Agriculture News : मानसून की आहट के बीच किसानों ने शुरू की धान रोपाई, सीमावर्ती किसानों को नहर चलने का इंतजार
इलाके में सोमवार सुबह हुई बारिश के बीच मानसून की आहट के बाद छोटे रकबे वाले किसानों की बैचेनी बढ़ गई हैं। धान रोपाई के लिए नहर में पानी न आने से छोटे किसान मानसून के झमाझम बारिश के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे हैं।
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चायल तहसील में सोमवार को मानसून के आहट के बीच किसानों ने धान की रोपाई शुरू कर दी है। इलाके के किसान खेतों को तैयार करने में जुट गए हैं। हालांकि नहर में पानी न आने से लघु और सीमांत किसान अभी भी जमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं। मजदूरों की किल्लत से छोटे किसान हल्की बारिश के दौरान नलकूप से पानी भर कर बड़े किसानों से पहले ही अपने खेतों में धान की रोपाई करवा रहे हैं।
इलाके में सोमवार सुबह हुई बारिश के बीच मानसून की आहट के बाद छोटे रकबे वाले किसानों की बैचेनी बढ़ गई हैं। धान रोपाई के लिए नहर में पानी न आने से छोटे किसान मानसून के झमाझम बारिश के इंतजार में टकटकी लगाए बैठे हैं। आसमान में बादलों को देख और हल्की बरसात होने से किसानों को मानसून आने का अंदेशा लग रहा है। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। किसान धान की रोपाई की तैयारी करने लगे हैं।
तेज धूप और मजदूरों की कमी के चलते छोटे किसान पहले ही अपने खेतों की तैयारी कर धान की रोपाई करवा लेना चाहते हैं। अपने खेत में धान की रोपाई करवा रहे चंदूपुर अमरायन के किसान शिवलखन मिश्रा का कहना है कि बरसात होने पर बड़े किसानों के आगे धान रोपाई के लिए मजदूरों की किल्लत हो जाती है। ज्यादातर जून के महीने के दूसरे पखवाड़े तक किसान धान की रोपाई शुरू कर देते हैं।
लेकिन बरसात न होने से धान रोपाई अभी नलकूप पर निर्भर हैं। जिन किसानों की नर्सरी तैयार हो चुकी है वह मानसून का इंतजार छोड़ नलकूप से खेतों में पानी भरवाकर रोपाई शुरू कर दी है। जिनके खेत सरकारी बड़े नलकूप के पास है वह अपने खेतों को तैयार करने में जुटे हुए हैं। खेतों में रोपाई के लिए तैयार धान की नर्सरी से किसान खरपतवार निकालने में जुटे हैं।
रोपाई की मजदूरी 1800 से 2200 रुपया प्रति बीघा
रोपाई के लिए मजदूरों की किल्लत हो रही है। मजदूरों ने अपने दाम भी बढ़ा दिए हैं। मजदूर धान की रोपाई की मजदूरी एक हजार आठ सौ रुपये से दो हजार दो सौ रुपये प्रति बीघा के हिसाब से ले रहे हैं। इससे किसानों को काफी जेब ढीली करनी पड़ रही है। बड़े काश्तकारों को रोपाई कराने में ही काफी खर्च का सामना करना पड़ रहा है। मानसून की बारिश को देखते हुए रोपाई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है।