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अपनी खुन्नस में टूट गई एबीवीपी

Mon, 16 Oct 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Mon, 16 Oct 2017 01:49 AM IST
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ABVP broke into its bliss
इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी को अध्यक्ष का पद गंवाना पड़ा। दअरसल, एबीवीप आपसी खुन्नस में टूट गई। अध्यक्ष पद के लिए चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे मृत्युंजय राव परमार ने भी एबीवीपी से टिकट के लिए दावा किया था लेकिन बीएचयू की घटना के बाद एबीवीपी ने महिला प्रत्याशी पर भरोसा जताया और प्रियंका सिंह को टिकट दे दिया लेकिन प्रियंका को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। अब चर्चा है कि इविवि में एबीवीपी की इस हार के लिए कुछ पदाधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
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अध्यक्ष पद के प्रत्याशी मृत्युंजय राव पर परमार को 2674 वोट मिले और प्रियंका सिंह को 1588 वोट मिले। वहीं, अध्यक्ष बने अवनीश को 3226 मत प्राप्त हुए। अगर मृत्युंजय और प्रियंका को मिले वोट जोड़ लिए जाएं तो मतों की संख्या चार पार कर जाती है। एबीवीपी ने भले ही मृत्युंजय को प्रत्याशी नहीं बनाया लेकिन उनके चुनाव प्रचार भाजपा के कई बड़े नेता लगातार नजर आए। मृत्युंजय के पिता और उनकी मां दोनों ही संघ से सीधे जुड़े हैं, सो चुनाव के दौरान संघ का एक धड़ा भी मृत्युंजय को सीधे सपोर्ट कर रहा था। एबीवीपी में इस आपसी खींचतान का असर चुनाव परिणाम पर साफ नजर आया। भाजपा के कुछ नेताओं का कहना है कि एबीवीपी अगर मृत्युंजय को अपना प्रत्याशी बनाती तो अध्यक्ष पद की कुर्सी संगठन के पास ही रहती है।
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कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई को इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में तगड़ा झटका लगा है। महामंत्री पद को छोड़ दें तो कहीं भी एनएसयूआई के प्रत्याशी दूसरे नंबर तक नहीं पहुंच सके। एनएसयूआई की इस हार के लिए नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए संगठन के राष्ट्रीय सचिव विवेकानंद पाठक ने इस्तीफ दे दिया हैं।
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अध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई ने सूरज कुमार दुबे को प्रत्याशी बनाया था। सूरज भी पहले एबीपीवी से टिकट के दावेदारों में शामिल थे। चुनाव में सूरज 667 मतों के साथ चौथे स्थान पर रहे। उपाध्यक्ष पद के लिए एनएसयूआई ने किवजय सिंह बघेल को चुनाव मैदान में उतारा था, जिन्हें 1661 मतों के साथ तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा। महामंत्री पद के लिए एनएसयूआई ने अर्पित सिंह को प्रत्याशी बनाया था। ताराचंद हॉस्टल के बाहर बसपा नेता राजेश यादव की हत्या के बाद अर्पित का नाम तेजी से चर्चा में आया था। चुनाव में अर्पित ने निर्भय कुमार द्विवेदी को कड़ी टक्कर दी लेकिन अंत में 61 मतों से अर्पित को हार का मुंह देखना पड़ा। संयुक्त मंत्री पद के लिए एनएसयूआई से प्रत्यूष तिवारी चुनाव मैदान में थे लेकिन उन्हें चौथे स्थान से ही संतोष करना पड़ा। वहीं, सांस्कृतिक सचिव पद एनएसयूआई के सुमंत चौहान 686 मतों के साथ पांचवें नंबर पर रहे।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के दौरान समाजवादी छात्रसभा में महामंत्री के पद पर रार न होती तो छात्रसभा इस चुनाव में क्लीन स्वीप भी कर सकती है। अंत में महामंत्री पद का प्रत्याशी बदल दिया गया और पहला प्रत्याशी बागी हो गया। वोट बंटे गए और छात्रसभा को इसका नुकसान उठाना पड़ा। समाजवादी छात्र सभा ने महामंत्री पद के लिए पहले विकास यादव को प्रत्याशी बनाया था लेकिन अंत में अचानक प्रत्याशी बदल दिया गया और छात्रसभा ने महामंत्री पद के लिए रोहित कुमार यादव को प्रत्याशी घोषित कर दिया। रोहित 1949 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे जबकि चुनाव मैदान में डटे रहे विकास यादव को केवल 388 वोट मिले।

