Allahabad High Court : आईईआरटी में शिक्षकों व कर्मचारियों की सेवा को बरकरार रखते हुए वेतन भुगतान के आदेश
कोर्ट ने शिक्षकों और कर्मचारियों की अलग-अलग बिंदुओ को तय करते हुए आईईआरटी के अधिवक्ता से हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही याचियों से भी हलफनामे पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने संस्थान से पूछा है कि स्ववित्त पाठयक्रम में पदों के मुकाबले कितने शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड रूरल टेक्नालॉजी (आईईआरटी) प्रयागराज में लंबे समय से तैनात शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की सेवा को बहाल रखते हुए उन्हें वेतनमान सहित अन्य लाभों को प्रदान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में यूपी सरकार और संस्थान के निदेशक से शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों का ब्यौरा हलफनामे पर देने को कहा है। कोर्ट अब इस मामले में 12 जुलाई को सुनवाई करेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने सरिता आहूजा और चार अन्य की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए दिया है।
इसके साथ ही शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों को संस्थान को नियमित रिपोर्ट करने और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का भी आदेश दिया है। याचियों ने संस्थान की ओर से उन्हें नियमित सेवा से बर्खास्त कर स्व वित्त योजना के तहत संचालित कोर्सों में भर्ती किए जाने के 10 दिसंबर 2022 के आदेश को चुनौती दी है। इसके अलावा कई पूर्व कर्मचारियों ने भी संस्थान द्वारा अपने हटाए जाने और नई नियुक्ति किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।
कोर्ट ने शिक्षकों और कर्मचारियों की अलग-अलग बिंदुओ को तय करते हुए आईईआरटी के अधिवक्ता से हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही याचियों से भी हलफनामे पर जवाब मांगा है। कोर्ट ने संस्थान से पूछा है कि स्ववित्त पाठयक्रम में पदों के मुकाबले कितने शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति है। इसके अलावा नई नियुक्ति कितनी की गई है और पुरानी नियुक्ति के तहत कितने लोग कार्यरत हैं।
उनकी सेवा की स्थिति क्या है। याचियों की ओर से कहा गया कि संस्थान उनकी लंबी सेवावधि को दरकिनार करते हुए उन्हें नई योजना के तहत नियुक्ति कर रहा है। जबकि, वह पहले से नियमित कर्मचारी हैं और उन्हें नियमित कर्मचारी के तौर पर वेतन मिलता रहा है। लेकिन, संस्थान अपने 10 दिसंबर 2019 के आदेश के तहत उन्हें बर्खास्त कर स्व वित्त योजना के तहत संचालित कोर्सों में नियुक्त कर रहा है।
इस तरह की कई याचिकाएं पूर्व में भी दाखिल हैं। कोर्ट ने अपने छह जनवरी 2020 के आदेश के तहत संस्थान द्वारा जारी बर्खास्तगी आदेश पर रोक लगा रही है। संस्थान इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी जा चुका है लेकिन उसकी याचिका खारिज हो चुकी है। इसके बाद उसने पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की लेकिन वह भी खारिज हो चुकी है। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए प्रतिवादियों से जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।