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इलाहाबाद हाईकोर्ट : बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के बेटे की शांति भंग में गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका पर यूपी सरकार से मांगा जवाब

Fri, 21 Jan 2022 03:28 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 21 Jan 2022 03:28 AM IST
सार

उमर अंसारी व अन्य की ओर से दाखिल याचिका में शांति भंग के अंदेशे में गिरफ्तार करने, जमानत देकर पाबंदी की नोटिस व चालान करने की वैधता को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही याचिका में एसीएम प्रयागराज के खिलाफ  कार्रवाई करने तथा याची को मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। 

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Allahabad High Court: Seeks response from UP government on petition against arrest of Mukhtar Ansari's son for breach of peace
मुख्तार अंसारी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधायक मुख्तार अंसारी के पुत्र उमर अंसारी व सात अन्य की याचिका पर राज्य सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्र व न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ कर रही थी।

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उमर अंसारी व अन्य की ओर से दाखिल याचिका में शांति भंग के अंदेशे में गिरफ्तार करने, जमानत देकर पाबंदी की नोटिस व चालान करने की वैधता को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही याचिका में एसीएम प्रयागराज के खिलाफ  कार्रवाई करने तथा याची को मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। 

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याचिका पर अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने बहस की। इनका कहना है कि गाजीपुर मोहम्मदाबाद थाना में ट्रिपल हत्या केस की सुनवाई विशेष अदालत प्रयागराज में चल रही है। याची के पिता 2005 से जेल में बंद हैं। चंदौली सैयद राजा से भाजपा के विधायक सुशील सिंह व उनके चाचा (बीजेपी एमएलसी) ने प्रभाव डालकर निर्दोष याचीगण को गिरफ्तार कराया है। ताकि वह आपराधिक केस की पैरवी न कर सकें।

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याचीगण को प्रयागराज विशेष अदालत से धारा 151 में गिरफ्तार कर लिया गया और मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। जहां धारा 107 व 116 में चालान कर धारा 111 के तहत पाबंद करने की नोटिस जारी की गई है।


 


पुलिस का कहना है कि याची बृजेश सिंह व त्रिभुवन सिंह से अपराध की योजना पर बात कर रहा था। शांति भंग होने की आशंका थी। जबकि, याची का कहना है कि कोर्ट में किसी प्रकार का झगड़ा नहीं हुआ। मजिस्ट्रेट ने बिना न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किए पाबंदी नोटिस जारी कर दी। अपनी शक्ति का मनमाना प्रयोग किया। कोई आदेश देने का कारण बताया जाना चाहिए। याचीगण आपराधिक केस में पैरोकार व गवाह हैं। 

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