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यूपी: विवाह पंजीकरण में आधार कार्ड उम्र निर्धारण का प्रमाण नहीं, हाईकोर्ट ने कहा- जन्मतिथि का सत्यापन जरूरी
Tue, 27 Oct 2026 04:22 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 27 Oct 2026 04:22 PM IST
सार
विवाह पंजीकरण में आधार कार्ड उम्र निर्धारण का प्रमाण नहीं है। जन्मतिथि का सत्यापन जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि संदेह या दस्तावेजों में विसंगति होने पर विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
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Allahabad High Court
- फोटो : एएनआई
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाल विवाह पर अंकुश लगाने के लिए विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में उम्र के सत्यापन को अनिवार्य बनाने का निर्देश जारी किया है।
न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की कोर्ट ने दीपक पाल की आपराधिक अपील के मामले में फैसला सुनाया। कहा कि केवल आधार कार्ड के आधार पर किसी की उम्र प्रमाणित नहीं मानी जा सकती। स्कूल का स्थानांतरण प्रमाणपत्र भी उम्र साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
विवाह पंजीकरण अधिकारी को वर और वधू दोनों की उम्र का विश्वसनीय दस्तावेजों से सत्यापन करना होगा। संदेह या विसंगति होने पर विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
मथुरा निवासी याची ने ट्रायल कोर्ट के दुष्कर्म व पॉक्सो मामले में सुनाई गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना के समय पीड़िता की आयु लगभग 19 वर्ष थी। पीड़िता ने स्वेच्छा से विवाह किया था। विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है।
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न्यायमूर्ति तेज प्रताप तिवारी की कोर्ट ने दीपक पाल की आपराधिक अपील के मामले में फैसला सुनाया। कहा कि केवल आधार कार्ड के आधार पर किसी की उम्र प्रमाणित नहीं मानी जा सकती। स्कूल का स्थानांतरण प्रमाणपत्र भी उम्र साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
विवाह पंजीकरण अधिकारी को वर और वधू दोनों की उम्र का विश्वसनीय दस्तावेजों से सत्यापन करना होगा। संदेह या विसंगति होने पर विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
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मथुरा निवासी याची ने ट्रायल कोर्ट के दुष्कर्म व पॉक्सो मामले में सुनाई गई सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि घटना के समय पीड़िता की आयु लगभग 19 वर्ष थी। पीड़िता ने स्वेच्छा से विवाह किया था। विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र भी जारी किया गया है।
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कोर्ट ने कहा कि विवाह पंजीकरण का उद्देश्य रिकॉर्ड तैयार करना नहीं बल्कि बाल विवाह रोकना, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना और विवाह संबंधी धोखाधड़ी पर अंकुश लगाना है। पंजीकरण अधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि दस्तावेज प्रामाणिक हैं और उनमें दर्ज जन्मतिथि विश्वसनीय है।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि विवाह पंजीकरण के लिए उम्र संबंधी दस्तावेजों की प्राथमिकता तय की जाए। उम्र निर्धारित करने में किशोर न्याय अधिनियम की धारा 94 में निर्धारित क्रम का पालन किया जाए। इसके तहत संबंधित शैक्षिक प्रमाणपत्र और जन्म प्रमाणपत्र को निर्धारित प्राथमिकता के अनुसार देखा जाएगा। विश्वसनीय दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर ही नियमानुसार मेडिकल आयु परीक्षण का सहारा लिया जाएगा।
कोर्ट ने राज्य सरकार को ऑनलाइन विवाह पंजीकरण प्रणाली में आवश्यक बदलाव करने का निर्देश दिया है। पोर्टल पर वर-वधू की जन्मतिथि के सत्यापन और उसके स्रोत का रिकॉर्ड दर्ज करना अनिवार्य होगा।