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प्रेम का आख्यान है ‘पूर्णाहुति’
ब्यूरो/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Fri, 24 Apr 2015 01:21 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। समय और समाज के अनेक आयाम सहेजे मधुरिमा प्रसाद का उपन्यास ‘पूर्णाहुति’ बृहस्पतिवार को सुधी पाठकों के बीच पहुंचा तो पढ़ा और सराहा गया। सुरभि संस्था की ओर निराला सभागार में हुए समारोह में उपन्यास ‘पूर्णाहुति’ का विमोचन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि एनसीजेडसीसी के निदेशक गौरव कृष्ण बंसल ने कहा, ‘पूर्णाहुति’ पाठकों से रिश्ता जोड़ने में सफल है। एक बार शुरुआत के बाद पाठक इसे अंत तक पढ़ना चाहता है और यही इसकी खूबी है। कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ.मत्स्येंद्र शुक्ल ने कहा, ‘पूर्णाहुति’ अनेक आयामों का संगम हैं। लेखिका ने विषयों को तथ्यों के साथ सहजता से प्रस्तुत करने की सफल कोशिश है।
वरिष्ठ पत्रकार अजामिल ने कहा, उपन्यास की भाषा सहज और प्रवाहपूर्ण है। किसी भी कृति की यह सबसे बड़ी बात है। डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि उपन्यास में प्रेम की रोचक प्रस्तुति की गई है। रविनंदन सिंह ने कहा, उपन्यास में सरल और सहज शब्दों का बखूबी प्रयोग किया गया है। संचालक सुपरिचित कवि डॉ.श्लेष गौतम ने ‘पूर्णाहुति’ को प्रेम में समर्पण की सहज अभिव्यक्ति बताया। कार्यक्रम में तलब जौनपुरी, दयाशंकर पांडेय, वीए त्रिपाठी, सागर होशियारपुरी, फूलचंद्र दुबे, डॉ.सत्या पांडेय, बृजरानी वर्मा, रंजना बिसारिया, बसंतलाल आजाद, अशोक कुमार स्नेही आदि मौजूद रहे।
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वरिष्ठ पत्रकार अजामिल ने कहा, उपन्यास की भाषा सहज और प्रवाहपूर्ण है। किसी भी कृति की यह सबसे बड़ी बात है। डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने कहा कि उपन्यास में प्रेम की रोचक प्रस्तुति की गई है। रविनंदन सिंह ने कहा, उपन्यास में सरल और सहज शब्दों का बखूबी प्रयोग किया गया है। संचालक सुपरिचित कवि डॉ.श्लेष गौतम ने ‘पूर्णाहुति’ को प्रेम में समर्पण की सहज अभिव्यक्ति बताया। कार्यक्रम में तलब जौनपुरी, दयाशंकर पांडेय, वीए त्रिपाठी, सागर होशियारपुरी, फूलचंद्र दुबे, डॉ.सत्या पांडेय, बृजरानी वर्मा, रंजना बिसारिया, बसंतलाल आजाद, अशोक कुमार स्नेही आदि मौजूद रहे।
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