{"_id":"5a4e81634f1c1b36198b4dc9","slug":"administration-tells-the-land-of-astrology","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रशासन बताए किसे दी गई ज्योतिष्पीठ की जमीन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रशासन बताए किसे दी गई ज्योतिष्पीठ की जमीन
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 Jan 2018 01:09 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश सरकार जानबूझकर शंकराचार्यों का अपमान कर रही है। अदालत ने इस तरह का कोई निर्देश नहीं दिया है, जिसके आधार पर माघ मेले में मुझे भूमि नहीं आवंटित की गई। ज्योतिष्पीठ आज भी रिक्त नहीं है, ऐसे में मेला प्रशासन बताए कि इसके नाम पर किसे भूमि आवंटित की गई है। बृहस्पतिवार को मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने दो टूक कहा कि यह सरकार की मंशा पर सवाल उठाता है। इसके बावजूद त्रिवेणी स्नान और सनातन धर्म के संरक्षण के लिए मैं माघ मेले में आऊंगा।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने शंकराचार्य मुद्दे पर भी राय रखी। कहा, जहां तक दंडी समाज सन्यासी बनाने की बात कह रहा है, तो कोई दंडी संन्यासी चुनकर लाएं, उसका मैं अभिषेक करूंगा लेकिन इससे पहले शास्त्रार्थ में उस मानक पर खरा उतरना होगा। शंकराचार्य के लिए महिला संत की ओर से आवेदन के सवाल पर बोले, महिलाओं के लिए संन्यास नहीं है। आदि शंकराचार्य ने कहा था, पतिव्रता धर्म ही उनके लिए श्रेष्ठ है। कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गंगा के नाम पर सरकार ने कुछ भी नहीं किया। तीन महिलाओं का हक है, उसे मिलना ही चाहिए। देश में सभी के लिए एक जैसा कानून हो। हालांकि उन्होंने यह कहते हुए कि महिलाओं को बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं माना जाना चाहिए, हिन्दुओं के लिए अधिक बच्चे पैदा करने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज किया।
परमहंसी से कटनी होते हुए स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती रात पौने दस बजे मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। शिष्य और व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी की अगुवाई में संतों-महंतों ने घूरपुर में उनका स्वागत किया। वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की अगुवाई में संतों, महंतों, तीर्थपुरोहितों ने भी माल्यार्पण किया, आरती उतारी।
विज्ञापन
विज्ञापन
‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने शंकराचार्य मुद्दे पर भी राय रखी। कहा, जहां तक दंडी समाज सन्यासी बनाने की बात कह रहा है, तो कोई दंडी संन्यासी चुनकर लाएं, उसका मैं अभिषेक करूंगा लेकिन इससे पहले शास्त्रार्थ में उस मानक पर खरा उतरना होगा। शंकराचार्य के लिए महिला संत की ओर से आवेदन के सवाल पर बोले, महिलाओं के लिए संन्यास नहीं है। आदि शंकराचार्य ने कहा था, पतिव्रता धर्म ही उनके लिए श्रेष्ठ है। कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि गंगा के नाम पर सरकार ने कुछ भी नहीं किया। तीन महिलाओं का हक है, उसे मिलना ही चाहिए। देश में सभी के लिए एक जैसा कानून हो। हालांकि उन्होंने यह कहते हुए कि महिलाओं को बच्चा पैदा करने की मशीन नहीं माना जाना चाहिए, हिन्दुओं के लिए अधिक बच्चे पैदा करने के प्रस्ताव को सिरे से खारिज किया।
विज्ञापन
परमहंसी से कटनी होते हुए स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती रात पौने दस बजे मनकामेश्वर मंदिर पहुंचे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। शिष्य और व्यवस्थापक स्वामी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी की अगुवाई में संतों-महंतों ने घूरपुर में उनका स्वागत किया। वहीं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की अगुवाई में संतों, महंतों, तीर्थपुरोहितों ने भी माल्यार्पण किया, आरती उतारी।
विज्ञापन