दोनों के मतों को जोड़ लिया तो कुल वोटों की संख्या 2337 होती है जबकि महामंत्री पद पर विजयी रहे निर्भय कुमा द्विवेदी को 2132 वोट मिले। आंकड़े बता रहे हैं कि समाजवादी छात्रसभा में महामंत्री पद को लेकर रार नहीं होती तो क्लीन स्वीप के आसार भी होते। हालांकि छात्रसभा को इस चुनाव में जो मिला, वह भी ऐतिहासिक है। पहली बार छात्रसभा ने अध्यक्ष समेत चार पदों पर कब्जा किया। इससे पहले छात्रसभा के पास अधिकतम तीन पद ही रहे। छात्रसभा ने इस बार अध्यक्ष पद की कुर्सी भी एबीवीपी से वापस ले ली। 2015 और 2014 में अध्यक्ष पद छात्रसभा के पास ही था। छात्रसभा की इस जीत में जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता की भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्वविद्यालय में सात साल बाद 2012 में छात्रसंघ चुनाव की बहाली हुई थी। तब से अब तक अखिलेश गुप्ता के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा गया। इस दौरान पहली बार 2014 में छात्रसभा के समर्थन से ऋचा सिंह पहली महिला निर्वाचन अध्यक्ष बनीं और 2016 के चुनाव में पहली बार अदील हमजा के रूप में कोई मुस्लिम छात्र उपाध्यक्ष बना।

छात्रसंघ चुनाव में संयुक्त सचिव के पद पर भी लड़ाई रोमांचक थी। इस पद पर 2051 मतों के साथ भरत सिंह निर्वाचित घोषित किए गए। दूसरे नंबर पर रहे आदर्श शुक्ला 1421 वोट मिले। विश्वविद्यालय प्रशासन ने तो आदर्श का नामांकन ही निरस्त कर दिया था लेकिन आदर्श की आपत्ति पर जब विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी गलती का एहसास हुआ तो नामांकन निरस्त करने का फैसला वापस लिया गया और आदर्श का नाम वैध प्रत्याशियों की सूची में शामिल किया गया लेकिन बीच विश्वविद्यालय में यह खबर फैल गई कि आदर्श का नामांकन निरस्त हो गया है। अगर नामांकन पर यह विवाद न हुआ होता तो आदर्श और मजबूती के साथ चुनाव लड़ सकते थे।

इस बार भी इलाहाबाद विश्वविद्यासलय छात्रसंघ चुनाव में किसी छात्रा को जगह नहीं मिली। अध्यक्ष पद के लिए छात्रा प्रियंका सिंह चुनाव मैदान में थी लेकिन उन्हें तीसरे नंबर से संतोष करना पड़ा। वहीं, उपाध्यक्ष पद के लिए आभा यादव और सुमन देवी चुनाव लड़ रहीं थीं। सुमन आइसा से प्रत्याशी थीं लेकिन उन्हें 376 मतों के साथ सातवें नंबर से संतोष करना पड़ा। वहीं, आभा यादव 747 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहीं। महासचिव, संयुक्त सचिव और सांस्कृतिक सचिव पद के लिए किसी छात्रा ने पर्चा दाखिल ही नहीं किया था।

छात्रसंघ चुनाव में कई प्रत्याशियों को नोटा से भी कम वोट मिले। अध्यक्ष पद के चुनाव में 112 वोटों के साथ नोटा सातवें स्थान पर रहा जबकि आठवें स्थान पर रहे सुजीत कुमार यादव को महत 32 वोट मिले। इसी तरह उपाध्यक्ष पद के लिए नोटा को 256 वोट मिले और प्रत्याशी दीपक मिश्र को 150 एवं विकास यादव ‘सौरभ’ को 95 वोट मिले। महासचिव पद के चुनाव में विकास यादव को 388 एवं अमृतेश यादव को 285 वोट मिले और 414 वोट नोटा को मिले। इसी तरह अलग-अलग संकाय वर्गों के चुनाव में भी कमावेश यही स्थिति रही।

स्नातक विधि संकाय वर्ग प्रतिनिधि के चुनाव में गोपाल नाथ कर्ण का नामांकन के ही निर्विरोध निर्वाचन हो गया था। इसके बावजूद उन्हें वोट दे दिए गए। खास यह रहा कि इस पद के लिए उन्हें 148 वोट मिले और 832 वोट अवैध घोषित किए जबकि नोटा को 20 वोट मिले।


हमेशा की तरह इस बार भी हॉस्टलों की भागीदारी ने छात्रसंघ चुनाव की दशा और दिशा तय की। पांच में से तीन नवनिर्वाचित पदाधिकारी हॉस्टल में रहते हैं। अध्यक्ष निर्वाचित हुए अवनीश यादव और संयुक्त मंत्री बने भरत सिंह हॉलैंड हॉल में रहते हैं और उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए चंद्रशेखर चौधरी अंबेडकर हॉस्टल के हैं। इन सभी पदाधिकारियों का चुनाव संचालन सीधे हॉस्टल से किया जा रहा था और चुनाव सबंधी सभी रणनीति भी हॉस्टल में तैयार की जा रही थी।
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