एक छपाक यहां भीः एसिड पीड़ितों की आवाज बनीं प्रयागराज की रेशमा कुरैशी
दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘छपाक’ से एसिड पीड़िताएं एकबारगी चर्चा में है। फिल्म एक एसिड पीड़िता के संघर्ष और उसकी जिजिविषा पर आधारित है। कुछ ऐसी ही कहानी अपने जिले में मऊआइमा की एसिड पीड़ित रेशमा की भी है। अपने साथ हुए उस खौफनाक हादसे को भुलाकर रेशमा कुरैशी ने फैशन डिजाइनिंग में एक मुकाम हासिल किया। अमेरिका में उनको अवार्ड से भी नवाजा गया। एसिड अटैक से न सिर्फ उनका चेहरा खराब हो गया था, बल्कि आंखों की रोशनी भी कम हो गई थी। लेकिन, इसके बावजूद रेशमा ने सभी बाधाओं को हटाते हुए सफलता हासिल की।
19 मई 2014, यह तारीख रेशमा पर कहर बनकर टूटी थी। सुलतानपुर खास निवासी जहीरउद्दीन की बेटी रेशमा कुरैशी अपनी बहन गुलशन बानो के साथ मदरसा बोर्ड की परीक्षा देने जा रही थी। दोनों जैसे ही मऊआइमा रेलवे स्टेशन के पास पहुंचीं, तभी उनका जीजा जमीलउद्दीन उर्फ राजू ने रेशमा पर एसिड फेंक दिया।
रेशमा बुरी तरह झुलस गईं। रेशमा का खूबसूरत चेहरा बिगड़ने के साथ ही उनकी आंखों की रोशनी भी कम हो गई। समय बीतने के साथ ही रेशमा ने उस घटना को भुलाकर नई शुरुआत की। उन्होंने फैशन डिजाइनिंग में काम शुरू किया। मेहनत कर उन्होंने दिन-रात एक कर दिए। धीरे-धीरे रेशमा फैशन डिजाइनिंग में बड़ा नाम बन गईं। एसिड पीड़ितों की आवाज बनकर वह उनकी प्रेरणा भी बनीं। रेशमा को कुछ समय पहले अमेरिका में फैशन डिजाइनर बनने पर अवार्ड से सम्मानित किया गया। उस घटना के बाद से परिवार गांव छोड़कर मुंबई में बस गया।
नकाब के धोखे में जीजा ने किया था एसिड अटैक
रेशमा की बड़ी बहन गुलशन बानो की शादी मलखानपुर गांव निवासी जमीलउद्दीन से हुई थी। शादी के कुछ समय बीत जाने के बाद पति-पत्नी में अनबन हो गई। मामला कोर्ट में विचाराधीन था। इसी बीच 19 मई 2014 को दोनों बहनें मदरसा बोर्ड की परीक्षा देने निकलीं। माना जाता है कि अपनी पत्नी के धोखे में जमीलउद्दीन ने एसिड रेशमा पर फेंक दिया था। आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।दुनिया वाले एसिड पीड़ितों को कमजोर न समझें। मेरी जिंदगी का लक्ष्य है कि मैं एसिड पीड़ितों के अंदर से हीन भाव खत्म करके उन्हें आत्मनिर्भर बनाऊं। यही मेरा मकसद है।
- रेशमा कुरैशी