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निदेशक उच्च शिक्षा पर एक लाख हर्जाना
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बदायूं के सेवानिवृत्त कर्मचारी को बेवजह मुकदमे में उलझाने पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
प्रयागराज। सेवानिवृत्त कर्मचारी को उसका बकाया भुगतान न करके बार-बार मुकदमे में उलझाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाने की यह राशि अधिकारी को याची कर्मचारी को देनी होगी। कोर्ट ने कर्मचारी के सेवानिवृत्ति परिलाभ से की गई चार लाख रुपये से अधिक की कटौती भी सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कर्मचारी को ग्रेच्युटी पर भी ब्याज पाने का हकार माना है। ओमप्रकाश तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने यह आदेश दिया।
याचिका पर अधिवक्ता अवनीश त्रिपाठी ने पक्ष रखा। ओमप्रकाश की नियुक्ति गोविंद वल्लभ पंत महाविद्यालय कछाला बदायूं में हेड क्लर्क के पद पर 1970 में हुई थी। चार मई 1985 को उसे सेवा से निकाल दिया गया। एक दिसंबर 1993 को जिला विद्यालय निरीक्षक ने उसे अनुमोदित कर दिया। इस आदेश को उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए याची को सात अक्तूबर 1984 से रिटायरमेंट की तारीख तक नियमित सेवा में मानते हुए सेवानिवृत्ति परिलाभ देने का आदेश दिया।
इस आदेश के बावजूद याची को पेंशन, ग्रेच्युटी आदि का भुगतान नहीं किया गया तो उसने दुबारा याचिका दाखिल की। निदेशालय का कहना था कि याची ने कर्मचारी भविष्य निधि मेें अंशदान नहीं किया है। इस आदेश को भी हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया और भुगतान का आदेश दिया। इसके बाद निदेशालय ने याची के देयों की गणना के बाद उसके सेवानिवृत्ति परिलाभ से चार लाख 14 हजार की कटौती कर ली। इस आदेश को फिर से कोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने कटौती को गलत मानते हुए याची को ब्याज सहित उसका भुगतान करने का आदेश दिया तथा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी बरेली पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है।
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याची के बकाया चार लाख से अधिक का भुगतान करने का भी आदेश दिया है। अधिकारी हाईकोर्ट द्वारा चार बार आदेश दिए जाने के बावजूद याची के बकाया का भुगतान नहीं कर रहे थे इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया।
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प्रयागराज। सेवानिवृत्त कर्मचारी को उसका बकाया भुगतान न करके बार-बार मुकदमे में उलझाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। हर्जाने की यह राशि अधिकारी को याची कर्मचारी को देनी होगी। कोर्ट ने कर्मचारी के सेवानिवृत्ति परिलाभ से की गई चार लाख रुपये से अधिक की कटौती भी सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कर्मचारी को ग्रेच्युटी पर भी ब्याज पाने का हकार माना है। ओमप्रकाश तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने यह आदेश दिया।
याचिका पर अधिवक्ता अवनीश त्रिपाठी ने पक्ष रखा। ओमप्रकाश की नियुक्ति गोविंद वल्लभ पंत महाविद्यालय कछाला बदायूं में हेड क्लर्क के पद पर 1970 में हुई थी। चार मई 1985 को उसे सेवा से निकाल दिया गया। एक दिसंबर 1993 को जिला विद्यालय निरीक्षक ने उसे अनुमोदित कर दिया। इस आदेश को उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए याची को सात अक्तूबर 1984 से रिटायरमेंट की तारीख तक नियमित सेवा में मानते हुए सेवानिवृत्ति परिलाभ देने का आदेश दिया।
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इस आदेश के बावजूद याची को पेंशन, ग्रेच्युटी आदि का भुगतान नहीं किया गया तो उसने दुबारा याचिका दाखिल की। निदेशालय का कहना था कि याची ने कर्मचारी भविष्य निधि मेें अंशदान नहीं किया है। इस आदेश को भी हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया और भुगतान का आदेश दिया। इसके बाद निदेशालय ने याची के देयों की गणना के बाद उसके सेवानिवृत्ति परिलाभ से चार लाख 14 हजार की कटौती कर ली। इस आदेश को फिर से कोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने कटौती को गलत मानते हुए याची को ब्याज सहित उसका भुगतान करने का आदेश दिया तथा क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी बरेली पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है।
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याची के बकाया चार लाख से अधिक का भुगतान करने का भी आदेश दिया है। अधिकारी हाईकोर्ट द्वारा चार बार आदेश दिए जाने के बावजूद याची के बकाया का भुगतान नहीं कर रहे थे इस पर नाराजगी जताते हुए कोर्ट ने यह आदेश दिया।