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Allahabad High Court News: जेएनयू के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की नागरिकता समाप्त करने की मांग हाईकोर्ट ने की खारिज, याची पर 25 हजार रुपये हर्जाना
Sun, 06 Sep 2020 03:41 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 06 Sep 2020 03:41 PM IST
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कन्हैया कुमार
- फोटो : सोशल मीडिया
जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की नागरिकता समाप्त करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करना वाराणसी के नागेश्वर मिश्रा को भारी पड़ गया। कोर्ट ने इसे बिना कानूनों की सही तरीके से जानकारी किए सस्ती लोकप्रियता के लिए दाखिल की गई याचिका करार देते हुए याची पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगा दिया साथ ही याचिका भी खारिज कर दी। अदालत ने नागरिकता समाप्त करने के सवाल को भी तय करते हुए इसे मेरिट पर खारिज कर दिया।
याचिका पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की पीठ ने सुनवाई की। याचिका में कहा गया कि जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने नौ फरवरी 2016 को जेएनयू परिसर में देश विरोधी नारे लगाए थे। जिस पर उनके खिलाफ देशद्रोह की धाराओं में मुकदमा दर्ज है। दिल्ली में इस मुकदमे का ट्रायल चल रहा है।
कन्हैया कुमार और उनके साथी उन आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी बताते हैं जो भारत की एकता और अखंडता पर प्रहार कर रहे हैं और उसे नष्ट करने का कुचक्र करते हैं। इसके बावजूद भारत सरकार ने कन्हैया कुमार की नागरिता समाप्त नहीं कर रही है। याचिका में कन्हैया कुमार की भारत की नागरिकता समजप्त करने की मांग की गई।
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कोर्टछ ने संविधान के अनुच्छेद 5(सी) और भारतीय नागरिकता कानून 1955 की धारा 10 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भारतीय नागरिक को उसकी नागरिता से सिर्फ तभी वंचित किया जा सकता है जब उसे नागरिकता नेच्युरलाइजेशन(विदेशी व्यक्ति को भारत का नागरिक बनाने की प्रक्रिया ) या संविधान में प्रदत्त प्रक्रिया के द्वारा दी गई हो। कन्हैया कुमार भारत में ही पैदा हुए हैं। वह जन्मजात भारत के नागरिक हैं। इसलिए सिर्फ मुकदमे का ट्रायल चलने के आधार पर उनकी नागरिकता समाप्त नहीं की जा सकती है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि याची ने बिना कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किए सिर्फ सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए याचिका दाखिल की है। ऐसे समय में जब कोरोना के कारण अदालतें सीमित तरीके से काम कर रही हैं और मुकदमों का बोझ बहुत है , इस प्रकार की फिजूल की याचिका दाखिल करना न्यायकि प्रक्रिया का दुरुपयोग और अदालत के कीमती समय की बर्बादी है।
कोर्ट ने इसके लिए याची पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। यह रकम उसे एक माह के भीतर महानिबंधक के समक्ष बैंक ड्राफ्ट के द्वारा जमा करनी है। रकम एडवाकेटस एसोसिएशन के खाते में महानिबंधक द्वारा भेजी जाएगी। हर्जाना जमा न करने परभ कोर्ट ने कलेक्टर वाराणसी को इसे राजस्व की तरह याची से वसूल करने का निर्देश दिया है।
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याचिका पर न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति शमीम अहमद की पीठ ने सुनवाई की। याचिका में कहा गया कि जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार ने नौ फरवरी 2016 को जेएनयू परिसर में देश विरोधी नारे लगाए थे। जिस पर उनके खिलाफ देशद्रोह की धाराओं में मुकदमा दर्ज है। दिल्ली में इस मुकदमे का ट्रायल चल रहा है।
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कन्हैया कुमार और उनके साथी उन आतंकवादियों को स्वतंत्रता सेनानी बताते हैं जो भारत की एकता और अखंडता पर प्रहार कर रहे हैं और उसे नष्ट करने का कुचक्र करते हैं। इसके बावजूद भारत सरकार ने कन्हैया कुमार की नागरिता समाप्त नहीं कर रही है। याचिका में कन्हैया कुमार की भारत की नागरिकता समजप्त करने की मांग की गई।
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कोर्टछ ने संविधान के अनुच्छेद 5(सी) और भारतीय नागरिकता कानून 1955 की धारा 10 के प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भारतीय नागरिक को उसकी नागरिता से सिर्फ तभी वंचित किया जा सकता है जब उसे नागरिकता नेच्युरलाइजेशन(विदेशी व्यक्ति को भारत का नागरिक बनाने की प्रक्रिया ) या संविधान में प्रदत्त प्रक्रिया के द्वारा दी गई हो। कन्हैया कुमार भारत में ही पैदा हुए हैं। वह जन्मजात भारत के नागरिक हैं। इसलिए सिर्फ मुकदमे का ट्रायल चलने के आधार पर उनकी नागरिकता समाप्त नहीं की जा सकती है।
कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि याची ने बिना कानूनी प्रावधानों का अध्ययन किए सिर्फ सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए याचिका दाखिल की है। ऐसे समय में जब कोरोना के कारण अदालतें सीमित तरीके से काम कर रही हैं और मुकदमों का बोझ बहुत है , इस प्रकार की फिजूल की याचिका दाखिल करना न्यायकि प्रक्रिया का दुरुपयोग और अदालत के कीमती समय की बर्बादी है।
कोर्ट ने इसके लिए याची पर 25 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। यह रकम उसे एक माह के भीतर महानिबंधक के समक्ष बैंक ड्राफ्ट के द्वारा जमा करनी है। रकम एडवाकेटस एसोसिएशन के खाते में महानिबंधक द्वारा भेजी जाएगी। हर्जाना जमा न करने परभ कोर्ट ने कलेक्टर वाराणसी को इसे राजस्व की तरह याची से वसूल करने का निर्देश दिया है।