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एनसीजेडसीसी निदेशक का कार्यभार छीने जाने के बाद ग्रोवर बोले- हटाना था तो हटा देते, बेआबरू क्यों किया

Wed, 20 Jan 2021 08:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 20 Jan 2021 08:25 PM IST
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After being stripped of the charge of NCZCC director, Grover said - if he had to be removed, then he would have removed, why did he disrespect
prayagraj news : इंद्रजीत सिंह ग्रोवर (एनसीजेडसीसी)। - फोटो : prayagraj
एनसीजेडसीसी निदेशक का कार्यभार छीने जाने के दो दिन बाद बुधवार को इंद्रजीत सिंह ग्रोवर ने सार्वजनिक तौर पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपने सेवा विस्तार की एक तरफ दुहाई दी, तो दूसरी ओर राजभवन की ओर से हटाए जाने पर मलाल भी जाहिर किया। उनका यह भी कहना था कि संस्कृति मंत्रालय और राजभवन के बीच उनको अंधेरे में रखा गया। तीन वर्ष के अपने कार्यकाल की उन्होंने खुद तारीफ भी की और कहा कि अच्छा काम करने का यही सिला मिला कि दफ्तर में अनुपस्थित होने के बाद बिना मौका दिए एक तरफा चार्ज ले लिया गया। जबकि, हटाना ही था तब भी वह सम्मानपूर्वक विदाई के हकदार थे।
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दोपहर करीब दो बजे सिविल लाइंस के प्रेस रिपोर्टर क्लब में पत्रकारों से बातचीत में ग्रोवर ने खुद को हटाए जाने को लेकर कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उन्हें पद का कोई मोह नहीं है, लेकिन महीने भर अंधेरे में रखे जाने की पीड़ा जरूर है। ग्रोवर ने कहा कि मंत्रालय उन्हें पद मुक्त करने का आदेश जारी कर दे तो वह उसे सहर्ष स्वीकार कर लेंगे। वह सेवा विस्तार का पत्र दिखाकर खुद को एनसीजेडसीसी का निदेशक बताते रहे। उन्होंने इस संबंध में लिखित नोट भी निदेशक की हैसियत से ही जारी किया।
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उनका कहना था 17 दिसंबर 2020 से 17 दिसंबर 2022 तक संस्कृति मंत्रालय की ओर से जब सेवा विस्तार दे दिया गया, तब राजभवन की ओर से उनको हटाया क्यों गया? ग्रोवर ने कहा कि निदेशक वह राज्यपाल और डीएम दोनों का आदर करते हैं, लेकिन जब नए मेमोरंडम के हिसाब के निदेशक की नियुक्त करने और हटाने का अधिकार राज्यपाल के पास नहीं है तो किस आधार पर उन्हें हटाया गया। उन्होंने कार्यभार लिए जाने केबाद निदेशक कक्ष को सील किए जाने पर भी आपत्ति जताई। कहा कि निदेशक कक्ष को सील कर दिया गया, जिसमें उनके व्यक्तिगत डाटा और पेटिंग्स भी हैं। उन्हें उचित समय दिए बिना ही कक्ष को सील कर दिया गया।
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एकल हस्ताक्षर से डीएम के चार्ज लेने पर उठाए सवाल

प्रयागराज। निदेशक पद से हटाए गए इंद्रजीत सिंह ग्रोवर ने चार्ज की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पद ग्रहण करने और छोड़ने की औपचारिकताएं होती हैं। वह औपचारिकता पूरी नहीं कराई गई। उनकी अनुपस्थिति में डीएम ने एकल हस्ताक्षर से चार्ज कैसे ग्रहण कर लिया, सोचने वाली बात है। जबकि, कहा जा रहा है कि चार्ज हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कराने सूचना डीएम ने ग्रोवर को अपने मातहतों केजरिए भिजवाई थी, लेकिन उन्होंने खुद को निदेशक बताते हुए कार्यभार सौंपने से इंकार कर दिया था। डीएम के आने पर वह कक्ष छोड़कर कहीं चले गए थे।

ग्रोवर की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल

प्रयागराज। एनसीजेडसीसी निदेशक प्रकरण पर संस्कृति मंत्रालय और राजभवन को लेकर कुछ वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। फेसबुक पर वायरल उनकी तीन वीडियो क्लिप में वह बार-बार राजभवन को इस मामले में घेरते नजर आ रहे हैं।

 
  • लोकतंत्र में अपनी बात रखने का सबको अधिकार है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद राजभवन के आदेश पर डीएम ने निदेशक का कार्यभार ग्रहण किया है। ग्रोवर को राजभवन और संस्कृति मंत्रालय को लेकर कोई आपत्ति है, तो इस पर कुछ कहा नहीं जा सकता। -संत कुमार, प्रभारी अधिकारी एनसीजेडसीसी। 
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