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इलाहाबाद हाईकोर्ट : सहायक प्रोफेसर की याचिका पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय व भारत सरकार से जवाब तलब

Tue, 25 Apr 2023 10:20 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 25 Apr 2023 10:20 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. रजनीश कुमार पांडेय की सेवा समाप्ति आदेश की वैधता की चुनौती याचिका पर भारत सरकार व इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जवाब तलब किया है।

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Allahabad High Court: Answer sought from Allahabad University and Government of India on the petition of Assis
Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. रजनीश कुमार पांडेय की सेवा समाप्ति आदेश की वैधता की चुनौती याचिका पर भारत सरकार व इलाहाबाद विश्वविद्यालय से जवाब तलब किया है। कोर्ट अब इस मामले में सात जुलाई को सुनवाई करेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजित कुमार ने दिया है।

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याची अधिवक्ता का कहना था कि याची दर्शनशास्त्र विभाग में 19 जनवरी 1992 से 18 जनवरी 1993 तक रिसर्च फेलो रहा। इसके बाद वह 18 जनवरी 97 तक सीनियर रिसर्च फेलो रहा। धारा 31 (3) सी के तहत सेवा नियमित करने की मांग की गई। कार्यकारिणी परिषद ने अर्हता व पद की रिक्ति निर्धारण के लिए कमेटी बनाई। नियमित करने का कार्यकारिणी परिषद ने प्रस्ताव किया। किंतु कुछ नहीं किया गया।

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याची के संबंध में तीन सदस्यीय कमेटी बनी। जिसने याची को सहायक प्रोफेसर पद का वेतन पाने का हकदार माना। जिसका कार्यकारिणी परिषद ने अनुमोदन भी कर दिया। एक अन्य कमेटी की रिपोर्ट पर वेतन रोका गया और याची को कुलसचिव ने कारण बताओ नोटिस दी। जिसका जवाब दाखिल किया गया।

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कुलसचिव ने अपने पहले के आदेश को वापस ले लिया। याचिका में चुनौती दी गई। याची को अंतरिम राहत मिली। कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए पद खाली होने तक विचार करने व याची को आठ फीसदी ब्याज सहित बकाये का भुगतान का निर्देश दिया। जिस पर गठित कमेटी की रिपोर्ट पर सेवा समाप्त कर दिया गया। जिसे चुनौती दी गई है।

 

विश्वविद्यालय के अधिवक्ता का कहना था कि याची की सेवा नियमितीकरण एक याचिका कोर्ट ने केंद्रीय विश्वविद्यालय बनने पर सेवा नियमित करने का कोई नियम न होने के कारण याचिका खारिज कर दी थी। इसलिए याची को सेवा में बने रहने का अधिकार नहीं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विपक्षियों से जवाब मांगा है।

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