Mobile Addiction : मोबाइल फोन का पहले नशा, फिर नफरत...यही है स्क्रीन डिस्फोरिया, अस्पताल में आ रहे कई मामले
कॉल्विन हॉस्पिटल स्थित मन कक्ष में स्क्रीन डिस्फोरिया के शिकार सभी 10 मामले युवाओं से ही जुड़े हैं। मनोचिकित्सक के साथ काउंसलिंग में मरीजों ने बताया है कि पहले उन्हें मोबाइल फोन की स्क्रीन देखने की लत थी, लेकिन अब बहुत उलझन होती है।
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केस-एक : तेलियरगंज निवासी 19 वर्षीय छात्र को फोन की घंटी सुनाई देते ही उलझन होने लगती है। इससे पूरा घर परेशान था। दो महीने पहले उसे कॉल्विन के मन कक्ष में लाया गया। काउंसलिंग में पता चला कि वह स्क्रीन डिस्फोरिया का शिकार है। छात्र ने बताया कि उसने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक चीजें देखी थीं। तभी से फोन से नफरत हो गई है।
केस-दो : नैनी निवासी 18 वर्षीय छात्र को दिन भर मोबाइल फोन पर बने रहने की आदत थी। इससे पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा था। इस कारण घरवालों से लेकर अध्यापक तक उसे खरी-खोटी सुनाते थे। लोगों के ताने सुनने के बाद उसे मोबाइल शब्द से ही उलझन होने लगी। इतना ही नहीं उसने टीवी और कंप्यूटर की स्क्रीन तक देखना बंद कर दिया।
केस-तीन : झलवा निवासी 21 वर्षीय बीटेक की छात्रा को पूरे दिन फोन चलाने की आदत थी। उसकी आंखों की रोशनी कमजोर होने लगी। उसे लगा कि यह सब फोन की स्क्रीन देखने की वजह से हुआ है। इससे उसकी रोशनी भी जा सकती है। दिन-रात यही सोचते हुए उसने खुद को कमरे में कैद कर लिया। डरी-सहमी से रहने लगी। अब इलाज चल रहा है।
केस-चार : झूंसी निवासी 32 वर्षीय प्राइमरी शिक्षिका को पूरे दिन मोबाइल फोन का इस्तमाल करने की आदत थी। इसकी वजह से उसकी शादी तय होने में भी परेशानी आ रही थी। परिजन भी उसे दिन-रात कोसते थे। धीरे-धीरे उसे एहसास होने लगा कि वह पूरी तरह से अकेली पड़ गई है। उसकी आंखों से नींद उड़ गई। उसे मोबाइल से नफरत हो गई।
युवाओं से ही जुड़े हैं सभी मामले
युवाओं में मोबाइल फोन का नशा तो चहुंओर खूब जोर मारता दिखाई देता है, लेकिन नया रोग फोन से चिढ़न का है। .लगातार फोन देखने वालों को लगता है कि उनकी कई गंभीर समस्याओं की जड़ यही फोन है तो वे इससे घृणा करने लगते हैं। फोन की बात कोई करे तो भड़क जाते हैं। ऐसे 10 मामले मनोचिकित्सकों के पास पहुंचे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक ऐसे लोग स्क्रीन डिस्फोरिया के शिकार हैं।
कॉल्विन हॉस्पिटल स्थित मन कक्ष में स्क्रीन डिस्फोरिया के शिकार सभी 10 मामले युवाओं से ही जुड़े हैं। मनोचिकित्सक के साथ काउंसलिंग में मरीजों ने बताया है कि पहले उन्हें मोबाइल फोन की स्क्रीन देखने की लत थी, लेकिन अब बहुत उलझन होती है। सिर चकराने लगता है तो कभी आंसू गिरने लगते हैं। कुछ मामले तो उल्टी आने के भी सामने आए हैं।
हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक डॉ. राकेश पासवान बताते हैं कि यह रोग मोबाइल फोन की लत के एकदम विपरीत है। इसमें युवाओं को मोबाइल से उलझन होने लगती है। इसके पीछे की वजह मोबाइल फोन को लेकर समाज और परिवार की टीका-टिप्पणियां होती हैं। कई बार बच्चे कुछ ऐसा आपत्तिजनक देख लेते हैं, जिसके कारण उनका बर्ताव बदल जाता है। इनका इलाज करते समय यह ख्याल भी रखना होता है कि कहीं वह फिर से फोन के लती न बन जाएं।