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Allahabad High Court : प्रारंभिक जांच न होना एफआईआर रद्द करने का आधार नहीं
Thu, 10 Feb 2022 02:43 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 10 Feb 2022 02:43 AM IST
सार
याची की ओर से कहा गया उसके खिलाफ शिकायतकर्ता सीमा की ओर से झांसी जिले के सीपरी थाने में आईपीसी की धारा 498, 323, 506 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज कराया गया है।
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कोर्ट (प्रतीकात्मक तस्वीर।)
- फोटो : iStock
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रारंभिक जांच न होने के आधार पर एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि जांच करना या न करना जांच अधिकारी का अधिकार क्षेत्र है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा ने आशीष कुमार की याचिका को खारिज करते हुए दिया है।
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याची की ओर से कहा गया उसके खिलाफ शिकायतकर्ता सीमा की ओर से झांसी जिले के सीपरी थाने में आईपीसी की धारा 498, 323, 506 और दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3/4 के तहत मामला दर्ज कराया गया है। आरोप है कि याची ने शिकायतकर्ता से दहेज की मांग की और मारापीटा। मामला सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन है। मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी गई और संज्ञान व समन आदेश भी पारित कर दिया गया।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत कार्यवाही में साक्ष्य के मूल्यांकन की अनुमति नहीं है। कोर्ट का कहना था कि मामले में पीड़िता को याची द्वारा पीटा गया और परेशान किया गया। दहेज की मांग की गई या नहीं, यह तथ्य का सवाल है? जिसे इस कार्यवाही में तय नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस आधार पर याचिका को खारिज कर दिया।
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