Prayagraj:जेएनयू के छात्रों की गिरफ्तारी के खिलाफ आइसा ने निकाला जुलूस, यूजीसी रेगुलेशन एक्ट लागू करने की मांग
ऑल इंडिया स्टूडेंटस एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने देशव्यापी प्रतिवाद के तहत जेएनयू के 14 छात्रों को जेल भेजे जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन दर्ज किया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
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ऑल इंडिया स्टूडेंटस एसोसिएशन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) ने देशव्यापी प्रतिवाद के तहत जेएनयू के 14 छात्रों को जेल भेजे जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन दर्ज किया। राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा। यूजीसी रेगुलेशन पर रोक के खिलाफ जेएनयू छात्रसंघ और छात्र आंदोलनरत हैं। 22-23 फरवरी की रात में जेएनयू प्रशासन व सत्ता समर्थित गुंडों द्वारा धरना पर बैठे छात्रों पर हमला किया गया। यूजीसी रेगुलेशन 2026 को लेकर जेएनयू कुलपति की विवादास्पद टिप्पणी व छात्रों के लोकतांत्रिक ढंग से जारी आंदोलन को लेकर जेएनयू प्रशासन के गैर जवाबदेह रवैए से स्पष्ट है कि वह इन सवालों के हल करने को लेकर संवेदनशील व गंभीर नहीं है। इसके बाद ही 26 फरवरी को शिक्षा मंत्रालय से इन सवालों को हल करने के लिए आग्रह करने के लिए शांतिपूर्ण कार्यक्रम घोषित किया था।
पुलिस ने जेएनयू मेन गेट पर ताला लगा दिया गया और बैरिकेडिंग कर छात्रों को गेट पर जबरन रोक दिया गया। यहां तक कि शिक्षा मंत्री से वार्ता कराने तक का प्रयास नहीं किया गया। उल्टे छात्रों के साथ बर्बरता की गई और छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसमें से जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष अदिति, उपाध्यक्ष गोपिका, जॉइंट सेक्रेटरी दानिश , पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष नीतीश कुमार व आइसा राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत 14 छात्रों को तिहाड़ जेल भेज दिया गया। इसके खिलाफ जिलाधिकारी कार्यकाल पर प्रतिवाद करते हुए सभा की गई। आइसा के प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने कहा कि सामाजिक न्याय और अधिकार की बात करने वाले लोगों पर मौजूदा सरकार बुलडोजर चला रही है।
यूजीसी की बात करने पर की जा रही है बर्बरता
इसलिए यूजीसी रेगुलेशन को रोहित एक्ट के तर्ज पर लागू करने वाले के साथ बर्बरता करती है और उन्हें जेल भेज रही है। इसके खिलाफ पूरे देश में पुरजोर विरोध हो रहा है। सरकार के बुलडोजर नीति को ध्वस्त किया जाएगा। सभा में इंकलाबी नौजवान सभा के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य ने कहा कि शिक्षा और रोजगार दे सकने में मोदी सरकार नाकाम साबित हुई है और जब नौजवान इस पर सवाल करता है तो अपने अधिकार को मांग करता है तो पुलिस दमन करती है। मानवेंद्र ने कहा कि संविधान और सामाजिक न्याय की बात करने पर जेल भेजा जा रहा है जबकि जो असली अपराधी वह खुलेआम घूम रहे हैं।
भाजपा की सरकार इस देश में संविधान को खत्म कर मनुस्मृति का शासन लागू करना चाहती है और इसीलिए यूजीसी का रेगुलेशन उसके विचारों के हिसाब से उचित नहीं बैठ रहा है। इसके खिलाफ हम नौजवानों की लड़ाई जारी रहेगी। सभा में शामिल एडवोकेट धीरेंद्र यादव ने कहा कि इस सरकार में कानून का शासन नहीं बल्कि ताकतवर लोगों का मनमानापन चल रहा है। कानून के हिसाब से न्याय देने की बजाय जाति और धर्म देखकर के लोगों के साथ व्यवहार किया जा रहा है असवैधानिक रूप से बुल्डोजर चलाया जा रहा है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। संचालन आइसा प्रदेश सचिव शशांक ने किया। कार्यक्रम में साक्षी, विपुल, पृथ्वीराज, हिमांशु, सुजीत, मंटू, आयुष, रुद्रांश, रौशन, शशिभूषण, आर्यन, हर्षित, नीरज, अमित आदि मौजूद रहे।
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