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Prayagraj : सिंपोजियम में छा गया एआई आधारित एंटी ड्रोन सिस्टम, देश का पहला स्वदेशी रक्षा उपकरण

Wed, 06 May 2026 07:47 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 06 May 2026 07:47 PM IST
सार

संगमनगरी में आयोजित नार्थ टेक सिंपोजियम-2026 रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का गवाह बन रहा है। युद्ध के बदलते स्वरूप और ड्रोन के बढ़ते खतरों के बीच, रक्षा क्षेत्र की एक कंपनी ने स्वदेशी, एआई आधारित इंटीग्रेटेड एंटी-ड्रोन सिस्टम लॉन्च किया है।

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AI-based anti-drone system, the country's first indigenous defense equipment, dominated the symposium.
एंटी ड्रोन सिस्टम। सांकेतिक चित्र - फोटो : एआई।

विस्तार

संगमनगरी में आयोजित नार्थ टेक सिंपोजियम-2026 रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का गवाह बन रहा है। युद्ध के बदलते स्वरूप और ड्रोन के बढ़ते खतरों के बीच, रक्षा क्षेत्र की एक कंपनी ने स्वदेशी, एआई आधारित इंटीग्रेटेड एंटी-ड्रोन सिस्टम लॉन्च किया है। कंपनी का दावा है कि यह भारत का पहला स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम है। यह सिस्टम न केवल दुश्मनों के ड्रोन को पहचानने में सक्षम है, बल्कि उन्हें पलक झपकते ही तबाह करने की भी क्षमता रखता है। हाल के वैश्विक संघर्षों, जैसे ऑपरेशन सिंदूर और अन्य युद्धों ने यह साबित कर दिया है कि कम लागत वाले ड्रोन और उनका झुंड पारंपरिक वायु रक्षा प्रणाली के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है।

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जेन टेक्नोलॉजीज का यह नया प्लेटफॉर्म इसी चुनौती का सटीक जवाब है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी बहुआयामी मारक क्षमता है, जो सॉफ्ट किल (जैमिंग) और हार्ड किल (सीधे प्रहार) दोनों तरह के समाधान मुहैया कराती है। इसमें लगा उच्च-संवेदनशीलता वाला स्वदेशी रडार 20 किलोमीटर की दूरी से ही छोटे से छोटे ड्रोन की आहट पहचान लेता है। खास बात यह है कि यह सिस्टम एक साथ 100 से अधिक ड्रोन को ट्रैक कर सकता है। इसकी फ्रीक्वेंसी रेंज इतनी विस्तृत है कि यह किसी भी तरह के ड्रोन संचार को बाधित कर सकता है। कमांड सेंटर में लगा उन्नत एल्गोरिदम खतरों का सटीक वर्गीकरण कर सैनिकों को त्वरित निर्णय लेने में मदद करता है। 

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ऊंचाइयों का उस्ताद ड्रोन, युद्धक्षेत्र में बदलेगा खेल


नार्थ टेक सिंपोजियम में एक ऐसा अत्याधुनिक ड्रोन आकर्षण का केंद्र बना, जिसने पारंपरिक मल्टी-रोटर ड्रोन को चुनौती दी। हेलिकॉप्टर आधारित डिजाइन पर तैयार यह ड्रोन वैरिएबल पिच तकनीक से लैस है, जो इसे ऊंचाई पर भी बेहतर दक्षता देता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य ड्रोन में ब्लेड का एंगल (एंगल ऑफ अटैक) स्थिर रहता है जिससे अधिक ऊंचाई पर उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इस ड्रोन में ब्लेड का एंगल जरूरत के अनुसार बदलता रहता है जिससे यह कठिन परिस्थितियों में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकता है।

तकनीकी क्षमताओं की बात करें तो यह ड्रोन औसत समुद्र तल से 5000 मीटर की ऊंचाई से लॉन्च किया जा सकता है और 500 मीटर तक ऑपरेट कर सकता है। इसकी 50 किलोग्राम तक की पेलोड उठाने की क्षमता है। यही नहीं, इसमें पेलोड ड्राॅप मैकेनिज्म भी दिया गया है, जिससे बिना लैंड किए जरूरी सामग्री को निर्धारित स्थान पर गिराया जा सकता है।

किसी भी तकनीकी खराबी की स्थिति में इसमें लगा पैराशूट खुद ही खुल जाता है, जिससे ड्रोन सुरक्षित रूप से जमीन पर उतर सके। हालांकि अभी इसे भारतीय सेना में शामिल नहीं किया गया है, लेकिन डेवलपर्स के अनुसार 10,000 फीट की ऊंचाई पर इसका सफल परीक्षण हो चुका है। सेंट्रल कमांड के साथ इसका डेमो भी किया जा चुका है और आने वाले महीनों में इसकी मांग सामने आने की संभावना है। इसका उपयोग लॉजिस्टिक, निगरानी और आपातकालीन सप्लाई जैसे कार्यों में हो सकता है।

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