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आदालत के आदेश पर दर्ज हुए एक तिहाई मुकदमे
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 17 Jan 2015 01:31 AM IST
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इलाहाबाद। प्रदेश में अनुसूचित जाति के लोगों के उत्पीड़न के मामलों में एक तिहाई मुकदमे अदालत के आदेश पर दर्ज किए गए। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया ने शुक्रवार को कमिश्नरी में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान इन आंकड़ों की आड़ में प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। यहां इलाहाबाद मंडल में एससी उत्पीड़न के लंबित मामलों की समीक्षा करने आए अध्यक्ष पीएल पुनिया ने मंडल में निस्तारण की स्थिति को ठीक बताया लेकिन इसका श्रेय भी उन्होंने खुद लिया। कहा कि नियमित रूप से बैठकें करने का नतीजा है कि अफसरों ने तय समय में मामलों का निस्तारण कर दिया।
उन्होंने कहा कि पुलिस जब रिपोर्ट नहीं दर्ज करती तो लोग सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होता है। यह पुलिस के लिए निंदनीय है। दुर्भाग्य के प्रदेश में ऐसे एक तिहाई मामले हैं, जहां न्यायालय के आदेश पर मुकदमे दर्ज किए गए। यह भी कहा कि बसपा और सपा सरकार में मामलों के निस्तारण की लगभग एक जैसी स्थिति रही। अध्यक्ष के मुताबिक उन्होंने मंडलीय बैठक में पुलिस के अफसरों को हिदायत दी कि गुड वर्क की आड़ में गरीबों और असहायों का उत्पीड़न न करें। अफसरों से यह भी कहा कि उत्पीड़न का शिकार कोई व्यक्ति आवेदन लेकर आए तो संवेदनशीलता दिखाते हुए उससे खुद मिलें। यह उचित नहीं है कि पीआरओ या कोई मातहत आवेदन लेकर मामले को रफा दफा कर दे।
इस बात पर चिंता जताई के अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए जारी फंड का डायवर्जन किया जा रहा है। बताया कि इलाहाबाद में एससी उत्पीड़न के 30 में से 21, कौशाम्बी में दो में से एक, फतेहपुर में आठ में से चार और प्रतापगढ़ में छह में से पांच मामलों का निस्तारण कर दिया गया है। ज्यादा मामले भूमि विवाद से संबंधित थे। इसके अलावा हत्या, बलात्कार के भी मामले थे। यह भी बताया कि डीएम के नेतृत्व में वाली जिला स्तरीय विजिलेंस ऐंड मॉनीटरिंग कमेटी की साल में चार बैठक होनी चाहिए। इलाहाबाद एवं कौशाम्बी में दो-दो और प्रतापगढ़ में एक बैठक हुई जबकि फतेहपुर में चारों बैठकें हुईं।
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उन्होंने कहा कि पुलिस जब रिपोर्ट नहीं दर्ज करती तो लोग सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं। इसके बाद न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज होता है। यह पुलिस के लिए निंदनीय है। दुर्भाग्य के प्रदेश में ऐसे एक तिहाई मामले हैं, जहां न्यायालय के आदेश पर मुकदमे दर्ज किए गए। यह भी कहा कि बसपा और सपा सरकार में मामलों के निस्तारण की लगभग एक जैसी स्थिति रही। अध्यक्ष के मुताबिक उन्होंने मंडलीय बैठक में पुलिस के अफसरों को हिदायत दी कि गुड वर्क की आड़ में गरीबों और असहायों का उत्पीड़न न करें। अफसरों से यह भी कहा कि उत्पीड़न का शिकार कोई व्यक्ति आवेदन लेकर आए तो संवेदनशीलता दिखाते हुए उससे खुद मिलें। यह उचित नहीं है कि पीआरओ या कोई मातहत आवेदन लेकर मामले को रफा दफा कर दे।
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इस बात पर चिंता जताई के अनुसूचित जाति के कल्याण के लिए जारी फंड का डायवर्जन किया जा रहा है। बताया कि इलाहाबाद में एससी उत्पीड़न के 30 में से 21, कौशाम्बी में दो में से एक, फतेहपुर में आठ में से चार और प्रतापगढ़ में छह में से पांच मामलों का निस्तारण कर दिया गया है। ज्यादा मामले भूमि विवाद से संबंधित थे। इसके अलावा हत्या, बलात्कार के भी मामले थे। यह भी बताया कि डीएम के नेतृत्व में वाली जिला स्तरीय विजिलेंस ऐंड मॉनीटरिंग कमेटी की साल में चार बैठक होनी चाहिए। इलाहाबाद एवं कौशाम्बी में दो-दो और प्रतापगढ़ में एक बैठक हुई जबकि फतेहपुर में चारों बैठकें हुईं।
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