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Prayagraj: गैंगस्टर की कार्रवाई में लापरवाही बेकसूर के लिए घातक, अपराधियों के लिए वरदान; कोर्ट ने जताई नाराजगी

Thu, 14 Dec 2023 01:56 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 14 Dec 2023 01:56 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी और पुलिस कप्तानों की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। गोरखपुर में याची के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द के आदेश दिए हैं।

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Allahabad High Court has expressed displeasure over negligence in Gangster Act action
Allahabad High Court - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैंगस्टर एक्ट के तहत की जाने वाली कार्रवाइयों में में जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि लापरवाही निर्दोषों के लिए घातक और खतरनाक अपराधियों के लिए वरदान साबित हो रही है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अरुण कुमार देशवाल की खंडपीठ ने बुधवार को गोरखपुर निवासी सन्नी मिश्रा उर्फ संजय कुमार मिश्रा की याचिका पर फैसला सुनाते हुए की।

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मामला गोरखपुर जिले के राजघाट थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने याची के खिलाफ गैंगस्टर और समाज विरोधी गतिविधियों के निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। याची ने एफआईआर की वैधानिकता को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के खिलाफ पेश किया गया गैंग चार्ट प्रिंटेड प्रोफार्मा पर तैयार किया गया है, जिसमे याची के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र की तिथि अंकित नही की गई है। 
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प्रिंटेड प्रोफार्मा पर पर तैयार किए गए गैंग चार्ट के को अनुमोदित करते वक्त जिलाधिकारी ने न स्वतंत्र विवेक का प्रयोग किया और न ही आरोपों के संबंध में अपनी संतुष्टि खुद दर्ज की, जो गैंगस्टर नियमावली 2021 के नियम 16 और 17 का स्पष्ट उल्लंघन है।
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कोर्ट ने पाया कि वर्तमान मामले में याची के खिलाफ पुलिस की ओर से अनुमोदन के लिए जिलाधिकारी को अग्रसारित गैंग चार्ट प्रिंटेड प्रोफार्मा पर तैयार किया गया है। इसमें जिला एसएसपी और जिलाधिकारी गोरखपुर ने मात्र हस्ताक्षर मात्र बनाए हैं। संतुष्टि खुद के हाथों से दर्ज नही की। पहले से तैयार रिपोर्ट पर रबर की मोहर लगा दी। समाज विरोधी तत्वों को काबू में करने के लिए बनाए गए गैंगस्टर कानून के क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों की इस लापरवाही पर कोर्ट ने हैरानी जताई।
 

कोर्ट ने जारी किए निर्देश
खफा कोर्ट ने गैंगस्टर अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले गैंग चार्ट तैयार करने के संबंध में तीन दिशा निर्देश जारी किए है।

1. जिस समाज विरोधी गतिविधियों के आरोप पत्र के आधार पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है, उसकी तारीख गैंग चार्ट के प्रारूप के कॉलम छ: में अनिवार्य रूप से दर्ज की जाए।

2. गैंग चार्ट को अग्रसारित और अनुमोदित करते समय सक्षम प्राधिकारी अपनी संतुष्टि अपने हस्तलेख में और स्पष्ट शब्दों में दर्ज करें। संतुष्टि दर्ज किए जाने के लिए कोर्ट ने प्रिंटेड या टाइप किए पर रोक लगाई है।

3. आरोपी के विरुद्ध कोर्ट के अवलोकनार्थ ऐसे दस्तावेज और सामग्री उपलब्ध होने चाहिए, जिससे प्रतीत हो कि गैंग चार्ट के अनुमोदन से पूर्व जिलाधिकारी और जिले के पुलिस मुखिया ने संयुक्त रूप से बैठक की और गैंगस्टर अधिनियम के प्रावधानों पर विचार मंथन के बाद गैंग चार्ट तैयार किया गया है।

मुख्य सचिव को निर्देश
हाईकोर्ट ने जारी दिशानिर्देश और इस आदेश की प्रति प्रदेश के मुख्य सचिव को प्रेषित करने का आदेश दिया है। कहा है की मुख्य सचिव प्रदेश के मंडलायुक्त, जिलाधिकारियों और पुलिस प्रमुखों को इन दिशानिर्देशों का कड़ाई से अनुपालन करना सुनिश्चित करवाएं।

कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए याची के विरुद्ध गैंगस्टर एक्ट के तहत दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को यह छूट प्रदान की है कि गैंगस्टर एक्ट के प्रावधानों का कड़ाई से पालन करते हुए दोषी पाए जाने पर याची के विरुद्ध नई फिर दर्ज कर सकते हैं।

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