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केशव बने इलाहाबाद से बीजेपी के तीसरे बड़े नेता
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 09 Apr 2016 02:05 AM IST
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भारतीय जनता पार्टी ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के बाद तमाम विरोधी दलों को चौंका दिया। इससे यूपी में केशव का जहां रुतबा बढ़ा, वहीं इलाहाबाद के परिप्रेक्ष्य में वह अब डा.मुरली मनोहर जोशी और केशरी नाथ त्रिपाठी के बाद बीजेपी के तीसरे बड़े नेता बनकर उभरे हैं।
इलाहाबाद को कांग्रेस की कर्मभूमि कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, वीपी सिंह आदि ने लोकसभा में संगम नगरी का ही प्रतिनिधित्व किया। इन नेताओं के मुकाबले भाजपा की बात करें तो यहां से डा. मुरली मनोहर जोशी और केशरी नाथ त्रिपाठी के अलावा अब तक किसी को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली। डा.जोशी ने जहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई तो केशरी नाथ त्रिपाठी ने भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का दायित्व बखूबी संभाला।
लंबे समय बाद अब भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर इलाहाबाद को एक बार फिर से देश की राजनीति में अहम स्थान दे दिया है। केशव पर जिम्मेदारी होगी कि वह यूपी में पिछड़े वर्ग के मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा वोटरों को भाजपा से जोड़े क्योंकि अकेले यादव वोटरों के सहारे सपा का बेड़ा पार नहीं हो सकता। बसपा पर भी इस जाति के वोटरों का खासा असर है। यूपी में पिछड़े वर्ग से आने वाले कल्याण सिंह और उमा भारती का भी अपनी जाति के लोगों पर खासा असर है। ऐसे में केशव के आने के बाद पिछड़े वर्ग की अन्य जातियां भी बीजेपी की तरफ झुक सकती हैं। अपना दल से गठबंधन होने की वजह से बीजेपी को पटेल बिरादरी का भी विधानसभा चुनाव में फायदा मिल सकता है।
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इलाहाबाद को कांग्रेस की कर्मभूमि कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहले पीएम जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, वीपी सिंह आदि ने लोकसभा में संगम नगरी का ही प्रतिनिधित्व किया। इन नेताओं के मुकाबले भाजपा की बात करें तो यहां से डा. मुरली मनोहर जोशी और केशरी नाथ त्रिपाठी के अलावा अब तक किसी को बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली। डा.जोशी ने जहां भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाई तो केशरी नाथ त्रिपाठी ने भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का दायित्व बखूबी संभाला।
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लंबे समय बाद अब भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर इलाहाबाद को एक बार फिर से देश की राजनीति में अहम स्थान दे दिया है। केशव पर जिम्मेदारी होगी कि वह यूपी में पिछड़े वर्ग के मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा वोटरों को भाजपा से जोड़े क्योंकि अकेले यादव वोटरों के सहारे सपा का बेड़ा पार नहीं हो सकता। बसपा पर भी इस जाति के वोटरों का खासा असर है। यूपी में पिछड़े वर्ग से आने वाले कल्याण सिंह और उमा भारती का भी अपनी जाति के लोगों पर खासा असर है। ऐसे में केशव के आने के बाद पिछड़े वर्ग की अन्य जातियां भी बीजेपी की तरफ झुक सकती हैं। अपना दल से गठबंधन होने की वजह से बीजेपी को पटेल बिरादरी का भी विधानसभा चुनाव में फायदा मिल सकता है।
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