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सवा दो महीने बाद बंसल के चैंबर से मिली बुलेट
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 21 Mar 2017 02:15 AM IST
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डा. बंसल की हत्या के सवा दो महीने बाद उनके चैंबर से बुलेट बरामद की गई। बरामदगी फील्ड यूनिट या पुलिस ने नहीं बल्कि चैंबर में साफ सफाई करने वालों ने की। हत्याकांड के बाद फील्ड यूनिट और पुलिस ने कई बार वहां बेहद ‘बारीकी’ और ‘संजीदगी’ से जांच की थी लेकिन अस्पताल के सफाईकर्मी उनसे ज्यादा संजीदा निकले। बहरहाल बुलेट पुलिस को सौंप दी गई है। वह इस बात का पता लगाने में जुटी है वह किस पिस्टल की है।
डा. एके बंसल की हत्या 12 जनवरी की शाम जीवन ज्योति अस्पताल स्थित उनके चैंबर की गई थी। जांच में पाया गया था कि उन्हें .30 और .32 की दो पिस्टल से चार गोलियां मारी गई थीं। पुलिस ने मौके से चार खोखे बरामद किए थे। चैंबर से एक बुलेट भी मिली थी। पोस्टमार्टम के दौरान पता चला था कि एक गोली उनके शरीर में ही है। बाकी दो बुलेट के बारे में कुछ पता नहीं था। फील्ड यूनिट की ‘एडवांस और साइंटिफिक’ टीम ने एक नहीं कई बार चैंबर में खोजबीन और जांच की थी लेकिन उन्हें वहां से कुछ नहीं मिल पाया था। सोमवार को अस्पताल कर्मियों ने डा. बंसल के चैंबर की एक बार फिर साफ सफाई शुरू की तो एक बुलेट और मिल गई। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। एसओ कीडगंज संतोष मलिक के पहुंचने पर उन्हें बुलेट सौंप दिया गया। एसओ का कहना है कि बुलेट का स्वरूप बिगड़ा हुआ है। देखकर पता नहीं लगाया जा सकता कि वह किस पिस्टल की है। इसकी जांच की जा रही है। अब तक तीन बुलेट बरामद हो चुके हैं। एक अभी भी नहीं मिली है।
बंसल हत्याकांड को सवा दो महीने हो गए हैं लेकिन विवेचना में आज भी पुलिस वहीं खड़ी है जहां 12 जनवरी को थी। सवा दो महीने बीतने के बाद भी एक सुराग तक नहीं खोज पाई है। एसटीएफ और जिला पुलिस के साथ साथ एसएसपी और डीआईजी दोनों की क्राइम ब्रांच टीमें लगी हैं लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। इस केस में पुलिस ने किस कदर लापरवाही बरती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल के छोटे मुलाजिमों के अलावा शक के घेरे में आए किसी भी बड़े शख्स से पूछताछ तक नहीं कर पाई है। विवेचना जहां से शुरू हुई थी, वहीं अटकी है।
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डा. एके बंसल की हत्या 12 जनवरी की शाम जीवन ज्योति अस्पताल स्थित उनके चैंबर की गई थी। जांच में पाया गया था कि उन्हें .30 और .32 की दो पिस्टल से चार गोलियां मारी गई थीं। पुलिस ने मौके से चार खोखे बरामद किए थे। चैंबर से एक बुलेट भी मिली थी। पोस्टमार्टम के दौरान पता चला था कि एक गोली उनके शरीर में ही है। बाकी दो बुलेट के बारे में कुछ पता नहीं था। फील्ड यूनिट की ‘एडवांस और साइंटिफिक’ टीम ने एक नहीं कई बार चैंबर में खोजबीन और जांच की थी लेकिन उन्हें वहां से कुछ नहीं मिल पाया था। सोमवार को अस्पताल कर्मियों ने डा. बंसल के चैंबर की एक बार फिर साफ सफाई शुरू की तो एक बुलेट और मिल गई। इसकी सूचना पुलिस को दी गई। एसओ कीडगंज संतोष मलिक के पहुंचने पर उन्हें बुलेट सौंप दिया गया। एसओ का कहना है कि बुलेट का स्वरूप बिगड़ा हुआ है। देखकर पता नहीं लगाया जा सकता कि वह किस पिस्टल की है। इसकी जांच की जा रही है। अब तक तीन बुलेट बरामद हो चुके हैं। एक अभी भी नहीं मिली है।
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बंसल हत्याकांड को सवा दो महीने हो गए हैं लेकिन विवेचना में आज भी पुलिस वहीं खड़ी है जहां 12 जनवरी को थी। सवा दो महीने बीतने के बाद भी एक सुराग तक नहीं खोज पाई है। एसटीएफ और जिला पुलिस के साथ साथ एसएसपी और डीआईजी दोनों की क्राइम ब्रांच टीमें लगी हैं लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। इस केस में पुलिस ने किस कदर लापरवाही बरती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अस्पताल के छोटे मुलाजिमों के अलावा शक के घेरे में आए किसी भी बड़े शख्स से पूछताछ तक नहीं कर पाई है। विवेचना जहां से शुरू हुई थी, वहीं अटकी है।
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