{"_id":"5f451d778ebc3e3cb75e59a0","slug":"allahabad-high-court-son-of-son-convicted-of-murder-of-mother-granted-bail","type":"story","status":"publish","title_hn":"Allahabad High Court: मां की हत्या के दोषी बेटे की जमानत मंजूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Allahabad High Court: मां की हत्या के दोषी बेटे की जमानत मंजूर
Tue, 25 Aug 2020 07:47 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 25 Aug 2020 07:47 PM IST
विज्ञापन
bail
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी मां की हत्या में दोषी करार दिए गए बेटे की अपील पर उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। अपीलार्थी योगेश कुमार के खिलाफ अलीगढ़ के क्वार्सी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें सुनवाई के बाद सत्र न्यायालय ने उसे हत्या का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। योगेश की अपील पर न्यायमूर्ति बी अमित स्थालकर और न्यायमूर्ति शेखर यादव ने सुनवाई की।
अपीलार्थी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि सत्र न्यायालय ने एक मात्र चश्मदीद गवाह अर्जेश कुमार की गवाही पर विश्ववास कर सजा सुनाई है। अर्जेश कुमार का कहना है कि उसने अपीलार्थी को उसके घर के दरवाजे की झिर्री से झांक कर देखा था। पड़ोस स्थित उसके मकान से गोली चलने की आवाज सुनकर वहां गया था।
वह मकान की पहली मंजिल से हाथ में तमंचा लेकर उतर रहा था और फिर तहखाने की ओर तमंचा छुपाने चला गया। अधिवक्ता का कहना था कि उस वक्त रात के पौने 12 बज रहे थे। दरवाजे की झिर्री से इस प्रकार से घटना को देखपाना संभव नहीं है वह रात के वक्त। गवाह का बयान विश्वसनीय नहीं है। इस मामले के अधिकतर गवाह पक्षद्रोही घोषत हो चुके हैं। कोर्ट ने घटना के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए योगेश को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
अपीलार्थी का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी का कहना था कि सत्र न्यायालय ने एक मात्र चश्मदीद गवाह अर्जेश कुमार की गवाही पर विश्ववास कर सजा सुनाई है। अर्जेश कुमार का कहना है कि उसने अपीलार्थी को उसके घर के दरवाजे की झिर्री से झांक कर देखा था। पड़ोस स्थित उसके मकान से गोली चलने की आवाज सुनकर वहां गया था।
विज्ञापन
वह मकान की पहली मंजिल से हाथ में तमंचा लेकर उतर रहा था और फिर तहखाने की ओर तमंचा छुपाने चला गया। अधिवक्ता का कहना था कि उस वक्त रात के पौने 12 बज रहे थे। दरवाजे की झिर्री से इस प्रकार से घटना को देखपाना संभव नहीं है वह रात के वक्त। गवाह का बयान विश्वसनीय नहीं है। इस मामले के अधिकतर गवाह पक्षद्रोही घोषत हो चुके हैं। कोर्ट ने घटना के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए योगेश को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन