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High Court : अब्दुल गनी शाह शरीफ मजार व कब्रिस्तान को नहीं मिली राहत, याचिका खारिज

Wed, 08 Oct 2025 05:12 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 08 Oct 2025 05:12 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल गनी शाह शरीफ मजार व कब्रिस्तान की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने दिया है। देवरिया में गोरखपुर रोड पर अब्दुल गनी शाह शरीफ मजार व कब्रिस्तान स्थित है।

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Abdul Ghani Shah Sharif's shrine and graveyard did not get relief, petition dismissed
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब्दुल गनी शाह शरीफ मजार व कब्रिस्तान की ओर से दाखिल याचिका खारिज कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की एकलपीठ ने दिया है। देवरिया में गोरखपुर रोड पर अब्दुल गनी शाह शरीफ मजार व कब्रिस्तान स्थित है। इसकी भूमि उप्र सुन्नी सेंट्रल बोर्ड की ओर से 1993 में वक्फ संपत्तियों की सूची में दर्ज की गई थी। उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 के तहत दर्ज मामले में अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट, देवरिया ने एक सितंबर 2025 को मजार व कब्रिस्तान को लेकर राजस्व अभिलेख में संशोधन के लिए नोटिस जारी किया था। इसके खिलाफ अब्दुल गनी शाह शरीफ मजार व कब्रिस्तान की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई।

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साथ ही यह भी अनुरोध किया था कि अधिकारियों को वक्फ संपत्ति को अवैध रूप से ध्वस्त करने से रोका जाए। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि वक्फ अधिनियम के मद्देनजर, राजस्व संहिता के तहत राजस्व अभिलेख में संशोधन कार्यवाही जायज नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह कहते हुए हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया कि याची के पास ये सभी मुद्दे संबंधित प्राधिकारी के समक्ष उठाने का उपाय है। याची जारी किए गए नोटिस पर जवाब दाखिल कर सकता है। न्यायालय ने पाया कि याचिका में हस्तक्षेप का कोई मामला नहीं बनता है और याचिका खारिज कर दी। 

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बरेली हिंसा के खिलाफ जनहित याचिका दाखिल, ध्वस्तीकरण पर रोक की मांग

इलाहाबाद हाईकोर्ट में बरेली में 26 सितंबर को हुई हिंसा में हजरत ख्वाजा गरीब नवाज वेलफेयर एसोसिएशन महाराष्ट्र के अध्यक्ष मोहम्मद यूसुफ ने आपराधिक जनहित याचिका दाखिल की है। इसमें आरोपियों के खिलाफ की जा रही ध्वस्तीकरण और सीलिंग की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की गई है।

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याचिका में कहा गया है कि बिना नोटिस और सुनवाई का मौका दिए ध्वस्तीकरण और जब्ती की कार्यवाही संविधान का उल्लंघन है। ऐसे में एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश की देखरेख में न्यायिक जांच के लिए परमादेश जारी किया जाए। साथ ही एक ही घटना के लिए कई एफआईआर दर्ज करने के जिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। कार्यवाही से प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाए। दर्ज मुकदमे पर रोक और निर्दोष व्यक्तियों पर कार्यवाही न की जाए। दुकानें सीज होने से रोजगार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में कार्यवाही पर रोक लगाई जाए। याचिका में राज्य सरकार, बरेली के डीएम, विकास प्राधिकरण, एसएसपी, एसएचओ बारादरी, एसएचओ प्रेमनगर आदि को प्रतिवादी बनाया गया है। 

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