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अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा हाईकोर्ट में तलब
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कोर्ट की अवमानना में दोषी करार, तय होगा आरोप
प्रयागराज। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा लखनऊ राजेंद्र कुमार तिवारी को हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना का प्रथमदृष्टया दोषी करार दिया है। उन पर अवमानना का आरोप तय होगा। अदालत ने उनको 10 दिसंबर को अवमानना आरोप निर्मित करने के लिए कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अपर मुख्य सचिव कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के लिए प्रथम दृष्टया अवमानना के दोषी है। और अभियोजन चलाए जाने के लिए जिम्मेदार हैं ।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने श्री त्रिवेणी संस्कृत महाविद्यालय प्रयागराज की प्रबंध समिति की अवमानना याचिका पर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक आयोग द्वारा अध्यापकों के चयन के नियम नहीं बन जाते तब तक विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार संस्कृत महाविद्यालयों में अध्यापकों और प्रधानाचार्यों का चयन जारी रखा जाए। इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी। खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज करते हुए आदेश दिया कि जब तक चयन आयोग द्वारा प्रधानाचार्य एवं अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया एवं उनके वेतन के निर्धारण के नियम नहीं बन जाते तब तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की परिनियमावली के तहत निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर नियुक्तियां जारी रखी जाए ।
इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। जिस पर यह अवमानना याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव को अवमानना का दोषी करार दिया है और आरोप निर्मित करने के लिए 10 दिसंबर को तलब किया है। सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।
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प्रयागराज। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा लखनऊ राजेंद्र कुमार तिवारी को हाईकोर्ट ने अदालत की अवमानना का प्रथमदृष्टया दोषी करार दिया है। उन पर अवमानना का आरोप तय होगा। अदालत ने उनको 10 दिसंबर को अवमानना आरोप निर्मित करने के लिए कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अपर मुख्य सचिव कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने के लिए प्रथम दृष्टया अवमानना के दोषी है। और अभियोजन चलाए जाने के लिए जिम्मेदार हैं ।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने श्री त्रिवेणी संस्कृत महाविद्यालय प्रयागराज की प्रबंध समिति की अवमानना याचिका पर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि जब तक आयोग द्वारा अध्यापकों के चयन के नियम नहीं बन जाते तब तक विश्वविद्यालय के नियमों के अनुसार संस्कृत महाविद्यालयों में अध्यापकों और प्रधानाचार्यों का चयन जारी रखा जाए। इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी। खंडपीठ ने सरकार की अपील खारिज करते हुए आदेश दिया कि जब तक चयन आयोग द्वारा प्रधानाचार्य एवं अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया एवं उनके वेतन के निर्धारण के नियम नहीं बन जाते तब तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी की परिनियमावली के तहत निर्धारित चयन प्रक्रिया के आधार पर नियुक्तियां जारी रखी जाए ।
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इस आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। जिस पर यह अवमानना याचिका दाखिल की गई है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव को अवमानना का दोषी करार दिया है और आरोप निर्मित करने के लिए 10 दिसंबर को तलब किया है। सुनवाई 10 दिसंबर को होगी।
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