टटोलनी पड़ी।’ महेश पुनेठा, एक निजी कंपनी में कर्मचारी
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‘साल भर पहले जो राशन पांच हजार रुपये में आता था, अब सात हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसमें संतुलन के लिए कुछ खर्चों में कटौती करनी पड़ी। अब दो की जगह डेढ़ लीटर दूध लेना पड़ता है। घी-तेल का उपयोग भी कम कर दिया है। इसी तरह कुछ अन्य खर्चों में भी कटौती करनी पड़ी है। सरकार से उम्मीद है कि इस बजट में कम से कम आम आदमी का ख्याल रखा जाएगा ताकि आम आदमी को मन मारकर न जीना पड़े।’ पूनम गुप्ता, गृहणी, निवासी कर्नलगंज
‘साल दर साल महंगाई बढ़ रही है और उसके मुकाबले इनकम आधी भी नहीं बढ़ रही। ऐसे में खर्चों में कटौती मजबूरी हो गई है। बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाने में ही पसीना छूट जाता है। अगर कोई मेहमान आ गया तो बजट ही बिगड़ जाता है। ऐसे में बचत कर पाना किसी सपने जैसा हो गया है। आम आदमी की बात करने वाली सरकार को आम बजट में इस बात पर ध्यान देना चाहिए।’ निधि अरोरा, गृहणी, निवासी जॉर्जटाउन
‘गुड़िया तालाब के पास मेरी किराने की दुकान है। बात सही है कि साल भर पहले जो राशन पांच हजार रुपये का था, उसका मूल्य अब सात हजार रुपये हो गया है, लेकिन इसमें छोटी व्यापारियों को कोई फायदा नहीं। महंगाई बढ़ने के कारण मुनाफा उतना ही है, जितना साल भर पहले था। ऐसे में सरकार ने कई तरह के टैक्स लगा रखे हैं। उम्मीद है कि बजट में छोटे व्यापारियों का ख्याल रखा जाएगा और टैक्स में कुछ राहत दी जाएगी।’ कन्हैया लाल, व्यापारी