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Allahabad High Court : ऊंट की मौत के मामले में मुख्य न्यायमूर्ति को भेजी पत्र याचिका
Mon, 25 Jul 2022 11:21 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 25 Jul 2022 11:21 PM IST
सार
allahabad high court : याची अधिवक्ता सौरभ तिवारी का कहना है कि जिलाधिकारी वाराणसी के मनमाने रवैये के कारण पिछले 27 जून को तस्करों के कब्जे से मुक्त कराए गये। 16 में से एक ऊंट 24 जुलाई को मर गया, जबकि दो की हालत खराब है।
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allahabad high court
- फोटो : social media
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता ने वाराणसी में कोर्ट आदेश से संरक्षण में एक ऊंट की मौत मामले में जिलाधिकारी की लापरवाही को लेकर मुख्य न्यायाधीश को पत्र याचिका भेजी है। पत्र याचिका में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को मानने से जिलाधिकारी वाराणसी पर सीधे तौर पर इन्कार करने का आरोप लगाया गया है।
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याची अधिवक्ता सौरभ तिवारी का कहना है कि जिलाधिकारी वाराणसी के मनमाने रवैये के कारण पिछले 27 जून को तस्करों के कब्जे से मुक्त कराए गये। 16 में से एक ऊंट 24 जुलाई को मर गया, जबकि दो की हालत खराब है। उक्त मामले में मुख्य न्यायाधीश से तत्काल हस्तक्षेप कर ऊंटों की जीवन की रक्षा करने की मांग की गई है। पत्र याचिका में जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा एसीजेएम के आदेश के विपरीत प्रशासनिक आदेश पारित करने को संवैधानिक संकट बताया गया है।
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अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पिछले सात जुलाई को तस्करों के कब्जे से मुक्त कराए गये सभी 16 ऊंटों की कस्टडी गौ ज्ञान फाउंडेशन को दे दी थी। गौ ज्ञान फाउंडेशन को सभी ऊंटों को उनके अनुकूल वातावरण में सिरोही, राजस्थान स्थित पिपुल फार ऐनिमल पशु आश्रय केन्द्र व हास्पिटल पहुंचाना है।
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जिलाधिकारी वाराणसी को सिरोही, राजस्थान तक परिवहन का व्यवस्था करना है। इसके खर्च की वसूली तस्करी के आरोपियों व जब्त गाड़ी से की जा सकेगी। जिलाधिकारी वाराणसी द्वारा 13 जुलाई को एक आदेश जारी करते हुए कहा गया कि सरकार ने पशुओं के स्थानांतरण के लिए फंड नहीं दिया है। गौ ज्ञान फाउंडेशन को ही सारा परिवहन खर्च वहन करने का निर्देश दे दिया। इसी बीच 24 जुलाई रविवार को पांच वर्ष की ऊंटनी की भी मौत हो गई। जबकि दो अन्य की तबीयत खराब है। पत्र याचिका में जब्त ऊंटों की जान बचाने की मांग की गई है।