फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Allahabad high court: The temple of Lord Vishweshwar was destroyed but not in religious form

Allahabad high court: भगवान विश्वेश्वर का मंदिर नष्ट तो किया गया लेकिन धार्मिक स्वरूप से नहीं हुई छेड़छाड़

Wed, 13 Apr 2022 12:14 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 13 Apr 2022 12:14 AM IST
सार

  • काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी विवाद मामले में न्यायमित्र ने दी दलील

विज्ञापन
Allahabad high court: The temple of Lord Vishweshwar was destroyed but not in religious form
allahabad highcourt - फोटो : prayagraj

विस्तार

काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद विवाद मामले में मंगलवार को भी सुनवाई जारी रही। मंदिर का पक्ष रखते हुए न्यायमित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने तर्क दिया कि भगवान विश्वेश्वर प्राचीन काल से अस्तित्व में हैं। अर्थात, सतयुग से अब तक। कहा गया कि मंदिर तो नष्ट किया गया, लेकिन इसके धार्मिक स्वरूप के साथ छेड़छाड़ नहीं की गई। इसके धार्मिक स्वरूप को बरकरार रखा गया।
विज्ञापन


इसलिए पूजा के स्थानों (विशेष प्रावधान अधिनियम 1991) की धारा चार लागू नहीं होती। तर्क दिया कि विश्वेश्वर मंदिर की संरचना 15वीं शताब्दी से पहले की है। अंजुमन इंतजामिया मस्जिद वाराणसी सहित पांच याचिकाओं पर न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। 
विज्ञापन



न्यायमित्र की ओर से कहा गया कि वक्फ  अधिनियम में संपत्ति का पंजीकरण मात्र उस व्यक्ति के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता है, जो मुस्लिम नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि वक्फ  अधिनियम केवल मुसलमानों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों में लागू होता है और इसलिए भले ही विवादित संरचना प्रश्नगत संपत्ति वक्फ  अधिनियम के तहत पंजीकृत है। लेकिन इसका हिंदुओं के दावे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्योंकि, हिंदुओं का उक्त संपत्ति पर भगवान विश्वेश्वर का मंदिर होने का अधिकार है। तर्क दिया कि मुस्लिम पक्ष की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि किस अधिनियम के तहत और किस वर्ष में विवादित संपत्ति को वक्फ  संपत्ति के रूप में पंजीकृत किया गया था।


इस मामले में न्यायालय के समक्ष कोई साक्ष्य नहीं दिया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि वक्फ  अधिनियम 1954 कभी भी यूपी राज्य में लागू नहीं हुआ था। समय की कमी की वजह से मामले की सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तिथि तय कर दी गयी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed